Welcome To The Jungle बदल देगी अक्षय-सुनील की किस्मत? खिलाड़ी कुमार बोले- '90 प्रतिशत से ज्यादा फिल्में...'
अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी ने 'वेलकम टू द जंगल' में कई सालों बाद साथ काम किया। हाल ही में इन दोनों सुपरस्टार्स ने मल्टीस्टारर फिल्म से लेकर जोड़ी के स ...और पढ़ें

वेलकम टू द जंगल को लेकर सुनील-अक्षय से बातचीत/ फोटो- Youtube

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दीपेश पांडेय, मुंबई। करीब 15 फिल्मों में एक साथ काम करने के बाद अभिनेता अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की जोड़ी एक बार फिर फिल्म वेलकम टू द जंगल में साथ नजर आएगी। दोनों का मानना है कि उनकी जोड़ी वाली 90 प्रतिशत से ज्यादा फिल्में सफल रही हैं। इस फिल्म में भी दोनों को ऐसी उम्मीद है। सुनील और अक्षय से उनकी फिल्म और वर्तमान में फिल्म इंडस्ट्री की जुड़ी समसामयिक विषयों पर बातचीत।
अक्षय इस फिल्म में भोजपुरी अभिनेता की भूमिका निभाने का क्या अनुभव रहा?
फिल्म में सबसे बड़ी लाइन बोली गई है कि भोजपुरी इस बेटर दैन हालीवुड (भोजपुरी हालीवुड से भी बेहतर है), इससे बढ़िया मेरे लिए और क्या हो सकता है। फिल्म के बारे में मैं ज्यादा नहीं बता सकता हूं, लेकिन इसमें मैं भोजपुरी अभिनेता की भूमिका निभा रहा हूं। जिसको बाद में एक हिंदी फिल्म मिलती है। मुझे भोजपुरी बोलने में कोई ज्यादा मुश्किल नहीं हुई। यह भाषा लगभग हिंदी जैसी ही है।

यह भी पढ़ें- Welcome To The Jungle X Review: 36 सितारों ने मिलकर किया भेजाफ्राई या कॉमेडी का लेवल हाई? फिल्म देखने की ये है शर्त
सलमान ने कहा था कि नई पीढ़ी के कलाकार मल्टीस्टारर फिल्में करने को लेकर ज्यादा असुरक्षित महसूस करते हैं, आपका क्या सोचना है?
अक्षय : हर किसी की अपनी सोच होती है। उनको लगता है कि वो (सोलो फिल्में) करना चाहिए, हमको लगता है कि ये (मल्टीस्टारर) करनी चाहिए। ऐसा कोई फॉर्मूला तो है नहीं कि अगर सोलो करेंगे तभी चलेगा, मल्टीस्टारर नहीं चलेगा।
सुनील : मुझे तो मल्टीस्टारर फिल्मों में तो सुरक्षित महसूस होता है, अब तो असुरक्षा वाली हालत सोलो फिल्मों की हो गई है। यही सब करते हुए आज हमारी इंडस्ट्री की हालत इस तरह हो गई है। आजकल शॉपिंग में भी हम बहुत सारे विकल्प ढूंढते हैं। मुझे तो लगता है कि मल्टीस्टारर फिल्में ही हमारी इंडस्ट्री को बचाने का एकमात्र विकल्प हैं।
खबरें और भी
आप दोनों ने एक साथ कई फिल्में की हैं, एक बार फिर साथ आना कैसा अनुभव रहा?
सुनील : हम जानते हैं कि अक्षय के नाम पर फिल्में बिकती हैं। फिर जब फिल्म के साथ इतने सारे कलाकार जुड़ते हैं, तो फिल्म की पहुंच बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। अगर मैं इस फिल्म में केंद्रीय भूमिका में होता तो यह फिल्म सिर्फ जंगल होती। वेलकम उसमें फिट नहीं होता। नए बच्चों को यह समझने की आवश्यकता है कि फिल्म ही सही तरीके से लोगों के बीच पहुंचाने के लिए सही पार्टरनशिप जरूरी है।

