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    Dhurandhar 2 की बॉक्स ऑफिस पर धुआंधार कमाई, क्यों फिल्म देखने सिनेमाघरों में खिंचे आ रहे लोग?

    By Smita SrivastavaEdited By: Rinki Tiwari
    Updated: Sun, 29 Mar 2026 09:17 AM (IST)

    Dhurandhar 2 ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर दुनियाभर में धमाल मचा दिया। यह फिल्म उन चुनिंदा मूवीज में से एक है जिसने दर्शकों को सिनेमाघरों में ...और पढ़ें

    धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर किया जादू। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

    धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर किया जादू। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

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    स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। OTT के दौर में खाली पड़े सिनेमाघरों को ‘धुरंधर’ ने फिर से जीवंत कर दिया। 1300 करोड़ रुपये के वैश्विक कलेक्शन के साथ आदित्य धर (Aditya Dhar) निर्देशित इस फिल्म ने साबित किया कि बड़े कैनवस और भावनात्मक गहराई वाली कहानियों का जादू बरकरार है।

    ओटीटी के सुनहरे विस्तार ने जब दर्शकों को घरों की स्क्रीन तक सीमित कर दिया था, तब यह आशंका गहराने लगी थी कि क्या बड़े पर्दे का जादू अब फीका पड़ रहा है? मल्टीप्लेक्स की कुर्सियां खाली थीं और बड़े सितारों वाली फिल्में भी दर्शकों में वह उन्माद पैदा नहीं कर पा रही थीं, जिसकी हिंदी सिनेमा पहचान रहा है।

    सिनेमाघर तक दर्शकों को खींचकर लाई धुरंधर

    ऐसे ठहरे हुए समय में बीते दिसंबर में आई रणवीर सिंह अभिनीत ‘धुरंधर’ ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस, बल्कि दर्शकों के मनोविज्ञान को भी झकझोर दिया। धुरंधर की सफलता को समझना केवल उसके 1300 करोड़ रुपये के वैश्विक कलेक्शन तक सीमित करना एक बड़ी भूल होगी।

    आदित्य धर ने फिल्म को बना दिया सेलिब्रेशन

    फिल्म ने यह साबित किया कि जब कहानी बड़े कैनवस पर, बड़े दांव के साथ और भावनात्मक तीव्रता के साथ कही जाती है, तो दर्शक अब भी सिनेमाघरों की ओर लौटते हैं। लेखक और निर्देशक आदित्य धर ने इस फिल्म को केवल एक जासूसी थ्रिलर नहीं रहने दिया, बल्कि इसे देखने लायक बड़ा फिल्मी आयोजन बना दिया।

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    धुरंधर छोड़ती है मन में सवाल

    तीन घंटे 34 मिनट की लंबाई के बावजूद फिल्म कहीं भी ढीली नहीं पड़ती, क्योंकि इसकी नरेटिव स्ट्रक्चर लगातार दर्शक को थामे रखती है कभी जासूसी के पेचों से, कभी गैंगवार की क्रूरता से और कभी देशभक्ति के उफान से। मूल फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसका वह सवाल है जो दर्शक को फिल्म खत्म होने के बाद भी बांधे रखता है कि हमजा अली मजारी कौन है?

    इसलिए धुरंधर 2 को लेकर बढ़ी बेताबी

    वह इतना घातक क्यों है? यह जिज्ञासा उसी तरह दर्शकों के भीतर घर कर गई, जैसे कभी ‘बाहुबली 2’ के समय ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ ने किया था। अंत में अजय सान्याल (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल से प्रेरित पात्र) का संवाद ‘घायल हो, इसलिए घातक हो’ फिल्म की भावनात्मक और वैचारिक धुरी बन जाता है। यहीं से दर्शकों की प्रतीक्षा को भुनाते हुए सामने आती है ‘धुरंधर: द रिवेंज’। 

    Ranveer Singh Dhurandhar 2

    यह फिल्म वहीं से आगे बढ़ती है, जहां पहला भाग समाप्त हुआ था। कराची के अंडरवर्ल्ड और राजनीतिक गलियारों में फैले भारतीय खुफिया ऑपरेशन को और गहराई से खोलते हुए। ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की सफलता का एक बड़ा कारण रिलीज से पहले बना सकारात्मक माहौल भी है।

