100 करोड़ लागत... 730 दिनों की मेहनत; 66 साल पहले आया वो 'कालजयी गीत', जिसने रच डाला था इतिहास!
हिंदी सिनेमा में कई गाने ऐसे बने, जिन्होंने इतिहास रचा है। आज हम आपको एक ऐसे ही गाने के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें हीरोइन की खूबसूरती तो दिखी ह ...और पढ़ें

वो गाना जिसे बनाने में खर्च हुए 100 करोड़?

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई गाने ऐसे बने हैं, जिन्हें दर्शकों ने भर-भरकर प्यार दिया है। आज फिल्मों में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है। एक-एक सीन के लिए मेकर्स करोड़ों रुपए बर्बाद कर देते हैं तो वहीं एक फिल्म को बनाने में मेकर्स आज करोड़ों का पैसा पानी की तरह बहाते हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा था जब महज कुछ लाख रुपए में फिल्म बन जाती है पर उस दौर में एक ऐसी फिल्म बनाई गई, जिसने सनसनी मचा दी थी और उस फिल्म के एक गाने को बनाने में करीब 100 करोड़ खर्च हो गए थे।
एक गाने को बनाने में लगे करोड़ों रुपए
आज जिस गाने की हम बात कर रहे हैं वो गाना कोई और नहीं बल्कि आईकोनिक फिल्म मुगल-ए-आजम (Mughal-E-Azam Movie Songs) का है। ये वही फिल्म ने जिसने हिंदी सिनेमा में तो इतिहास रचा ही था, साथ ही इस फिल्म के जरिए मधुबाला दुनियाभर में मशहूर हुईं थीं। इस फिल्म के वैसे तो सभी गाने हिट रहे, लेकिन एक गाना हम सभी की जुबान पर है और उस गाने का नाम है जब प्यार किया तो डरना क्या।

इस गाने में मधुबाला का अंदाज़ देखते ही बना था। कहा जाता है कि इस गाने को बनाने में उस दौरान 1 करोड़ रुपए लगे थे। फिल्ममेकर के.आसिफ ने गाने को बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी और यही वजह है कि फिल्म का गाना हिट रहा, साथ ही इस गाने को बनाने में के.आसिफ ने पैसा पानी की तरह बहाया था।
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1 करोड़ में बना था गाना
प्यार किया तो डरना क्या (Jab Pyar Kiya To Darna Kya)... इस गाने में मधुबाला (Madhubala) जब अपनी अदाओं से महफिल लूटती हैं तो मानों लोगों के दिलों पर छुरियां चल जाती है। वो सादगी और ऊपर से मधुबाला की वो खूबसूरती... जिसने मानो पर्दे पर जादू बिखेर दिया। इस गाने को बनाने के लिए के आसिफ ने 1 करोड़ रुपए लगाए थे। उस दौर में जहां इतने बजट में फिल्में बन जाती थीं, तब सिर्फ एक गाने पर के आसिफ ने इतना पैसा खर्च कर दिया था।
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कहा जाता है कि, इस गाने को मोहन स्टूडियोज में फिल्माया गया था, जहां का सेट लाहौर के शीश महल जैसा बनाया गया था। बड़े राजदरबार जैसे सेट को बनाने के लिए अच्छी रकम इसमें लगा गई। कहा जाता है कि, सेट को बनाने में लगे सेट पर लगे कांच को खास तौर पर बेल्जियम से मंगवाया गया था।
ये सेट 150 फीट लंबा, 80 फीट चौड़ा और 35 फीट ऊंचा था। वहीं इस सेट को बनाने में लगभग 2 साल लगे थे और इस सेट को बनाने की लागत 1 करोड़ रुपये की आई थी। मतलब अगर आज ये गाना बनता तो इसकी कीमत करीब 100 करोड़ होती।
विदेशी कैमरों से हुई शूटिंग
कहा जाता है कि इस गाने में इस्तेमाल की गई चीजों के लिए उन्होंने विदेशी कैमरे तक मंगा डाले थे। दरअसल के आसिफ (K Asif) की तुलना उस वक्त डेविड लीन से होने लगी थी, जो हॉलीवुड के सबसे शानदार फिल्ममेकर्स की लिस्ट में शामिल थे। डेविड लीन ने 'लॉरेंस ऑफ अरबिया' के लिए मीलों तक फैले रेगिस्तान को अपना कैनवस बनाया। वो असली लोकेशंस और हज़ारों ऊंटों, घोड़ों के इस्तेमाल के लिए मशहूर थे।
डेविड लीन की तरह ही के आसिफ ने भी मुगल ए आजम को बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, यहां तक कि फिल्म के गाने के लिए उन्हें जिस शीशे की जरूरत थी वो बहुत महंगा था और उस शीशे में कैमरे का रिफ्लेक्शन आ रहा था। के आसिफ जिद पर अड़ गए कि उन्हें वही शीशे वाला शॉट चाहिए। काफी जद्दोजहद हुई, लेकिन फिर भी उन्हें परफेक्शन नहीं मिल पा रहा था।
हॉलीवुड में जिस टेक्नीक का इस्तेमाल होता था, उसे भी अपनाया गया। आखिरकार के आसिफ ने एक पतली वैक्स की लेयर का इस्तेमाल किया। ताकि फ्रेम में कैमरा ना दिखे और इस तरह से उन्होंने इस शॉट को भी पूरा किया, जो गाने में अच्छे से दिखता है।
के. आसिफ ने मुगल-ए-आजम (Mughal E Azam) जैसा एक ऐसा मास्टरपीस बनाया, जिसे पूरी दुनिया ने याद किया। इस फिल्म और गाने के चलते ही मधुबाला को कई बड़ी फिल्मों के हॉलीवुड से ऑफर्स आए थे। उस दौर में इस फिल्म ने 11 करोड़ कमाए थे, जो आज के हिसाब से करीब 3500 से 4000 करोड़ के बीच होते हैं। फिल्म में मधुबाला, दिलीप कुमार और पृथ्वीराज कपूर नजर आए थे।