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    मां देने वाली थी जहर, पिता छोड़कर चले गए; Shaktimaan की गीता विश्वास के साथ फिर ईश्वर ने किया चमत्कार

    Updated: Sun, 22 Feb 2026 07:26 PM (IST)

    शक्तिमान की गीता विश्वास, वैष्णवी मैकडोनाल्ड ने अपने बचपन के संघर्षों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे माता-पिता के झगड़ों और पिता के गायब हो ...और पढ़ें

    शक्तिमान में गीता विश्वास (फोटो-इंस्टाग्राम)

    शक्तिमान में गीता विश्वास (फोटो-इंस्टाग्राम)

    HighLights

    1. माता-पिता के झगड़ों से पढ़ाई प्रभावित हुई

    2. पिता के गायब होने के बाद मां जहर देना चाहती थी

    3. चर्च में जाने के बाद हुआ चमत्कार

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। एक पूरी पीढ़ी के लिए, वैष्णवी मैकडोनाल्ड हमेशा गीता विश्वास के नाम से ही जानी जाएंगी। जिन लोगों ने भी शक्तिमान देखा है वो इससे जरूर रिलेट कर पाएंगे। वैष्णवी ने शक्तिमान की निडर पत्रकार गीता विश्वास का किरदार निभाया था। शक्तिमान 1997 से 2005 के बीच टीवी पर प्रसारित हुआ और ये बच्चों के मनपसंदीदा टीवी शोज में से एक था।

    पढ़ाई में बहुत अच्छीं थीं वैष्णवी

    लेकिन क्या आपको पता है कि टेलीविजन पर एक जाना-पहचाना चेहरा बनने से बहुत पहले, वैष्णवी ने अपने बचपन में बहुत दुख झेला है। अपने माता-पिता के बीच चल रहे अहंकार के झगड़ों के कारण वैष्णवी की स्कूली शिक्षा भी प्रभावित हुई। सिद्धार्थ कनन को दिए इंटरव्यू में वैष्णवी ने बताया, 'मां-बाप के झगड़ों की वजह से हम होटलों में रहते थे। हम एक होटल से दूसरे होटल में जाते रहते थे। मैं स्कूल कैसे जा सकती थी? मैं पढ़ाई में बहुत अच्छी थी लेकिन चौथी क्लास से 10वीं क्लास तक हम यही करते रहे। मैंने छह साल इसी में गवां दिए। मैं वैज्ञानिक बनना चाहती थी।'

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    छोटे से मकान में रहती थीं एक्ट्रेस

    वैष्णवी ने आगे कहा- लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। परिवार जब हैदराबाद में एक किराए के छोटे से मकान में रहने लगा और जिंदगी थोड़ी स्थिर होने लगी, तभी उनके पिता बिना किसी वजह के गायब हो गए। एक्ट्रेस बोलीं- “14 साल की उम्र में मैंने भगवान से प्रार्थना करना शुरू किया, उनसे पूछा कि क्या उन्हें हमारी परेशानियां दिखाई नहीं दे रही हैं। दो-तीन महीने के अंदर ही मेरे पिता गायब हो गए। हम उनका पता नहीं लगा पाए।”

    पिता को खोजने के लिए आईं मुंबई

    पिता की खोज में मां कहीं से उधारी लेकर दोनों बेटियों को मुंबई लेकर आ गई। मुंबई में ये लोग एक लॉज में रहने लगे। यहां पर भी जब किराए और खाने के लिए पैसे नहीं बचे तो मां ने दोनों को जहर देकर खुद भी मरने का मन बनाया। एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने बाद में हमें बताया, ‘मैं तुम्हें कुछ जहर मिलाकर खिलाने वाली थी।’ मैं 16 साल की थी और मेरी बहन 12 साल की। वह नहीं चाहती थीं कि हम गलत हाथों में पड़ें।'

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    घर के बाहर मिला नोटों का बंडल

    हालांकि इस दौरान एक चर्च में उन्हें आशा की एक किरण नजर आई जहां उनकी मां उन्हें लेकर गई थीं। वैष्णवी का दावा है कि वहीं पर उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया। उन्होंने कहा, 'मुझे एक अलौकिक अनुभव हुआ। मैंने ईश्वर की शक्ति को महसूस किया और रोने लगी।' जब वे अपने लॉज लौटे, तो उन्हें अपने दरवाजे के बाहर नए-नए 100 रुपये के नोटों का एक बंडल मिला, बिल चुकाने के लिए ठीक उतनी ही रकम की जरूरत थी। यहीं से वैष्णवी को ईश्वर पर विश्वास हो गया।

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