The Legend of Udham Singh Review: वसीम अमरोही ने किरदार में फूंकी जान, बैकग्राउंड स्कोर ने बटोरे फुल नंबर
वसीम अमरोही की फिल्म 'द लेजेंड ऑफ उधम सिंह' स्वतंत्रता सेनानी उधम सिंह की सच्ची कहानी पर आधारित है। यह फिल्म जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद उधम सिंह ...और पढ़ें

फिल्म के एक सीन में वसीम अमरोही (फोटो-जॉगरण ऑनलाइन)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। फिलहाल तो सिनेमाघरों में आदित्य धर और रणवीर सिंह की धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। इसी बीच ओटीटी पर एक ऐसी फिल्म ने दस्तक दी है जो बड़ी ही शांति से अपनी कहानी कहने की कोशिश करते हुए सच्ची कहानी लेकर आई है।
स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह पर तीन फिल्में बन चुकी हैं। इनमें साल 2002 में आई लीजेंड ऑफ भगत सिंह, 23 मार्च 1931: शहीद, 1965 में आई शहीद और और रंग दे बसंती जैसी फिल्में शामिल हैं। अब वसीम अमरोही की 'द लेजेंड ऑफ उधम सिंह' के रूप में एक और शानदार कहानी लेकर आए हैं।
यह भी पढ़ें- Dhurandhar 2 Review: पहले से और भी घातक हुआ 'हमजा', रणवीर ने हिलाया लियारी का तख्त; पढ़ें रिव्यू
वसीम अमरोही ने किया है निर्देशन
जब बेरहम अंग्रेजों ने देश पर अपनी बर्बरता दिखाई थी ये उस समय की कहानी को हमारे सामने पेश कर रही है। वसीम अमरोही इसके निर्देशक होने के साथ-साथ इसके एक्टर भी हैं। उनके अलावा फिल्म में अफ्सर अमरोही, खुशबू खान और सत्यम तिवारी ने काम किया है।

अप्रैल 1919 में हुए जलियावाला बाग के भयानक खून-खराबे को कोई नहीं भूल पाएगा। इस हत्याकांड के पीछे सर माइकल फ्रांसिस ओ'डायर जिम्मेदार थे, जिनकी 1940 में सिंह ने हत्या कर दी थी। अमरोही को भी उन्होंने ही डायरेक्ट किया है। इसकी कहानी बागी फेम शिफूजी शौर्य भारद्वाज ने लिखी है।
खबरें और भी
फिल्म में बेगुनाह भारतीयों के खिलाफ जो बेरहमी दिखाई गई है, वह आपको बेचैन कर देगी। लेकिन जब अमरोही, जो इसी नाम के किरदार में आग फूंकते हैं, जिम्मेदारी लेने और बदला लेने का फैसला करते हैं, तो यह आपके अंदर बहुत एनर्जी भी भर देगा।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म देखने वाले सरदार उधम सिंह को मातृभूमि का सच्चा सपूत महसूस कर पाएंगे। 1919 और 1940 के बीच जो हुआ, उसे फिल्म में बहुत ध्यान से दिखाया गया है। इस आजादी की लड़ाई को अपना बदला लेने में 21 साल लग गए। यह एक ऐसी कहानी थी जो इतिहास के पन्नों में खो गई थी। लेकिन अब यह सबके सामने है। हो सकता है कुछ लोग स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, इतिहास को भूल गए हों लेकिन हिंदी सिनेमा ऐसा कभी नहीं होने देगा।