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    India की हार बर्दाश्त नहीं कर पाया था ये एक्टर, वर्ल्ड कप देखते हुए गंवा बैठा था जान

    Updated: Fri, 13 Mar 2026 03:05 PM (IST)

    हमारे देश में क्रिकेट का क्रेज बहुत ज्यादा है और लोग इससे इमोशनली भी काफी जुड़े होते हैं। खासकर जब वर्ल्डकप में भारत की हार हो जाए तब तो आंसू तक निकल ...और पढ़ें

    वर्ल्ड कप देखते हुए गई थी इस हीरो की जान

    वर्ल्ड कप देखते हुए गई थी इस हीरो की जान

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। बॉलीवुड का क्रिकेट के साथ लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा है। कई सितारों ने इस खेल के प्रति अपने जुनून का इजहार किया है। लेकिन 1980 और 1990 के दशक के एक चहेते सितारे जैसी दीवानगी की बराबरी शायद ही कोई कर पाए; ये स्टार क्रिकेट को लेकर इतने इमोशनल थे कि भारत की वर्ल्ड कप में भारत की हार बर्दाश्त नहीं सके और दिल का दौरा पड़ने से इनका निधन हो गया।

    कौन था क्रिकेट का दीवाना ये स्टार ?

    जिस स्टार का हम जिक्र कर रहे हैं वह थे शफी इनामदार। वे क्रिकेट के बहुत बड़े दीवाने थे। चाहे सेट पर हों या स्टेज पर, वे स्कोर देखने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे। क्रू के सदस्यों को याद है कि वे अक्सर टेक के बीच में पूछते थे, 'स्कोर क्या हुआ?' और ब्रेक के दौरान पास के किसी भी टेलीविजन की ओर दौड़ पड़ते थे।

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    भारत की हार पर आया हार्ट अटैक

    13 मार्च, 1996 को, क्रिकेट वर्ल्ड कप के भारत बनाम श्रीलंका सेमी-फाइनल मैच के दौरान, एक दुखद घटना घटी। जैसे ही भारत लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ाया, बताया जाता है कि इनामदार अपनी टीम की हार का नजारा बर्दाश्त नहीं कर पाए। उन्हें एक जानलेवा हार्ट अटैक आया और उसी शाम उनका निधन हो गया। सालों बाद थिएटर से जुड़े उनके एक करीबी साथी ने कहा, 'क्रिकेट ही उनकी धड़कन था। यह दिल तोड़ने वाली बात है कि जिस खेल से उन्हें इतना प्यार था, वही उनकी आखिरी सांस का कारण बन गया'।

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    थिएटर से सिल्वर स्क्रीन तक

    रत्नागिरी के दापोली में जन्मे शफी इनामदार मूल रूप से कोंकणी थे, जो बाद में अपनी पढ़ाई के लिए मुंबई चले गए। कॉलेज के दिनों में ही उन्हें थिएटर से जुड़ाव महसूस हुआ। एक ऐसा जुड़ाव जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी।

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    उन्होंने गुजराती और मराठी थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की, जहां भाषा पर उनकी मजबूत पकड़ और सामाजिक विषयों की गहरी समझ ने उन्हें खूब सम्मान दिलाया। उन्होंने 'नेशनल थिएटर ऑफ इंडिया' और 'इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन' (IPTA) जैसे प्रतिष्ठित समूहों के साथ काम किया।

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    बॉलीवुड में शोहरत का सफर

    1982 में फिल्म 'विजेता' से करियर की शुरुआत करने वाले शफी ने 'अर्ध सत्य' (1983) में इंस्पेक्टर हैदर अली का यादगार किरदार निभाया, और साथ ही 'अनोखा रिश्ता', 'नजराना', 'सदा सुहागन' और 'अमृत' जैसी फिल्मों में भी काम किया।

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    लेकिन, उन्हें असली शोहरत दूरदर्शन के मशहूर सिटकॉम 'ये जो है जिंदगी' से मिली, जिसने उन्हें घर-घर में एक जाना-पहचाना नाम बना दिया। एक आम और हाजिरजवाब पति के रूप में उनके किरदार ने पूरे भारत के दर्शकों के दिलों को छू लिया। बाद में वे 'आधा सच आधा झूठ', 'गालिब' और 'बादशाह जहांगीर' जैसे टीवी शो में भी नजर आए।

    1966 में इंडिया वर्सेज श्रीलंका के मैच में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन अपने पीछे वे हंसी, जुनून और सिनेमाई प्रतिभा की एक अमिट छाप छोड़ गए।

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