यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 17, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जब 'बेताब' के सेट पर धर्मेंद्र संग उनकी पत्नी प्रकाश कौर पहुंची थीं बेटे सनी देओल से मिलने, जानें पूरा किस्सा
बेताब से धर्मेंद्र अपने बेटे सनी को फिल्मों में लांच करना चाह रहे थे। जब मैं राज कपूर साहब को बॉबी फिल्म के दौरान असिस्ट किया करता था तब उन्होंने मुझ ...और पढ़ें

प्रियंका सिंह, मुंबई। फिल्म 'लव स्टोरी' के बाद निर्देशक राहुल रवैल एक और लव स्टोरी फिल्म लेकर आए 'बेताब'। धर्मेंद्र के कहने पर उन्होंने इस फिल्म का निर्देशन किया था। 'बेताब' से सनी देओल और अमृता सिंह ने डेब्यू किया था। राहुल रवैल साझा कर रहे हैं फिल्म से जुड़ी दिलचस्प यादें...
फिल्म 'बेताब' से धर्मेंद्र जी अपने बेटे सनी को फिल्मों में लांच करना चाह रहे थे। उन्होंने जब मुझसे पूछा कि कैसे सनी को लांच करना चाहिए तो मुझे राज कपूर साहब की बात याद आई। जब मैं राज कपूर साहब को 'बॉबी' फिल्म के दौरान असिस्ट किया करता था, तब उन्होंने मुझे एक बात बताई थी कि नए कलाकारों को लांच करने के लिए रोमांटिक फिल्में सबसे अच्छा जॉनर होता है। मैं यह 'लव स्टोरी' फिल्म में अनुभव कर चुका था। धर्मेंद्र जी ने मुझसे पूछा कि मेरे बेटे के लिए फिल्म बनाओगे। मेरे लिए इससे बड़ी कोई और बात हो नहीं सकती थी। हमें फिल्म के लिए नई लड़की की तलाश थी। निर्माता-निर्देशक रमेश बहल मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे। उन्हें एक फिल्ममेकर के बेटे ने दिल्ली में रुखसाना सुल्ताना की बेटी अमृता से मिलवाया था। उनके जिक्र के बाद मैंने अमृता को वहां से ढूंढ़ा। मैंने कोई स्क्रीन टेस्ट नहीं किया था। आप जब किसी से मिलकर बातचीत करते हैं तो अंदाजा हो जाता है कि किरदार के लिए वह सही है या नहीं।
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उन दिनों ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग कश्मीर में ही होती थी। मैंने 'लव स्टोरी' की भी काफी शूटिंग वहां की थी। 'बेताब' लव स्टोरी थी। इसलिए पहाड़, नदियों वाला एक माहौल भी चाहिए था। आज जिस जगह को बेताब वैली के नाम से जाना जाता है, उसका नाम इस फिल्म के शीर्षक की वजह से ही पड़ा है। पहलगाम की तरफ से जो रास्ता चंदनवाड़ी की तरफ जाता है, वहां पर जो पहाड़ चढ़ते हैं, उससे बिल्कुल नीचे की तरफ यह जगह थी। ऊपर से नीचे देखने पर वह जगह बहुत खूबसूरत लगती थी, लेकिन वहां पर उतरकर पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं
था। वहां से एक नदी गुजरती है, जिस पर एक छोटा सा लकड़ी का ब्रिज था। उस ब्रिज के दूसरी पार हमने 'लव स्टोरी' फिल्म की शूटिंग की थी। इसलिए वह जगह मुझे याद थी। उस ब्रिज से हम बेताब वैली तक जंगलों से चलते हुए पहुंचे थे। जब वहां पहुंचे तो लगा कि यह तो स्वर्ग है।
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दूसरी चुनौती उस जगह पर थी, सेट लगाने की। वहां पर हमने सनी के किरदार का लकडिय़ों का घर बनाया था। कच्चा रास्ता था। वहां पर गाड़ी से पहुंचना जोखिम का काम था, क्योंकि गाड़ी फिसलने लग जाती थी। हमने सोचा कि लकडिय़ों के ब्रिज को हम सपोर्ट देकर इतना मजबूत तो बना देंगे कि उससे गाडिय़ां गुजारी जा सकेें, लेकिन सामान से भरा ट्रक कैसे पहुंचेगा? यह चुनौती थी। पहलगाम में हमें एक कॉन्ट्रैक्टर मिल गया था। उन्होंने कहा था कि मैं सेट लगा दूंगा। पहाड़ी से नीचे तक जाने के लिए उसने एक पगडंडी बना दी थी, ताकि वर्कर्स नीचे पहुंच सकें। सेट के सारे लोग और सनी गाड़ी से ऊपर जाते थे, फिर पगडंडी से होते हुए नीचे आते थे।
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दिक्कतें तब आईं, जब हमें सेट का दूसरा सामान जैसे लाइटें वगैरह पहुंचाना था, जो सिर्फ ट्रक में ही जा सकता था। फिर हमने उस लकड़ी के ब्रिज को और मजबूत करवाया। दो दिनों में ट्रक को लोकेशन तक पहुंचाया जा सका था। सनी ने फिल्म में जो गाड़ी चलाई है, वह हमने एक गाड़ी की फोटो देखकर बनवाई थी। हमने उसमें कुछ लोहे के रॉड्स लगवा दिए थे, जिसकी वजह से वह अनोखी लग रही थी। कश्मीर का शेड्यूल बहुत लंबा था। 55 दिन फिल्म की शूटिंग चली थी। यह धर्मेंद्र जी का बड़प्पन था कि वह शूटिंग पर आते नहीं थे। जिम्मेदारी उन्होंने मुझे दे रखी थी। हालांकि सिर्फ एक दिन के लिए धर्मेंद्र जी अपनी पत्नी प्रकाश जी के साथ सेट पर आए थे। प्रकाश जी को लग रहा था कि कई दिनों से उनका बेटा उनसे दूर है। सुबह से शाम तक धर्मेंद्र जी सेट पर बैठे थे। अगले दिन जब मैंने पूछा कि चलिए सेट पर वह बोले मैं शूटिंग देखकर बोर हो गया हूं, वहां पूरे दिन क्या करूंगा। 'बेताब' के गानों पर भी मेरा बहुत ध्यान था। पंचम दा (राहुल देव बर्मन) और आनंद बख्शी साहब की वजह से इस फिल्म के गाने सदाबहार बन गए। इस फिल्म के गाने बादल यूं गरजता है... की शूटिंग हमने बॉम्बे में आकर एक स्टूडियो में की थी।