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    अमिताभ को बनाया सुपरस्टार, बेटे ने कराई प्रेमिका से मुलाकात, रहस्यमयी थी मौत; दर्दनाक है डायरेक्टर की कहानी

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 07:44 PM (IST)

    हिंदी सिनेमा में कई डायरेक्टर्स रहे हैं, जिन्होंने पर्दे पर कमाल की फिल्में बनाईं। एक डायरेक्टर ऐसे ही रहे, जिन्होंने अमिताभ बच्चन का करियर संवारा। हा ...और पढ़ें

    अमिताभ के साथ 7 ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाल डायरेक्टर

    अमिताभ के साथ 7 ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाल डायरेक्टर

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    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। एक अभिनेता के करियर में फिल्ममेकर का बहुत बड़ा होता है। अगर फिल्ममेकर अच्छा है तो हीरो की किस्मत चमक ही जाती है। एक डायरेक्टर जब फिल्म को अच्छा बनाकर पर्दे पर पेश करता है तो तारीफ हीरो के साथ बाकी सभी की होती है।

    हिंदी सिनेमा में एक डायरेक्टर ऐसा भी रहा, जिसने महज 23 फिल्में बनाईं, और उसमें से 15 फिल्में हिट रहीं। ये वही डायरेक्टर है जिसने अमिताभ बच्चन के करियर को संवारा और 7 ब्लॉरबस्टर फिल्में दीं। आइए जानते हैं उसी फिल्ममेकर की कहानी...

    फिल्मों के किंग बन गए थे मनमोहन देसाई

    यह फिल्ममेकर कोई और नहीं बल्कि मनमोहन देसाई थे। मनमोहन देसाई का जन्म 26 फरवरी 1937 को मुंबई में हुआ था। गुजराती परिवार में जन्में मनमोहन के पिता कीकूभाई भी एक फिल्म निर्माता थे। साल 1931 में पैरामाउंट फिल्म स्टूडियो की स्थापना की थी, जिसमें कई फिल्में बनी थीं।

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    हालांकि मनमोहन जब सिर्फ 4 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। उनके ऊपर कर्ज भी था, जैसे तैसे करके चीजें ठीक हुईं और फिर बड़े भाई की मदद से मनमोहन देसाई फिल्मों में आ गए। कई सालों तक उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया और फिर आखिरकार उन्होंने 20 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म बनाई।

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    पहली फिल्म में राज कपूर-नूतन संग किया काम

    मनमोहन देसाई को पता था कि उन्हें अपने जीवन में क्या करना है। पिता का कर्ज चुकने के बाद और जिम्मेदारियां संभलाने के बाद वो फिल्मों में आ गए और कम उम्र में ही डायरेक्टर भी बन गए। आखिरकार 1960 में आई फिल्म छलिया ने उन्हें बड़ा ब्रेक दिया। फिल्म में राज कपूर और नूतन मुख्य भूमिका में थे।

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    महज 20-22 साल के मनमोहन देसाई ने जब फिल्म का पहला गाना शूट किया तो उनका काम देखकर राज कपूर भी दंग रह गए और आखिरकार पूरी फिल्म शूट हुई और फिल्म के गाने काफी पसंद किए गए। इसके बाद उन्होंने शम्मी कपूर के साथ 'ब्लफमास्टर', राजेश खन्ना के साथ 'सच्चा झूठा' और 'रोटी', रणधीर कपूर के साथ 'रामपुर का लक्ष्मण' और जीतेंद्र के साथ 'भाई हो तो ऐसा' जैसी सुपरहिट फिल्में बनाईं।

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    एक साल में दीं 4 हिट फिल्में

    मनमोहन देसाई के जीवन में अभी ब्लॉकबस्टर फिल्मों का मेला लगना बाकी था और आखिरकार उनके करियर की हिट फिल्मों की घंटी बजी फिल्म 'अमर, अकबर, एंथनी' से। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर और विनोद खन्ना नजर आए और फिल्म सुपरहिट रही। 1977 में मनमोहन देसाई की एक के बाद एक चार फिल्में रिलीज हुईं और ये सभी ब्लॉकबस्टर थीं। ये चार फिल्में थीं, परवरिश, धरम वीर, चाचा भतीजा और अमर अकबर एंथनी थीं। अमिताभ के साथ उनकी पहली फिल्म यही थी जो कि चल पड़ी।

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    अमिताभ के साथ खूब हिट रही जोड़ी

