ज्यादा उड़ने की जरूरत नहीं... Bindiya Ke Bahubali 2 की सफलता पर सौरभ शुक्ला की दो टूक
वेटरन एक्टर सौरभ शुक्ला इन दिनों अपनी लेटेस्ट वेब सीरीज बिंदिया के बाहुबली सीजन 2 को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में दैनिक जागरण संग खास बातचीत ...और पढ़ें
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अभिनेता सौरभ शुक्ला (फोटो क्रेडिट- एक्स)
HighLights
हाल ही में रिलीज हुआ बिंदिया के बाहुबली सीजन 2
बिंदिया के बाहुबली से सौरभ को मिली लोकप्रियता
सीरीज की सफलता पर खुलकर बोले सौरभ शुक्ला
एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई। कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो खुद को किसी एक माध्यम की सीमाओं में नहीं बांधते। अभिनेता सौरभ शुक्ला भी ऐसे ही कलाकारों में शुमार हैं। हाल ही में वे वेब सीरीज ‘बिंदिया के बाहुबली 2’ में एक बार फिर बाहुबली की भूमिका में आए हैं नजर...
बिल्ली ने दिखाई जगह
अभिनेता सौरभ शुक्ला जिस भी भूमिका को निभाते हैं, उसके ही हो जाते हैं। हाल ही में प्रदर्शित हुई वेब सीरीज ‘बिंदिया के बाहुबली 2’ के लिए मिल रही सराहना को लेकर सौरभ मजेदार बात बताते हैं, ‘दर्शकों से इस बारे में अभी बहुत बातचीत नहीं हुई है, लेकिन जो सबसे दिलचस्प तारीफ मिली, वह एक सह-कलाकार से आई और वह सह-कलाकार मेरी सफेद बिल्ली है।
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जब वह मेरी गोद में होती है और मैं अभिनय कर रहा होता हूं, तो उसे जरा भी दिलचस्पी नहीं होती। यही प्रतिक्रिया मुझे याद दिलाती है कि ज्यादा उड़ने की जरूरत नहीं है। आप दुनिया के केंद्र में नहीं हैं। यही सराहना मुझे सबसे अच्छी लगी।’
बस इतना जरूरी है
इंटरनेट मीडिया के दौर में परफार्मेंस के साथ-साथ कलाकारों पर अपनी छवि बनाए रखने के बढ़ते दबाव को लेकर सौरभ मानते हैं कि यह दबाव पहले भी था, बस उसके रूप अलग थे। वह कहते हैं, ‘पहले सिर्फ प्रिंट मीडिया था। फिर धीरे-धीरे टेलीविजन आया और आज इंटरनेट की वजह से यह सब हर किसी के लिए, हर जगह उपलब्ध है, लेकिन मेरा मानना है कि लोग क्या कहेंगे या नहीं कहेंगे, यह आपके हाथ में नहीं है। आप बस अपनी नैतिकता, विचारों और शब्दों को लेकर जिम्मेदार रहो। बस यही जरूरी है।’
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कोई तैयारी नहीं करता
‘सत्या’, ‘रेड’ जैसी फिल्मों में गंभीर भूमिकाएं निभाने वाले सौरभ ने ‘जाली एलएलबी’ फ्रेंचाइज में कामिक अंदाज से भी दर्शकों को खूब हंसाया है। इन दोनों के बीच संतुलन को लेकर सौरभ कहते हैं, ‘जब हम जिंदगी जीते हैं, तो हर तरह की भावनाएं महसूस करते हैं। आपने जिंदगी कितनी जी है और दुनिया को कितना देखा है, अभिनय वहीं से आता है। इसके लिए कोई अलग या खास तैयारी नहीं होती। मुझे नहीं लगता कि यह उतना जटिल है, जितना लोग समझते हैं।’
कुछ नया नहीं कर रहे हम
आज वेब सीरीज और फिल्मों में बढ़ती हिंसा को लेकर कलाकारों की जिम्मेदारी के सवाल पर सौरभ अपनी बात रखते हैं, ‘यह पूरी तरह सांस्कृतिक संदर्भ पर निर्भर करता है। असल में यह कोई नई बात नहीं है। कला वही दिखाती है, जो आस-पास हो रहा होता है। मुझे याद है, बचपन में दिल्ली में रंगा-बिल्ला का केस हुआ था। हम सब हिल गए थे, क्योंकि ऐसा पहले सुना नहीं था।
आज जब ऐसे मामलों को हर चैनल और हर प्लेटफार्म पर देखा जाता है, तो यह सामान्य-सा लगने लगा है। आखिरकार, जब आप कोई कहानी कहते या फिल्म बनाते हैं, तो वह आस-पास की दुनिया को ही प्रतिबिंबित करती है। अगर आपको यह ज्यादा या कम लग रहा है, तो आपको यह भी देखना चाहिए कि दूसरे क्षेत्रों में हिंसा और उसकी रिपोर्टिंग किस स्तर पर मौजूद है।’
शो में सौरभ का किरदार अपनी ताकत का प्रदर्शन करता है। अगर उन्हें इंडस्ट्री में बदलाव लाने की ताकत मिले, तो वो क्या करेंगे?
इस पर सौरभ का नजरिया बेहद संतुलित है। वह कहते हैं, ‘मैं बहुत खुश हूं। बदलने के बारे में सोचने से ज्यादा बेहतर है कि हम यह सोचें कि जो चीज पहले से मौजूद है, उसे कैसे विकसित किया जाए और बेहतर जगह तक पहुंचाया जाए। बदल देना तो सबसे आसान काम होता है।’