    धुरंधर 2 को देखने वालों का थिएटर्स में हुजूम

    इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए संवाद, मीम्स और चर्चाओं ने फिल्म को एक सांस्कृतिक घटना में बदल दिया। यही वजह रही कि पेड प्रीव्यू से ही फिल्म ने 43 करोड़ रुपये कमा लिए, जो किसी फिल्म की सामान्य ओपनिंग से भी अधिक है। पांच भाषाओं में 15 लाख से ज्यादा टिकटों की एडवांस बुकिंग ने स्पष्ट कर दिया कि इस फिल्म को हर किसी को देखना चाहिए।

    धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

    19 मार्च को प्रदर्शित होते ही फिल्म ने पहले दिन 100 करोड़ क्लब में एंट्री लेकर इतिहास रच दिया। 500 रुपये से ज्यादा दाम की टिकट के चलते सात दिनों के भीतर फिल्म वर्ल्डवाइड एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कमाई कर चुकी है। यह उपलब्धि अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि दर्शक अब भी बड़े पैमाने की, प्रभावशाली और भावनात्मक रूप से जुड़ने वाली कहानियों के लिए उत्सुक हैं।

    स्टार कास्ट ने फूंकी जान

    इस सफलता के केंद्र में हैं रणवीर सिंह, जिन्होंने अपने करियर का सबसे जटिल और परिपक्व किरदार निभाया है। उनके साथ संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी, आर. माधवन और सहयोगी भूमिका में आए कलाकार फिल्म को मजबूती देते हैं।

    धुरंधर 2 का सब्जेक्ट बना विवाद

    फिल्म की विषयवस्तु भी इसकी सफलता का महत्वपूर्ण कारण है। नोटबंदी, अंडरवर्ल्ड कनेक्शन और वास्तविक घटनाओं से प्रेरित प्रसंग ये सभी तत्व कहानी को यथार्थ का स्पर्श देते हैं। हालांकि कुछ आलोचकों ने इसे प्रोपेगेंडा कहा, लेकिन दर्शकों के लिए यह उनके भीतर की उन भावनाओं का प्रतिनिधित्व था, जिन्हें वे लंबे समय से महसूस कर रहे थे।

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    धुरंधर 2 में छाए 90s के कल्ट सॉन्ग्स

    तकनीकी स्तर पर भी फिल्म बेहद सशक्त है। सिनेमेटोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर और पिछली सदी के आठवें और नौवें दशक के गीतों का प्रयोग ये सभी मिलकर एक ऐसा सिनेमायी वातावरण रचते हैं, जो दर्शकों को कहानी के भीतर खींच लेता है।

    Dhurandhar

    तीन घंटे 49 मिनट की लंबाई के बावजूद कहानी की रफ्तार दर्शकों को बांधे रखती है जो रील के दौर में एक बड़ी उपलब्धि है। ए सर्टिफिकेट वाली इस फिल्म की सफलता ने इंडस्ट्री के भीतर भी एक बड़ा संदेश दिया है। स्टारडम से ज्यादा अब स्टोरीटेलिंग मायने रखती है। यह बदलाव हिंदी सिनेमा के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।

    साउथ सिनेमा पर भारी इकलौती धुरंधर 2

    दिलचस्प यह है कि इस फिल्म ने क्षेत्रीय सिनेमा की सीमाओं को भी तोड़ा है। अल्लू अर्जुन, महेश बाबू, जूनियर एनटीआर, एसएस राजामौली और रजनीकांत जैसे दिग्गजों की सराहना ने इसे पूरे देश में छा जाने वाली (पैन-इंडिया) फिल्म बना दिया है। अंततः, ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की सफलता को अगर एक वाक्य में समझना हो, तो यह कहा जा सकता है यह सिनेमा की उस ताकत की वापसी है, जो दर्शकों को सिर्फ कहानी नहीं दिखाती, बल्कि उन्हें उसका हिस्सा बना देती है।

    सिनेमाहॉल में गूंजती तालियों, सीटियों और सन्नाटे के बीच यह फिल्म एक बार फिर याद दिलाती है कि बड़े पर्दे का जादू अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि सही कहानी के इंतजार में और भी धारदार हो चुका है।

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