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    Dhurandhar 2 Review: पहले से और भी घातक हुआ 'हमजा', रणवीर ने हिलाया लियारी का तख्त; पढ़ें रिव्यू

    By Smita SrivastavaEdited By: Rinki Tiwari
    Updated: Thu, 19 Mar 2026 07:35 AM (IST)

    Dhurandhar 2 Review: रणवीर सिंह स्टारर फिल्म धुरंधर: द रिवेंज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म धुरंधर का दूसरा पार्ट है। जानिए फिल्म का रिव्यू। ...और पढ़ें

    धुरंधर 2 का मूवी रिव्यू। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

    धुरंधर 2 का मूवी रिव्यू। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

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    स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। पिछले वर्ष दिसंबर में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर (Dhurandhar) की शुरुआत कंधार हाईजैक जैसे झकझोरने वाले प्रसंग से हुई थी। उसी कथा को आगे बढ़ाते हुए धुरंधर : द रिवेंज (Dhurandhar: The Revenge) यह स्पष्ट करती है कि बदलते समय के साथ भारत की सोच और रणनीति भी बदली है।

    यह नया भारत है जो घर में घुसकर मारेगा। शीर्षक से ही स्‍पष्‍ट है कि इस बार प्रतिशोध लिया जाएगा। मूल फिल्म के एक शुरुआती दृश्य में अपहरणकर्ता कहता है 'पड़ोस में ही रहते हैं हम, गूदे भर का जोर लगा लो और बिगाड़ लो जो बिगाड़ सकते हो।'

    इस बार निर्देशक आदित्य धर (Aditya Dhar) ने भारतीयों का दमखम दिखाया है। उन्‍होंने भारतीय एजेंटों की साहसिक कार्रवाई और प्रतिशोध की भावना को अधिक विस्तार और तीव्रता के साथ प्रस्तुत किया है। हालांकि यह मूल फिल्‍म की तुलना में थोड़ा कमजोर है।

    क्या है फिल्म की कहानी?

    धुरंधर के एक दृश्‍य में अजय सान्‍याल (आर माधवन) ' घायल हो इसलिए घातक हो' यह बात जसकीरत सिंह रांगी उर्फ हमजा अली मजारी (रणवीर सिंह) से कहते हैं। धुरंधर : द रिवेंज का आरंभ जसकीरत के अतीत से होता है, जिसकी वजह से वह घायल है।

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    Dhurandhar The Revenge Review

     

    एक मामूली जमीन विवाद के कारण उसके परिवार पर ढाए गए अत्याचार उसकी जिंदगी की दिशा बदल देते हैं। यहां से कहानी साल 2009 के पाकिस्तान के कराची स्थित ऐतिहासिक इलाके लियारी में पहुंचती है जहां बलूज गैंग के सरदार रहमान डकैत (अक्षय खन्‍ना) को सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है।

    शेर-ए-बलूच बना हमजा

    उसके बाद हमजा अपनी चतुराई और रणनीतिक सोच से परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ते हुए स्वयं लियारी का सर्वेसर्वा बन जाता है। इस सफर में उसे अपने ससुर जमील (राकेश बेदी) का पूरा सहयोग मिलता है। उसकी बढ़ती ताकत को देखते हुए बलूच नेता उसे ‘शेर-ए-बलूच’ की उपाधि भी देते हैं।

    फिल्म की कहानी कई परतों में विकसित होती है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) के नेतृत्व में भारत में तबाही मचाने की साजिश रची जाती है। भारी मात्रा में ड्रग्स और नकली नोट भारत भेजने की तैयारी होती है। इस बीच एसपी चौधरी असलम (संजय दत्‍त) को हमजा पर शक होता है।

    इन सभी घटनाओं के बीच हमजा की असलियत क्‍या इकबाल के सामने आ पाती है? क्‍या वह भारत में हुए हमले के साजिशकर्ताओं को अंजाम तक पहुंचा पाता है? यही फिल्म का मूल कथानक है।

    आदित्य धर का निर्देशन कैसा है?

