Toxic Movie Review: खून-खराबा, भरपूर एक्शन और यश का स्वैग; क्या 'टॉक्सिक' की कहानी में है दम? पढ़िए रिव्यू
रॉकिंग स्टार यश (Yash) की फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' (Toxic Movie Review) रिलीज हो गई है, जिसमें भरपूर ...और पढ़ें

शानदार एक्शन के बीच कमजोर कहानी में खोई टॉक्सिक
HighLights
फिल्म में दिखा यश का दमदार एक्शन
कहानी और स्क्रीनप्ले में हैं खामियां
बीजीएम और सिनेमैटोग्राफी शानदार
अंकित सिंह तोमर, नई दिल्ली। 'बात तब खत्म होगी जब मैं कहूंगा, तब तक… जरा कायदे में रहो।' बस कुछ इसी लाइन से बनती है रॉकिंग स्टार यश की मचअवेटेड फिल्म टॉक्सिक (Toxic Review), जो आखिरकार अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। साउथ सुपरस्टार ने अपनी इस फिल्म पर 4 साल का वक्त लगाया है।
KGF के बाद यश को देखने के लिए फैंस बेताब थे और आखिरकार एलान हुआ 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' का और अब सिनेमाघरों में फिल्म आ चुकी है। 3 घंटे 14 मिनट की इस फिल्म में एक्शन तो कूट-कूटकर भरा गया है, लेकिन क्या वाकई में इसकी कहानी में दम है? आइए आपको बताते हैं।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी असल में गोवा की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी 1947 से शुरू होती है, जहां अंग्रेजों के शासन के बाद ड्रग्स और गैंगवार की दुनिया है और इसी दुनिया में होती है यश यानि राया की एंट्री। यश अकेले नहीं होते हैं, यहां उनके साथ उनकी बहन गंगा (Nayanthara) भी साथ आती हैं। अपने पुराने और माता-पिता के बदले की कहानी को लेने के लिए यश आए हैं। इसी गैंगवार की दुनिया में जमकर खून-खराबा होता है और यहीं पर राया की मुलाकात रेबेका (Tara Sutarria) से होती है।

रेबेका के पिता का रुतबा है और शहर में उनकी तूती बोलती है। इसी बीच राया की जिंदगी में सर्कस में परफॉर्म करने वाली नादिया (Kiara Advani) आती हैं। अब रेबेका और नादिया के बीच प्यार के ट्राइएंगल में फंसे राया को कुछ समझ नहीं आता है। उधर कहानी में एलिजाबेथ (Huma Qureshi) अपने भाई (Akshay Oberoi) के साथ यश की गैंग में शामिल होती हैं, लेकिन धोखेबाजी के खेल में एलिजाबेथ अपने ही भाई को मारती है।
इधर राया और नादिया का एक बेटा हो जाता है और यहीं से कहानी में आता है बड़ा ट्विस्ट। प्यार, धोखे और गैंगवॉर के बीच बाप-बेटे की कहानी आगे बढ़ती है, इसके बाद क्या होता है, यही फिल्म में आगे दिखाया गया है।

कैसा है फिल्म?
इस फिल्म को देखने के लिए आपके पास जिगरा होना चाहिए। अब ये हम कह इसलिए रहे हैं, क्योंकि इस फिल्म में एक्शन भरपूर मात्रा में है, लेकिन कहानी में झोल है। फिल्म शुरूआत में कियारा आडवाणी की भावनाओं को दिखाती है, लेकिन इन भावनाओं के सैलाब पर कहानी का बिखर जाना भारी पड़ जाता है। शुरूआत के 30-40 मिनट आपको कहानी समझने में लग जाएंगे कि आखिर चल क्या रहा है।

किरदारों को स्थापित होने में काफी वक्त लगता है। एक के बाद एक किरदारों की एंट्री होती है, जो शायद फिल्म की जल्दबाजी दिखाती है। हालांकि यश का स्वैग इसमें भरपूर दिखता है। एक्शन ऐसा कि शायद देखने वाला आंखें बंद कर ले। खून-खराबा और गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच बोल्ड सीन्स भी भरपूर मात्रा में हैं। हालांकि तारा, कियारा और नयनतारा के किरदारों में भावनाएं समझ आती हैं, पर नयनतारा और यश के किरदार के बीच का रिश्ता कहीं खो सा जाता है।

