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    राजेश खन्ना का यार, भोजपुरी सिनेमा का पहला सुपरस्टार... बॉलीवुड में कैसे 'साइड हीरो' बनकर रह गया ये एक्टर?

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 06:57 PM (IST)

    अक्सर हिंदी सिनेमा में ऐसे स्टार जरूर आते हैं, जिन्हें देखकर लगता नहीं है कि शायद उनके जीवन में ऐसा भी मोड़ आएगा। 60 के दशक में हिंदी सिनेमा में एक ऐस ...और पढ़ें

    फिल्म में साइड हीरो बनकर रह गया ये एक्टर

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। एक सितारा... जिसने सिनेमा को करीब से देखा... एक सितारा जिसने स्टारडम का सवेरा देखा... एक सितारा जो मशहूर भी हुआ पर वो सितारा खुले आसमान के अंधेरे में खो गया। वो स्टार जिसने राजेश खन्ना का सारथी बनकर उनका रथ तो नहीं पर हां जीप जरूर चलाई।

    ये वही सितारा है जो भोजपुरी सिनेमा का पहला सुपरस्टार रहा। ये वही सितारा है, जो बनारस की मिट्टी से निकलकर मायानगरी के बड़े मंच पर पहुंचा, जो कई लोगों के लिए लकी चार्म बना और कई फिल्मों को हिट कराया। भले ही सिनेमा ने उसे 'कैरेक्टर आर्टिस्ट' कहकर सीमित कर दिया हो पर उसके कारवां की कहानी काफी लंबी रही। आज बात उसी सितारे की...

    फिल्मों में ऐसे आए सुजीत कुमार

    आज जिस सितारे की बात हम कर रहे हैं, असल में वह कोई और नहीं बल्कि सुजीत कुमार ही हैं। वही सुजीत कुमार जिन्होंने अपने दम पर सितारों को सहारा दिया और या ये कह सकते हैं कि ये वही स्टार है, जो राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) के लिए भी लकी चार्म रहे।

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    सुजीत कुमार का जन्म 7 फरवरी 1934 को उत्तर प्रदेश के बनारस में हुआ था। एक्टिंग का कीड़ा उनके अंदर बचपन से ही था, हालांकि वो बनना वकील चाहते थे पर किस्मत ने करियर की गाड़ी मायानगरी मुंबई की ओर मोड़ दी और फिर सिनेमा के साम्राज्य में हो गई सुजीत कुमार की एंट्री। आखिरकार सुजीत कुमार को एक्टिंग का पहला मौका 1954 में मिला था, जहां से उनके सपनों को उड़ान मिली।

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    सिनेमा में 'कैरेक्टर आर्टिस्ट' बनकर रह गए सुजीत कुमार

    साल 1954 में 'टैक्सी ड्राइवर' नाम की फिल्म से सुजीत (Sujit Kumar) बॉलीवुड में आ गए। इस फिल्म में एक सीन में सुजीत कुमार एक्टर देव आनंद के साथ दिखे और उनके पीछे सिगरेट पीते नजर आए। इसके बाद सुजीत कुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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    आखिरकार 60 के दशक का वो दौर आया, जब सुजीत कुमार को हिट फिल्मों का स्वाद मिला। कई फिल्मों में सुजीत कुमार ने साइड और कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर काम किया। इसके बाद अक्सर उन्हें ये माना गया कि वो शायद सिनेमा में सिर्फ साइड हीरो बनकर रह गए। 'लाल बंगला', 'एक साल पहले' जैसी फिल्मों में सुजीत कुमार लीड रोल में भी दिखे, लेकिन वो बात नहीं बनी।