    अमिताभ बच्चन के साथ देसाई की जोड़ी खूब हिट रही। दोनों पहले ही एक फिल्म में काम कर चुके थे। इसके बाद अमिताभ के साथ उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। ये फिल्म हिट नहीं ब्लॉकबस्टर रहीं। बड़ी बात ये थी कि उस दौर में अमिताभ के करियर को भी ऐसी फिल्मों की दरकार थी और आखिरकार उनकी वो ख्वाहिश भी पूरी हो गई।

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    अमर अकबर एंथनी के बाद उन्होंने सुहाग, नसीब, देशप्रेमी, कुली, मर्द, तूफान और गंगा जमना सरस्वती जैसी फिल्में बनाईं और इन सबके हीरो अमिताभ बच्चन ही रहे। इन फिल्मों से मनमोहन देसाई ही नहीं बल्कि अमिताभ बच्चन का करियर भी चमक गया।

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    उन्होंने एक बार अमिताभ से कहा था कि, 'देखो अमित तुम मुझे छोड़कर चले जाओ, इसका मुझे नहीं पता है। लेकिन मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जाने वाला हूं।' नतीजा यह रहा कि अमिताभ के साथ देसाई ने 7 ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं।

    दिलचस्प रही देसाई की प्रेमकहानी

    मनमोहन देसाई की प्रेमकहानी भी बड़ी दिलचस्प रही। दरअसल उन्हें अपने पड़ोस में रहने वाली प्रभा नाम की एक लड़की से मोहब्बत थी। प्रभा को देसाई बहुत पसंद करते थे। प्रभा जहां जाती थीं, तो देसाई भी उनके पीछे जाते थे। ये मोहब्बत आगे बढ़ती गई। देसाई प्रभा से शादी करना चाहते थे, लेकिन शादी को लेकर बात बन नहीं पा रही थी, क्योंकि प्रभा के घरवाले इस शादी के खिलाफ थे।

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    आखिरकार बहुत मानने और मनाने के बाद प्रभा के घरवाले इस शादी के लिए राजी हो गए और मनमोहन देसाई की शादी प्रभा के साथ शादी हो गई। शादी के बाद प्रभा और देसाई का एक बेटा हुआ, दोनों ने बेटे का नाम केतन रखा। केतन भी पिता की तरह ही फिल्ममेकर बने। हालांकि साल 1979 में केतन को एक बड़ा झटका लगा। ये झटका था उनकी प्रभा के निधन का।

    नंदा के करीब आए मनमोहन देसाई

    पत्नी के जाने के बाद मनमोहन देसाई बिल्कुल टूट गए थे। इस मुश्किल वक्त में मनमोहन देसाई के साथ उनके बेटे केतन रहे। केतन ने अपने पिता को इस गम से उबारने की ठानी। केतन के कहने के बाद मनमोहन देसई ने दोबारा से फिल्में बनाना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने कुली और देशप्रेमी जैसी फिल्में बनाईं।

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    उधर उनके बेटे को जैसे ही पता चला कि उनके पिता एक्ट्रेस नंदा को काफी पसंद करते हैं, तो उन्होंने इसके चलते नंदा की करीबी सहेली वहीदा रहमान की मदद मांगी और कहा कि, वो दोनों की बातचीत करा दें। आखिरकार वहीदा रहमान ने नंदा और मनमोहन देसाई को डिनर पर बुलाया, यहां मनमोहन देसाई ने नंदा से दिल की बात कही। नंदा ने भी उनका प्रपोजल एक्सेप्ट कर लिया और दोनों की सगाई हो गई।

    बालकनी से गिरने के बाद हुई मौत

    नंदा के साथ जब मनमोहन देसाई की सगाई हुई, तब वो 52 साल के थे। इसके बाद दोनों के परिवार शादी की तैयारियों में बिजी रहने लगे। हालांकि वक्त को तो कुछ और ही मंजूर था। साल 1994 में 1 मार्च को मनमोहन देसाई बालकनी से गिर गए और उनकी मौत हो गई।

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    इस रहस्यमयी मौत ने हर किसी का दिल तोड़ दिया। नंदा जो देसाई से शादी करने जा रही थीं, उनके दिल पर तो मानो वक्त ने दर्द की बिजली गिरा दी। इसके बाद वो हमेशा अकेली रहीं और कभी किसी से शादी नहीं की।

    मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) हिंदी सिनेमा के उन डायरेक्टर्स में शुमार रहे, जिन्होंने खूब कामयाबी हासिल की। लगातार 7 सिल्वर जुबली और 4 गोल्डन जुबली फिल्में देकर उन्होंने एक अलग ही रिकॉर्ड बनाया, तो वहीं उनकी फिल्मों को दर्शकों ने भी खूब पसंद किया। यही वजह है कि आज भी उनके चाहने वाले उनकी फिल्मों को और उन्हें याद करते हैं।