रेखा-माधुरी से अमिताभ-गोविंदा तक... 'मिथुन दा' की वो 29 फिल्में जो आजतक नहीं हुईं रिलीज; क्यों लगा 'ग्रहण'?
मिथुन चक्रवर्ती की 29 से अधिक फिल्में, जिनकी घोषणा और कुछ की शूटिंग भी हुई थी, 70 और 80 के दशक में कभी रिलीज नहीं हो पाईं। ...और पढ़ें

मिथुन दा की वो 29 फिल्में जो आजतक नहीं हुईं रिलीज (फोटो-एक्स)

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। बड़े पर्दे पर अगर आपको एक्शन, ड्रामा, रोमांच और ऊपर से देसी तड़का... ये सब नजर आ जाए तो समझ जाना इस फिल्म में किसी और की नहीं बल्कि मिथुन चक्रवर्ती की मौजूदगी जरूर होगी। मिथुन दा ने हिंदी सिनेमा में अनगिनत फिल्में की हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 29 फिल्में उनकी ऐसी रहीं, जो कभी रिलीज ही नहीं हुईं।
आजतक रिलीज नहीं हुईं मिथुन दा की ये फिल्में
70 और 80 के दशक में मिथुन (Mithun Chakrabotyy) ने फिल्मों में अपनी धाक जमा ली थी। मिथुन ने अपनी फिल्मों के दम पर जमकर लोगों का मनोरंजन किया। उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुईं और कमाल करके गईं, लेकिन मिथुन दा की कई फिल्में ऐसी भी थीं, जिन्होंने कभी बॉक्स ऑफिस का दीदार नहीं किया।
ऐसी करीब 29 फिल्में हैं मिथुन की, जो कभी रिलीज नहीं हुईं। इन फिल्मों की अनाउंसमेंट खूब जोर-शोर से हुई, लेकिन फिल्में सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पाईं। उस दौर में बैक-टू-बैक फिल्मों में मिथुन काम करते थे। एक नहीं बल्कि तीन से चार शिफ्ट में वह फिल्मों की शूटिंग करते थे।
29 से ज्यादा फिल्में नहीं हुईं रिलीज
80 के दशक में मिथुन बड़े स्टार बन चुके थे। एक तरफ जहां अमिताभ बच्चन का जलवा था तो दूसरी ओर मिथुन छोटी बजट की फिल्में करके बड़ा कमाल कर रहे थे। हालांकि मिथुन की कई कुछ फिल्में ऐसी भी थीं जहां मिथुन ने काम शुरू किया था लेकिन बाद में उन्हें रिप्लेस कर दिया गया या उन्होंने खुद फिल्म छोड़ दी।
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1970 से लेकर 90 के दशक तक ऐसी कई फिल्में रहीं मिथुन की, जो डिब्बाबंद होकर रह गईं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1977 में सारिका के साथ 'पुर्नमिलन' और 'आनन्द मय' जैसी फिल्में चर्चा में रहीं। 1978 में काजल किरण के साथ 'मर्डर इन ट्रेन' और 1979 में 'जन्म और कर्म', 'मुन्ना मुन्नी और मां' के साथ-साथ शर्मिला टैगोर के साथ 'भगिनी' भी अनाउंस हुई थीं। इसके बाद 1980 में सिंपल कपाड़िया के साथ 'रुत आए रुत जाए' और रीना राय के साथ 'सौ दिन सास के' की खबरें आईं।
1981 में 'कसम से', 'इश्क मोहब्बत प्यार' ये फिल्म उनकी जरीना वहाब के साथ थी और फिर 'जॉन जानी जर्नादन' जैसी फिल्मों का नाम इस फेहरिस्त में शुमार रहा। वहीं 1983 में मुनमुन सेन के साथ 'तालीम' और 'लुच्चा लफंगा' और फिर इसके अलावा 1985 में 'रैंबो', 1987 में गोविंदा के साथ एक अनटाइटल्ड फिल्म, 1988 में माधुरी दीक्षित के साथ 'रिश्ता' और 'अमीरों का दुश्मन' भी इसी लिस्ट में शामिल हैं। 1989 में रेखा के साथ 'दुश्मन सुहाग का' और 'गंगा पहलवान' का एलान हुआ था।
90 के दशक में भी कई फिल्मों का हुआ एलान
इन फिल्मों के बाद 1991 में उनकी एक फिल्म अमृता सिंह के साथ 'शोबिज' आने वाली थी, लेकिन अफसोस इसे भी सिनेमाघर के दर्शन नहीं हुए। 1992 में जेबा बख्तियार के साथ एक अनटाइटल्ड फिल्म के अलावा रीना राय के साथ 'काला साम्राज्य', जयाप्रदा के साथ 'क्रांतिकारी' और मधु के साथ 'दानवीर' जैसी फिल्में भी कतार में लगी हुई थीं।
1995 में 'सड़कछाप' और 'जालिम जमाना' का काम शुरू हुआ। यहां तक कि 1997 में महानायक के साथ 'वक्त का फैसला' और 1998 में 'परमेश्वर' जैसी फिल्में भी रिलीज के लिए तरसती रहीं।
बड़ी बात यह है कि इन फिल्मों में से कुछ फिल्में ऐसी थीं, जिनकी शूटिंग हुई तो कुछ की रीलें तक तैयार कर ली गई थीं। हालांकि इन फिल्मों ने रिलीज के लिए थिएटर्स का सफर तय नहीं किया था।