अक्षय : हमने तो बहुत सारी फिल्में साथ में की हैं। हमारी जोड़ी की 98-99 प्रतिशत फिल्में हिट रही है। हमारी कोशिश यही है कि हमारी यह फिल्म भी उनमें से एक हो। जहां तक इंडस्ट्री का सवाल है कि मुझे लगता है कि लोग कभी-कभी फिल्म को बजट के बाहर ले जाते हैं। यश चोपड़ा साहब के प्रोडक्शन में मैंने कई फिल्में की हैं। वह मुझसे पंजाबी में कहते थे कि पुत्तर बजट हिट तो फिल्म हिट। कभी-कभी लेखक या निर्देशक गलतियां कर सकते हैं, लेकिन वह फिल्म भी सही बजट के साथ सफल बनाई जा सकती है। मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि मेरे प्रोड्यूसर को नुकसान न हो।
वर्तमान परिस्थितियों में कलाकार और निर्माताओं का इस तरह एक दूसरे का साथ देना कितना महत्वपूर्ण है?
अक्षय: निर्माता और कलाकार रिश्ता मियां-बीवी जैसा होता है। इनके साथ ही निर्देशक का भी साथ में होना बहुत आवश्यक है। इस फिल्म पर लोड न आए, इसलिए मैंने इसके लिए एक भी पैसे नहीं लिया, मैं भी बतौर निर्माता इससे जुड़ गया। हमारी फिल्म में 32 कलाकार हैं, और सबकी फीस समेत निर्देशक अहमद खान ने इसे सिर्फ 115 करोड़ रुपये में बनाई है। इसीलिए मैं कहता हूं कि फिल्म निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण बजट है। इस फिल्म के सेट पर हर दिन कम से कम 24 कलाकार रहते थे और हमने इसे सिर्फ 75 दिनों में शूट किया है।
सुनील: हमारे लिए यह फिल्म एक उदाहरण है कि बिना निर्देशक और निर्माता फिल्म बन ही नहीं सकती है। हम तो सेट पर आकर चले जाते थे। वो इतने सारे कलाकार, इतने सारे संयोजन संभालते थे। हर फिल्म में एक एंकर होता है, जैसे इस फिल्म में अक्षय हैं, बाकी उनके इर्द-गिर्द चीजें चलती हैं। इसीलिए कलाकारों और निर्माताओं एक दूसरे का साथ देना आवश्यक है, फिल्में इसी कारण से बन पाती हैं।

अक्षय, आपको खिलाड़ी कुमार के नाम से भी जाना जाता है, क्या आपको लगता है कि खिलाड़ी फ्रेंचाइजी की एक और फिल्म बननी चाहिए?
मैं खिलाड़ी फ्रेंचाइजी की एक आखिरी फिल्म करना चाहूंगा, जिसका शीर्षक ही होगा आखिरी खिलाड़ी। अच्छी स्क्रिप्ट का इंतजार है।
सुनील, क्या फिर पहले की तरह कुछ एक्शन फिल्में करना चाहेंगे?
मैं तो करना चाहता हूं, लेकिन कोई पैसे डालकर फिल्म भी बनाने के लिए तैयार भी होना चाहिए। बतौर कलाकार आपके लिए यह समझना बहुत आवश्यक है कि आज आप कहां हैं? आपकी मार्केट वैल्यू क्या है? जब सभी कलाकारों को ये चीजें और प्रोड्यूसर्स को संभालना समझ में आ जाएगा तो हर तरह की फिल्में बनेंगी। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि वेलकम टू द जंगल नहीं बनती, अगर अक्की (अक्षय) नहीं होते। अक्षय, शाह रुख खान, सलमान खान, सनी देओल जैसे कलाकार स्वयं फिल्मों में शामिल हो जाते हैं तो अपने पैसे अंत में लेते हैं। उनकी फीस का भार अगर शुरू में ही किसी निर्माता पर आ जाए तो वो फिल्में बन ही नहीं सकती हैं।