Amitabh Bachchan से क्यों जल-भुन गए थे विनोद खन्ना? 'ओशो' ने पढ़ ली थी 'दयावान' एक्टर के मन की बात
विनोद खन्ना ने करियर के पीक पर बॉलीवुड छोड़कर सादा जीवन जीने का निर्णय लिया था और वह ओशो के आश्रम में चले गए थे। इसके बावजूद बिग बी के प्रति उनके अंदर ...और पढ़ें
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विनोद खन्ना को क्यों हुई थी अमिताभ बच्चन से जलन/ फोटो- Instagram

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। विनोद खन्ना ने अपने स्टारडम के चरम पर कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने उन्हें अपने दौर के एक्टर्स से लोकप्रियता में पीछे कर दिया। साल 1975 में आध्यात्मिक गुरु ओशो (श्री रजनीश) से दीक्षा लेने के बाद विनोद खन्ना ने करियर के पीक पर 1982 में पूरी तरह से बॉलीवुड को अलविदा कह दिया था। जहां वह एक आश्रम में रहने लगे और खुद को 'स्वामी विनोद भारती' का नाम दिया।
सबकुछ छोड़कर एक सादगी भरी जिंदगी जीने पहुंचे विनोद खन्ना आखिर आश्रम में रहकर भी क्यों गुमसुम और दुखी रहते थे और साथ ही उन्हें अमिताभ बच्चन से जलन क्यों होने लगी थी? अभिनेता से जुड़ा यह किस्सा ओशो के भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने शेयर किया था।
अमिताभ बच्चन के खिलाफ इलेक्शन लड़ने की मिली सलाह
ओशो के भाई स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने पिंकविला की हिंदी वेबसाइट को दिए एक पुराने इंटरव्यू में कहा था, "उन्होंने देखा कि विनोद दुखी हैं और अपने आसपास के लोगों से पूछा कि उन्हें क्या चीज परेशान कर रही है? कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें अपने परिवार की याद आ रही है, लेकिन उन्हें लगा कि नहीं, उन्हें परिवार की याद नहीं आ रही है। उनसे कहो कि वह भारत वापस जाएं और अमिताभ बच्चन के खिलाफ इलेक्शन लड़ें। मैं यह कभी सोच भी नहीं सकता था कि उनकी राजनीति में जाने की चाहत है, लेकिन ओशो के पास वह अंतर्दृष्टि थी।"
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अमिताभ बच्चन से मन ही मन जलने लगे थे विनोद खन्ना
स्वामी शैलेंद्र सरस्वती ने यह भी बताया था कि विनोद खन्ना से जुड़ी जो चीज वह नहीं देख पा रहे थे, उसे ओशो बहुत ही बेहतरीन तरीके से समझ चुके थे। उन्हें यह बहुत ही अच्छे से समझ आ गया था कि विनोद खन्ना को परिवार से दूर होने का दर्द नहीं है, बल्कि उन्हें अपना स्टेटस खोने की पीड़ा है। उन्होंने बॉलीवुड तब छोड़ा था जब वह अपने करियर के पीक पर थे और उनकी अनुपस्थिति में अमिताभ बच्चन नंबर 1 स्टार बन चुके थे। विनोद खन्ना ने खुद को यह समझाने की काफी कोशिश की थी कि वह एक नेक इंसान हैं, लेकिन ओशो को यह आभास हो गया था कि उन्हें बॉलीवुड में अपनी टॉप पोजीशन खोने का दर्द है और वह मन ही मन अमिताभ बच्चन से जलने लगे थे, जो कई रूपों में सामने आ रही थी।
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कुछ सालों तक आश्रम में रहने के बाद साल 1987 में विनोद खन्ना ने फिल्म 'इंसाफ' से बॉलीवुड में शानदार वापसी की। उनकी 'सत्यमेव जयते' और 'इंसाफ' जैसी फिल्में सुपरहिट तो रहीं, लेकिन 5 साल बाद लौटने के बावजूद वह अमिताभ बच्चन से नंबर 1 की पोजीशन नहीं छीन पाए।