Lata Mangeshkar को दी कड़ी टक्कर, दीदी-आशा संग हिट रही जुगलबंदी; कहां गुमनाम हुईं कल्ट गाने वाली ये आवाज?
लता मंगेशकर को 60 के दौर में अपनी मधुर आवाज से टक्कर देने वालीं और आशा भोसले संग हिट गीत देने वालीं ये मशहूर सिंगर कहां गुमनाम हुईं, पढ़ें स्टोरी: ...और पढ़ें

लता मंगेशकर को सुरीली आवाज से देती थीं टक्कर / फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने सात दशक से अधिक समय तक म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज किया है। उन्होंने अपने करियर में हिंदी फिल्मों के लिए रोमांटिक, देशभक्ति सहित हर शैली के गीत गाए। जिस तरह से उनकी बॉलीवुड पर एक अरसे तक पकड़ बनी रही, उसे देखकर लगता था कि सिंगर से टक्कर लेने वाला कोई भी नहीं होगा।
हालांकि, वह दौर भी आया, जब एक ऐसी सिंगर ने इंडस्ट्री में एंट्री की, जिसने अपनी आवाज से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दोनों दिग्गज सिंगर्स के साथ डुएट गीत गाए और उनके सुर व ताल से मैच करते हुए उन्हें कड़ी टक्कर दी। हालांकि, कुछ गीत गाने के बाद अचानक ही वह इंडस्ट्री से गायब हो गईं। कौन थीं कल्ट गाने देने वाली वह आवाज? विस्तार से पढ़ें उनकी कहानी:
राज कपूर की फिल्म से मिला था पहला मौका
हिंदी सिनेमा में 60 के दशक में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली वह इंडियन प्लेबैक सिंगर कोई और नहीं, बल्कि कमल बारोट हैं। 1938 में तंजानिया में जन्मीं कमल बारोट ने 1957 में फिल्म 'शारदा' से बॉलीवुड में बतौर सिंगर कदम रखा था, जिसमें राज कपूर और मीना कुमारी मुख्य भूमिका में थीं। इस फिल्म में उन्होंने 'ज़रा धीरे बोल' गीत गाया था। इसके बाद उन्होंने 117 फिल्मों में 140 गाने गाए। उनके सबसे पॉपुलर सोलो गानों में से एक 'सुना है जबसे मौसम है प्यार के काबिल' है।
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लता मंगेशकर को इस कल्ट गाने में दी थी टक्कर
कमल बारोट ने अपने करियर में सोलो से ज्यादा डुएट गीत गाए हैं। 60 का दशक उनके करियर का सबसे सफल समय कहा जाता है, क्योंकि यह वही दौर था, जब उन्होंने लता मंगेशकर से लेकर आशा भोसले और सुमन कल्याणपुर जैसी दिग्गज गायिकाओं के साथ कई ब्लॉकबस्टर गीत गाए। 1963 में रिलीज हुई फिल्म 'पारसमणि' में कमल बारोट ने लता मंगेशकर के साथ मिलकर 'हंसता हुआ नूरानी चेहरा' गाया था। यह गाना 63 साल पहले चार्टबस्टर साबित हुआ था। इस गाने में कमल बारोट ने अपनी सुरीली आवाज से लता मंगेशकर को कड़ी टक्कर दी थी, जहां उनकी आवाज की खूब तारीफ की गई।
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आशा भोसले के साथ उन्होंने 'C.I.D. 909' का 'धड़का तो होगा दिल जरूर', और फिल्म 'घराना' का 'दादी अम्मा दादी अम्मा मान जाओ', जैसे कई हिट गाने दिए। हिंदी सिनेमा में म्यूजिक के उस दौर में कमल बारोट ने अगर किसी मेल सिंगर के साथ मिलकर सबसे ज्यादा हिट गाने दिए, तो वे सिंगर मुकेश थे। उनके साथ दिग्गज सिंगर ने 'ना जाने चांद कैसा होगा', 'जब से हम तुम बहारों में', और 'हम भी खो गए', जैसे कई यादगार गाने दिए थे।

कुछ सालों बाद ही बॉलीवुड को कह दिया अलविदा
जिस दौर में कमल बारोट ने बॉलीवुड में कदम रखा था, उस वक्त पहले से ही आशा भोसले और लता मंगेशकर जैसी सिंगर्स का दबदबा था। कमल बारोट ने अच्छे गाने तो गाए, लेकिन ज्यादातर युगल गीत ही गाए। उन्हें मेन लीड एक्ट्रेसेस के लिए प्लेबैक सिंगिंग करने का मौका कम ही मिला। धीरे-धीरे जब डुएट सिंगिंग का दौर कम हुआ, तो कमल बारोट ने बी और सी ग्रेड फिल्मों में भी गाने गाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उन्होंने गीत गाने कम कर दिए।
हालांकि, 60 के दशक का अंत होते-होते वह समय भी आया, जब उन्होंने शादी कर ली और फिल्मों से दूर होकर खुद पर और अपने परिवार पर ज्यादा फोकस किया। धीरे-धीरे सिंगर ने खुद को इंडस्ट्री की चमक-धमक से दूर कर लिया और गुमनामी में चली गईं। 87 साल की हो चुकीं कमल बारोट को आखिरी बार साल 2018 में नीना कुलकर्णी के फंक्शन में देखा गया था। उन्हें देखकर उनके चाहने वालों के चेहरों पर खुशी आ गई थी।