'सीरीज बोरिंग हुई तो...' Kohrra Season 2 के डायरेक्टर ने OTT कंटेंट और बॉक्स ऑफिस असंतुलन पर रखी राय
निर्देशक-लेखक सुदीप शर्मा डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेखकों के लिए अहम के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण मानते हैं। उन्होंने ने बॉक्स ऑफिस पर ओटीटी के प्रभाव और सिनेमा ...और पढ़ें

सुदीप शर्मा ने ओटीटी के प्रभाव पर की बात। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

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प्रियंका सिंह, मुंबई। सिनेमा निर्देशक का माध्यम है, रंगमंच कलाकार का और डिजिटल प्लेटफार्म लेखकों का। यह बात क्रिएटर, निर्देशक और लेखक सुदीप शर्मा को संतुष्टि देती है। सोनचिड़िया, उड़ता पंजाब समेत कई फिल्मों में लेखन कर चुके सुदीप निर्देशित वेब सीरीज कोहरा 2 नेटफ्लिक्स (Netflix) पर 11 फरवरी को स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध होगी।
सुदीप शर्मा कहते हैं कि पश्चिमी देशों में डिजिटल प्लेटफार्म के कंटेंट को टेलीविजन की कैटेगरी में ही रखा जाता है। हमारे यहां ऐसा नहीं हो सकता है, क्योंकि ओटीटी और टीवी के कंटेंट बहुत अलग होते हैं। हर तरह के लेखकों के लिए डिजिटल प्लेटफार्म बहुत सही माध्यम है। अगर यहां उन्हें मौके नहीं मिलेंगे तो कहां मिलेंगे।
कोहरा 2 मर्डर मिस्ट्री है। सुदीप को ऐसी कहानियों की चुनौतीपूर्ण बात यही लगती है कि इसके हर एपिसोड को वहां खत्म किया जाता है, जहां जिज्ञासा बनी रहे।
OTT कंटेंट पर देना पड़ता है ज्यादा ध्यान
वह आगे कहते हैं कि लेखकों की चुनौती ऐसे जॉनर में बढ़ जाती है, उन्हें अपनी भूमिकाओं के लिए वह जिज्ञासा दर्शकों के भीतर जगाए रखनी पड़ती है ताकि वे उन किरदारों के बारे में और जानना चाहें। इसमें सिनेमा की तरह दर्शक बंधे हुए नहीं होते हैं। सिनेमा में एक बार पैसे देकर टिकट ले ली तो वह कितनी भी खराब फिल्म होगी देख तो लेंगे ही। ओटीटी पर सीरीज बोरिंग हुई तो छोड़ देंगे और वापस भी नहीं आएंगे।
फिल्मों के फ्लॉप पर सुदीप की राय
आगे सुदीप सिनेमाघरों में फिल्मों की कमाई के असंतुलन पर भी बात करते हैं, जिसमें कोई फिल्म पांच सौ करोड़ कमा लेती है तो कोई अच्छी समीक्षा के बाद भी चल नहीं पाती। सुदीप कहते हैं कि यह बदलाव का दौर है, जो सिनेमाघरों के मामले में पूरी दुनिया में हो रहा है। हालांकि पिछले पांच-छह साल में ओटीटी ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। अब सिनेमा इवेंट यानी किसी समारोह में जाने जैसा हो गया है। एक फिल्म जिसके बारे में बहुत बातें होती हैं, वो एक समारोह बन जाता है। उनमें ऐसे सितारे भी होते हैं, जिन्हें लोग पर्दे पर ही देखना चाहते हैं। छोटी फिल्में ऐसा नहीं कर पाती हैं, भले ही वे अच्छी हों।
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बॉक्स ऑफिस असंतुलन से कैसा फायदा?
सुदीप शर्मा कहते हैं कि कोविड के बाद तो फिल्में चल ही नहीं रही थीं। ऐसे में कम से कम अब लोग सिनेमाघर में जा तो रहे हैं। फिल्म इंडस्ट्री में पैसा आएगा तो वह छोटी फिल्मों की तरफ भी जाएगा, क्योंकि बड़ी फिल्में बहुत नहीं बन सकती हैं। बड़ी फिल्मों के लिए बड़े स्टार चाहिए होते हैं, जो वही सात-आठ चुनिंदा हैं। वे कितनी फिल्में एक साल में शूट कर लेंगे। इस असंतुलन से कुछ अच्छा ही निकलेगा।
कॉमेडी शो लेकर आ रहे हैं सुदीप शर्मा
सुदीप की लिखी हुई फिल्म बंदर पिछले साल टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई थी। इसके अलावा उन्होंने नेटफ्लिक्स के लिए एक कॉमेडी शो भी लिखा है। वह कहते हैं कि छह एपिसोड वाली कामेडी सीरीज लिखी है। इसे लिखना काफी मजेदार रहा। एक फरवरी से इसकी हम शूटिंग शुरू करेंगे।