    राजेश खन्ना के बने 'सारथी' और की यादगार फिल्में

    1960 के दशक में उन्होंने कई सस्पेंस फिल्में कीं, लेकिन उन्हें असली पहचान मिली 1969 की फिल्म 'अराधना' से। इस फिल्म में वो राजेश खन्ना के दोस्त बने नजर आए। गाने 'मेरे सपनों की रानी' में वे राजेश खन्ना के बगल में बैठे हैं। पूरी दुनिया को लगा कि वो माउथ ऑर्गन सुजीत कुमार बजा रहे हैं, जबकि हकीकत में उन्हें वह बजाना नहीं आता था। उन्होंने सिर्फ ताल पर ऐसा सिर हिलाया कि लोग आज भी उन्हें उसी माउथ ऑर्गन से पहचानते हैं। 

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    (फोटो क्रेडिट- एक्स)

    इसके बाद उन्होंने राजेश खन्ना के साथ 'हाथी मेरे साथी', 'अमर प्रेम' और 'महबूबा' जैसी 12 फिल्में की और ये फिल्म हिट रहीं। फिल्ममेकर्स ने बाद में राजेश खन्ना और सुजीत को खास ध्यान में रखकर ही ये फिल्में बनाईं। अब इसका अंदाजा इससे लगाइए कि दोनों की दोस्ती और कैमिस्ट्री पर कितनी कमाल रही होगी।

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    भोजपुरी सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने सुजीत कुमार

    हिंदी सिनेमा में भले ही सुजीत कुमार को वो तवज्जो नहीं मिली लेकिन फिर वक्त आया सुजीत कुमार का भोजपुरी सिनेमा में एंट्री का। सुजीत कुमार को स्टारडम तब मिला, जब उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में कदम रखे। वहां उन्होंने कई फिल्मों में लीड रोल किए। जब भोजपुरी फिल्में दम तोड़ रही थीं, तब सुजीत कुमार ने 'दंगल' (1977) फिल्म की। यह फिल्म इतनी बड़ी ब्लॉकबस्टर हुई कि इसने भोजपुरी सिनेमा को दोबारा से जिंदा करने का काम किया।

    सुजीत कुमार ने भोजपुरी फिल्मों में लीड रोल में अपना दमखम दिखाते हुए सुपरस्टार की उपाधि हासिल की थी। उनकी सफल भोजपुरी मूवीज इस प्रकार थीं-

    • गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो- 1963
    • बेदेशिया- 1963
    • दंगल- 1977
    • भइया दूज- 1977
    • पान खाए सइंया हमार- 1984
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    ऐसी कई शानदार मूवीज के जरिए सुजीत को भोजपुरी सिनेमा में हिंदी मूवीज से ज्यादा शोहरत हासिल हुई है और वह इस फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार बने। यहां तक कि उन्हें यूपी-बिहार और भोजपुरी सिनेमा का 'अमिताभ बच्चन' तक कहा जाने लगा था।

    कभी विलेन बने तो कभी प्रोड्यूसर भी रहे

    हिंदी सिनेमा और भोजपुरी फिल्मों में काम करने के अलावा फिल्मों में सुजीत कुमार ने कई विलेन्स के किरदार भी निभाए। यहां तक कि कई फिल्मों में वो पुलिस ऑफिसर के रोल में भी दिखे। सबसे अधिक लोकप्रियता उनको इन्हीं फिल्मों से मिली। इत्तेफाक, अमीरी गरीबी, द बर्निंग ट्रेन, टक्कर, और बॉक्सर समेत कई ऐसी फिल्में थीं, जिनमें वो इंस्पेक्टर बने नजर आए।

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    इसके अलावा उन्होंने 'खेल' (1992) और 'दरार' (1996) जैसी फिल्में प्रोड्यूस कीं। बहुत कम लोग जानते हैं कि अरबाज खान को फिल्म 'दरार' में एक साइको विलेन के तौर पर लॉन्च करने का फैसला सुजीत कुमार का ही था।

    निजी जिंदगी में सुजीत कुमार ने किरण सिंह से शादी की और दोनो के दो बच्चे हुए। 1960 से लेकर 2001 तक अपने एक्टिंग करियर में उन्होंने करीब 150 से अधिक फिल्मों में काम किया था। आखिरकार 5 फरवरी 2010 को कैंसर के चलते उनका निधन हो गया।

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