76 साल पहले दहेज प्रथा पर बनी थी पहली फिल्म, बदनसीब बाप बने थे पृथ्वीराज कपूर, रामायण की 'मंथरा' थी क्रूर सास
साल 1950 में भारतीय सिनेमा की पहली फिल्मों में से एक ऐसी फिल्म बनी, जिसने दहेज प्रथा के अभिशाप को उजागर किया।

दहेज प्रथा पर बनी भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हमारे देश में दहेज प्रथा सदियों से समाज का हिस्सा है। यह समाज का एक ऐसा अभिशाप है जिसने ना जाने कितनी बेटियों के सपनों और जिंदगियों को तबाह किया है। भले ही आज एआई का युग है और 21वीं सदी में हम जी रहे हैं, लेकिन दहेज (Dowry System) की बेड़ियों से अबतक हम मुक्त नहीं हो पाए हैं। भारतीय सिनेमा ने समय-समय पर इस गंभीर मुद्दे को बड़े परदे पर उतारकर समाज को आईना दिखाया है। इसी का उदाहरण है वो फिल्म जो आज से करीब 76 साल पहले सिनेमा में आई थी।
जब सिनेमा ने दिखाई दहेज प्रथा की कहानी
दहेज उस लालच का नाम है जो एक हंसती-खेलती बेटी के बाबुल का घर भी उजाड़ देता है और विदा होकर गई ससुराल में उसका दम भी घोंट देता है। साल 1950 में दहेज प्रथा पर एक फिल्म आई और फिल्म का नाम था 'दहेज'। शायद ये हिंदी सिनेमा की वो पहली फिल्म थी, जिसने समाज की उस कुरीति को उस दौर में उजागर किया था।
लखनऊ की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को महान फिल्ममेकर वी.शांताराम (V Shantaram) ने बनाया था। वी.शांताराम हमेशा से ही अलग तरह के सिनेमा के लिए जाने गए, लेकिन उन्होंने जब दहेज फिल्म बनाई तो इसकी भी खूब चर्चा हुई।
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पृथ्वीराज कपूर समेत कई सितारे आए फिल्म में नजर
इस फिल्म (Dahej) में पृथ्वीराज कपूर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में उन्होंने ठाकुर साहब का किरदार निभाया था। इसके अलावा फिल्म में उनकी बेटी के किरदार में दिखीं अभिनेत्री जयश्री (Jaishree)।
करण दीवान फिल्म में जयश्री के पति की भूमिका में दिखे। फिल्म में ललिता पवार भी नजर आईं, जिन्होंने एक बेहद ही क्रूर सास का किरदार निभाया था। वहीं फिल्म में अभिनेता उल्हास ललिता पवार के पति की भूमिका में नजर आए थे। फिल्म की कहानी दिल को छू लेने वाली थी।
क्या थी फिल्म की कहानी?
इस फिल्म की कहानी एक बूढ़े बाप (Prithviraj Kapoor) की होती है, जो अपनी बेटी चंदा (जयश्री) की शादी एक वकील के बेटे के साथ कर दी जाती है। ससुराल पहुंचने पर, दहेज न लाने के कारण चंदा की सास (ललिता पवार) और परिवार के अन्य सदस्य उसे ताने मारते हैं और प्रताड़ित करने लगते हैं।
(इमेज- अल्ट्रा)
इसके बाद उनकी बेटी की जिंदगी में कई मुश्किलें आती हैं। सास के अत्याचार से बेटी खूब परेशान रहती है। यहां तक कि परिवार वाले खुलकर मांगते हैं और उसे ज्यादा तंग करते हैं। हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि अंत में वकील की मौत हो जाती है और चंदा को उसकी मौत के लिए दोषी ठहराया जाता है।
इस फिल्म में ललिता पवार (Lalita Pawar) ऐसी क्रूर सास बनीं, कि इस फिल्म के बाद उन्हें टाइपकास्ट कर दिया गया। उन्हें सिनेमा में फिर ऐसे ही निगेटिव रोल्स ज्यादा ऑफर किए गए। दहेज प्रथा पर इसके अलावा कई और फिल्में भी बनीं, जो आज भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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