RD Burman ने सोते हुए लिखी थी सदाबहार गाने की धुन, 55 साल पुराने गीत में Lata Mangeshkar ने दी थी आवाज
लीजेंडरी म्यूजिशियन RD Burman ने इस गाने की धुन सोते हुए अपने सपने में बनाई थी। इसे लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया था। ...और पढ़ें
-1780121245103_m.webp)
आरडी बर्मन ने सपने में बनाई थी इस गाने की मेलोडी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के लीजेंडरी म्यूजिशियन आरडी बर्मन (RD burman Songs) ने कई बेहतरीन और यादगार गाने फिल्म इंडस्ट्री को दिए हैं। इनमें से कई गाने ऐसे भी हैं जिनकी धुन पंचम दा ने नींद में बनाई। इस बात का खुलासा उन्होंने खुद किया था।
खासकर आज हम जिस गीत बात करने जा रहे हैं उसकी धुन पंचम दा ने सोते हुए बनाई थी और फिर यह लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज में हिट हो गई।
कौन सा है वो गाना?
सपने में धुन: आर.डी. बर्मन से जुड़ी दिलचस्प बातों के अनुसार, उनकी कुछ सबसे मशहूर धुनें उन्हें नींद में सूझी थीं; और 'कांची रे कांची रे' (Kanchi Re Kanchi Re) की धुन भी उन्हीं धुनों में से एक मानी जाती है, जो उन्होंने सपने में सोची थी। इस गाने को लीजेंडरी सिंगर्स और किशोर कुमार (Kishore Kumar Songs) और लता मंगेशकर (Lata Mageshkar Songs) ने गाया था।
-1780121380529.jpg)
यह भी पढ़ें- मधुबाला पर फिल्माया गया था Lata Mangeshkar का पहला हिट सॉन्ग, 77 सालों से पहुंचा रहा है दिलों को सुकून
आर डी बर्मन ने दिया था म्यूजिक
कांची रे कांची रे सदाबहार गीत 1971 में रिलीज हुई फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा का है। इसका शानदार संगीत खुद आर डी बर्मन ने तैयार किया था और इसके शानदार लिरिक्स आनंद बख्शी ने लिखे थे। वहीं बड़े पर्दे पर यह यागदार गीत देव आनंद और मुमताज पर फिल्माया गया था।
-1780121398386.jpg)
क्या है गाने का मतबल?
इस गाने के बोल में कांची और कांछा का यूज किया गया है जो कि एक नेपाली शब्द है। इसका मतलब है- छोटी लड़की/प्रेमिका और कांछा का मतलब है छोटा लड़का/प्रेमी।
-1780121424570.jpg)
फिल्म के बारे में
'हरे रामा हरे कृष्णा' 1972 की एक भारतीय हिंदी-भाषा की म्यूजिकल ड्रामा फिल्म है, जिसे नवकेतन फिल्म्स के बैनर तले देव आनंद ने लिखा, प्रोड्यूस किया और डायरेक्ट किया था। इसमें मुख्य भूमिकाओं में खुद आनंद के साथ मुमताज, जीनत अमान और प्रेम चोपड़ा हैं।
खबरें और भी
यह फिल्म हिप्पी संस्कृति के पतन को दर्शाती है, और इसका उद्देश्य नशामुक्ति का संदेश देना था; साथ ही यह पश्चिमीकरण से जुड़ी कुछ समस्याओं को भी दिखाती है।
यह भी पढ़ें- 77 साल पुरानी फिल्म से Madhubala और Lata Mangeshkar को एक साथ मिली थी स्टारडम, हॉरर थ्रिलर का खौफ आज भी है बरकरार