    आदित्‍य धर लिखित और निर्देशित इस फिल्म में कई ट्विस्ट और टर्न हैं, जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। इस बार भी उन्‍होंने कहानी को 6 अध्यायों में बांटा है। इनमें ईशनिंदा, नकली नोटों का कारोबार, भारत में नोटबंदी, भारत को तबाह करने की साजिशें, पाकिस्‍तानियों का साथ देने वाले स्‍थानीय राजनेता, उरी हमला, राम जन्मभूमि फैसला, बलूच नेताओं की भागीदारी जैसे विषय शामिल हैं।

    Ranveer Singh Dhurandhar 2 Advance Collection

    पीएम मोदी का भाषण बना हाइलाइट

    हालांकि इतने सारे मुद्दों को एक साथ प्रस्तुत करने के कारण कुछ घटनाएं बहुत तेजी से घटित होती हैं, जिससे उनका प्रभाव पूरी तरह उभर नहीं पाता। नए भारत की बात हो रही है लेकिन सर्जिकल स्‍ट्राइक सिर्फ संवादों में सिमटकर रह गया है। 

    आतंकियों की ताबड़तोड़ हत्‍या। यह सब बहुत तेजी से और सुगमता से होता है। नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का टीवी पर चलता भाषण कहानी को विश्वसनीयता प्रदान करता है। प्रयागराज में मारे गए नेता के तार किस प्रकार से पाकिस्‍तानी साजिशकर्ताओं से जुड़े थे यह चौंकाता है। 

    फिल्म का क्लाइमेक्स विशेष रूप से लंबा है, जहां हमजा और मेजर इकबाल के बीच संघर्ष को जरूरत से ज्यादा खींचा गया है। हालांकि अंत में मददगार भारतीय एजेंट का सामने आना चौंकाता है। फिल्म में एक्शन की भरमार है और कई दृश्य अत्यंत हिंसक हैं।

    बैकग्राउंड म्यूजिक ने बांधा समां

    संगीत की बात करें तो बैकग्राउंड स्कोर प्रभावी है और कहानी के साथ सटीक बैठता है। पुराने लोकप्रिय गीत जैसे 'तम्मा तम्मा', 'ओए ओए' और 'बाजीगर ओ बाजीगर' फिल्म में सुनाई देते हैं और एक अलग भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते हैं। हालांकि पहले भाग की तुलना में इस बार मौलिक संगीत उतना प्रभावशाली नहीं बन पाया है।

    कहां रह गई कमी?

    फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी अवधि है। 229 मिनट की अवधि को ढाई घंटे में समेटा जा सकता था। इसके बावजूद, निर्देशक की यह सराहना करनी होगी कि उन्होंने गहन शोध के साथ इतने जटिल घटनाक्रमों को एक सुसंगत कथा में पिरोने का प्रयास किया है।

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    स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस

    अभिनय की दृष्टि से रणवीर सिंह एक बार फिर अपने प्रभावशाली अंदाज में नजर आते हैं। उनके चेहरे के भाव और संयमित अभिनय किरदार की आंतरिक पीड़ा और देशभक्ति को सशक्त रूप से व्यक्त करते हैं। आर माधवन एक कुशल रणनीतिकार के रूप में सधे हुए नजर आते हैं और अपने किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं।

    Dhurandhar The Revenge

    संजय दत्त अपने अनुभव के बल पर किरदार में सहजता से ढल जाते हैं। राकेश बेदी फिल्‍म का खास आकर्षण हैं। यह उनके करियर के यादगार भूमिकाओं में शामिल होगा। अर्जुन रामपाल का काम उल्‍लेखनीय है। येलिना की भूमिका में सारा अर्जुन का शांत और संतुलित अभिनय भी कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ता है। आदित्‍य की पत्‍नी और अभिनेत्री यामी गौतम मेहमान भूमिका में हैं। वह कुछ खास कहानी में नहीं जोड़ती।

    फिल्म के अंत में संवाद है ‘बलिदान देने से बड़ा कोई कर्म नहीं होता और देश के लिए बलिदान देने से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।‘ पूरी फिल्म के भाव को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करता है। कुल मिलाकर, धुरंधर : द रिवेंज एक महत्वाकांक्षी, व्यापक और विचारोत्तेजक फिल्म है, जो देशभक्ति, प्रतिशोध और बलिदान जैसे भावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।

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