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हर टूटे दिल का 'मरहम' है ये गीत, 51 साल पहले लता-किशोर ने दी थी आवाज; पंचम दा की धुन छेड़ देते हैं तार

Updated: Sun, 09 Aug 2026 10:08 AM (IST)

किशोर कुमार (Kishore Kumar) और लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने 51 साल पहले एक ऐसा गीत गाया जो आज भी अनकहे जज्बात को बयां करता है।

अधूरी मोहब्बत को बयां करता है गीत। फोटो क्रेडिट- एक्स

अधूरी मोहब्बत को बयां करता है गीत। फोटो क्रेडिट- एक्स

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। कुछ गाने दिल के तार छेड़ देते हैं। अधूरी मोहब्बत और जुदाई के दर्द को इतनी खूबसूरती से गानों के जरिए पेश किया जाता है कि वह सालों-साल भुलाए नहीं जा सकते हैं। 51 साल पहले भी एक ऐसा ही गीत बना था जो आज भी बेस्ट ब्रेकअप एंथम (Breakup Anthem) बना हुआ है।

यह गीत (Old Hindi Song) अधूरी मोहब्बत, जुदाई और अनकहे जज्बात को बयां करता है। बिछड़ने के सालों बाद फिर से मिलने की खामोशी, पुरानी याद और दर्द को लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) और किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने अपनी आवाज में इतनी शालीनता के साथ जाहिर किया है कि आप इसे सुनते ही खो जाएंगे।

गुलजार ने लिखे थे गाने के बोल

यह गीत 1975 की सुपरहिट फिल्म 'आंधी' (Aandhi) का है। गुलजार के निर्देशन में बनी फिल्म में संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) और सुचित्रा सेन (Suchitra Sen) ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। गुलजार साहब ने न केवल फिल्म का निर्देशन किया, बल्कि गाने की लिरिक्स भी खुद ही लिखी थी।

गाना लाता है एक अहम मोड़

गुलजार के बोल, आरडी बर्मन उर्फ पंचम दा का म्यूजिक और लता-किशोर की आवाज ने 'आंधी' के सभी गानों को सफलता दिल दी। मगर एक गाना हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गया जिसे आज भी लोग सुनते हैं और रिलेट करते हैं। यह गीत है- 'तेरे बिना जिंदगी से' (Tere Bina Zindagi Se)। 

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यह गाना तब फिल्माया गया था, जब संजीव और सुचित्रा बिछड़ने के सालों बाद एक-दूसरे से मिलते हैं। उनके बीच बात कम, खामोशी ज्यादा होती है। उनके दिल के जज्बातों को गुलजार ने 'तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा नहीं' के बोल के जरिए जाहिर किया है। लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज ने इस गाने को अमर बनाया है। 

 

आरडी बर्मन ने कॉपी की थी धुन

इस गाने से जुड़ी एक और दिलचस्प बात यह है कि इसकी धुन पंचम दा ने अपने ही एक बंगाली नॉन-फिल्मी गाने 'जेते-जेते पथे होलो देरी' से लिया था जिसे खुद उन्होंने ही आवाज दी थी। लता-किशोर की आवाज, गुलजार के बोल और पंचम दा की धुन ने इस गाने को भारतीय सिनेमा के इतिहास का मास्टरपीस बना दिया। 

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