Ek Din Review: साई पल्लवी की जबरदस्त एक्टिंग के बीच नीरस भरी कहानी, क्लाइमैक्स नहीं बन पाया शानदार
साई पल्लवी बॉलीवुड में कदम रख चुकी हैं। उनकी और जुनैद स्टारर फिल्म 'एक दिन' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। हालांकि, निर्देशक कहानी के साथ पूरा न्याय न ...और पढ़ें

एक दिन मूवी रिव्यू/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। आप जिसे दिल से चाहते हों, वह आपको सिर्फ एक दिन के लिए मिल जाए, तो क्या होगा? खासकर तब, जब वह आपका पहला प्रेम हो। फिल्म 'एक दिन' इसी विषय पर आधारित है। हालांकि, उस एक दिन के प्रेम और भावनाओं को फिल्म इतनी गहराई से नहीं रच पाती कि वे दर्शकों के मन में ठहर सकें। इस वजह से फिल्म मात खा जाती है।
क्या है 'एक दिन' की कहानी?
कहानी नोएडा की माइकॉन डिजिटल कंपनी के आईटी विभाग में कार्यरत दिनेश कुमार श्रीवास्तव (जुनैद खान) की है। वह लोगों से नजरें मिलाकर बात भी नहीं कर पाता है। वह कंपनी में ही काम करने वाली मीरा रंगनाथन (साई पल्लवी) से मन ही मन प्यार करता है, लेकिन अपने भाव व्यक्त करने का साहस नहीं जुटा पाता। इस बीच उसे पता चलता है कि मीरा अपने बॉस नकुल (कुणाल कपूर) के साथ प्रेम संबंधों में है। शादीशुदा नकुल अपनी पत्नी से तलाक लेकर मीरा से शादी करने की बात करता है।
कंपनी को बड़ा मुनाफा होता है, इसलिए नकुल पूरी टीम को पांच दिन के लिए जापान भ्रमण पर ले जाता है, क्योंकि मीरा की ख्वाहिश जापान जाने की होती है। उसे वहां के स्नो फेस्टिवल और स्थानीय चीजों की जानकारी होती है। वहां एक रहस्यमयी घंटा होता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे सच्चे दिल से बजाकर जो भी मांगा जाए, वह इच्छा पूरी होती है। दिनेश मन ही मन में कामना करता है कि काश मीरा एक दिन के लिए उसकी हो जाए। इस बीच नकुल की पत्नी वहां पहुंच जाती है और बताती है कि वह चार माह की गर्भवती है। यह जानकर मीरा का दिल टूट जाता है। बाकी सभी लोग लौट चुके होते हैं।
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नशे की हालत में बर्फीले तूफान के बीच फंसी मीरा को स्थानीय लोगों की मदद से दिनेश अस्पताल लाता है। वहां गुजराती डॉक्टर बताती है कि मीरा को ट्रांजिएंट ग्लोबल अम्नेशिया (टीजीए) हो गया है, जिसमें व्यक्ति कुछ समय के लिए अपनी याददाश्त खो देता है। डॉक्टर कहती है कि उसकी याददाश्त अगले दिन लौट आएगी। इस एक दिन में जब मीरा को अपने वर्तमान की कोई याद नहीं होती, तो दोनों साथ में जापान घूमते हैं और एक-दूसरे के करीब आते हैं। अगले दिन मीरा की याददाश्त वापस आ जाती है। स्वदेश वापसी पर क्या मीरा दिनेश की कमी महसूस कर पाएगी? कहानी इसी पर आधारित है।
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दर्शकों के मन में कंफ्यूजन छोड़ देगी फिल्म
अभिनेता आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस के तले निर्मित यह फिल्म 2016 की थाई फिल्म 'वन डे' की रीमेक है। सुनील पांडे निर्देशित और स्नेहा देसाई व स्पंदन मिश्रा द्वारा लिखित इस कहानी में जब दिनेश और मीरा एक दिन के लिए साथ आते हैं, तो वह हिस्सा काफी खिंचा हुआ महसूस होता है। मीरा में ऐसी क्या खूबी है कि नकुल और दिनेश दोनों ही उस पर फिदा हैं, इसे लेखक ठीक से स्थापित नहीं कर पाए हैं। जापान पहुंचने के बाद फिल्म का फोकस वहां की संस्कृति और पर्यटन स्थलों के सुंदर चित्रण पर अधिक हो जाता है। कहानी में कुछ सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं, जैसे— मीरा को यह याद नहीं रहता कि वह जापान में है, लेकिन होटल का कमरा याद रहता है। इसी तरह नकुल का चित्रण भी अधूरापन लिए हुए है। उसके झूठ के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है।
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इसके अलावा, दिनेश और मीरा के बीच के दृश्य अपेक्षित भावनात्मक गहराई नहीं ला पाते। क्लाइमैक्स भी जल्दबाजी में निपटाया गया लगता है, जो विश्वसनीय नहीं बन पाया है। बहरहाल, इरशाद कामिल के गीत और राम संपत का संगीत मधुर है। सिनेमेटोग्राफर मनोज लोबो का काम सराहनीय है, उन्होंने जापान के पर्यटन स्थलों और वहां की प्राकृतिक खूबसूरती को बारीकी से कैमरे में कैद किया है।
मीरा बनकर छाईं साई, नहीं मिला जुनैद का पूरा साथ
दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साई पल्लवी ने 'एक दिन' से हिंदी सिनेमा में पदार्पण किया है। उन्होंने मीरा की भावनाओं को बखूबी व्यक्त किया है। उन्हें अपनी डांस प्रतिभा दिखाने का भी मौका मिला है। वह मीरा के किरदार को पूरी तरह विश्वसनीय बनाती हैं। हालांकि, इसमें उन्हें जुनैद का पूरा साथ नहीं मिल पाता है। जुनैद रोमांटिक और भावनात्मक दृश्यों में कमजोर नजर आते हैं। कुणाल कपूर मेहमान भूमिका में प्रभावहीन हैं। 'एक दिन' साफ-सुथरी, सादगी भरी प्रेम कहानी है, लेकिन यह उस ऊंचाई तक नहीं ले जा पाती कि दिलों में बस सके।