भाई-बहन के रिश्ते पर प्यार हावी हो जाता है। इंटरवल से पहले तक कहानी में थोड़ा दम आता है, लेकिन सेकेंड हाफ में फिर से कहानी का फ्लो टूट जाता है। स्क्रीनप्ले और मजबूत किया जा सकता था। हालांकि इस सबके बीच यश के स्वैग में कोई कमी नहीं आती है। स्क्रीन पर यश ने अपने स्टाइल और एक्शन से वाकई में आग लगाई है।
कैसा है फिल्म का डायरेक्शन?
फिल्म का डायरेक्शन गीतू मोहनदास (Geethu Mohandas) ने किया है। गीतू मोहनदास ने ही यश के साथ मिलकर फिल्म की कहानी भी लिखी है। गीतू मोहनदास ने फिल्म को बड़े स्कैल पर बनाया है। वीएफएक्स का इस्तेमाल अच्छा किया गया है, सेट्स बड़े हैं, लेकिन शायद कहानी से ज्यादा गीतू मोहनदास की इस फिल्म में स्वैग और स्टाइल पर ज्यादा फोकस किया गया है।
हालांकि एक्शन सीन्स कमाल के हैं। एक महिला डायरेक्टर होने के नाते गीतू मोहनदास ने डायरेक्शन को साधने की कोशिश की है, लेकिन फिल्म का स्क्रीनप्ले थोड़ा भटकता हुआ है, पर कुछ डायलॉग्स आपको याद जरूर रह जाते है। फिल्म में हर थोड़ी देर में बजने वाला बीजीएम शानदार लगता है।

हर दूसरे डायलॉग पर बजता म्यूजिक दर्शकों को आकर्षित करता है। फिल्म में सिनेमैटोग्राफी कमाल की है। राजीव रवि ने इसमें पूरी मेहनत की है और उनकी मेहनत कामयाब भी हुई है।
फिल्म के किरदारों का काम?
अगर ये कहा जाए कि टॉक्सिक पूरी तरह से यश की फिल्म है, तो यह कहना गलत नहीं होगा, फिल्म में यश डबल रोल में है और दोनों ही रोल्स में यश का पागलपन साफ झलकता है। यश के लुक्स शानदार लगे हैं और उन्होंने एक्शन करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। वहीं नयनतारा ने अपने किरदार से फिल्म में जान डाली है, हालांकि उनके किरदार को बढ़ाया जा सकता था। फिल्म में कियारा आडवाणी ने अपनी भावनाओं से दर्शकों को बांधने की कोशिश की है।

उनके और यश (Rocking Star Yash) के बीच अगर कहानी पर थोड़ा ज्यादा फोकस किया जाता तो शायद इसमें दर्शकों को ज्यादा खुशी मिलती। रेबेका के किरदार में तारा सुतारिया ने भी न्याय किया है। हुमा कुरैशी का किरदार साफ और शानदार तो है, लेकिन उनके किरदार की जरूरत कहीं-कहीं समझ नहीं आती है।
रुक्मणी वसंत (Rukmini Vasanth) के किरदार से भी यही उम्मीद की जा सकती है, हालांकि उनकी झोली में जितना आया, उन्होंने उतना किया। अक्षय ओबेरॉय का किरदार सिर्फ झलकियों में रहा है।
फिल्म देखें या नहीं?
अगर आप फिल्म की मास अपील और एक्शन पर जाएंगे तो शायद ये फिल्म आपके लिए हो सकती है, लेकिन फिल्म की कहानी में काफी उलट-फेर है। यश का दमदार एक्शन और हवा में उड़ते लोग शायद आपको आकर्षित जरूर करें।
फिल्म का क्लाईमैक्स कहानी से काफी अलग है और दर्शकों को चौंकाता भी है, लेकिन शायद इसे किरदारों से जोड़े रखा जा सकता था। अगर आप यश और एक्शन का डोज देखना चाहते हैं, तो शायद टॉक्सिक आपकी लिस्ट में शामिल हो सकती है।
