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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Freedom at Midnight Review : जब विभाजन की दहलीज पर खड़ा था भारत, दिलचस्प है निखिल आडवाणी का पॉलिटिकल थ्रिलर शो

Published: Fri, 15 Nov 2024 05:39 PM (IST)

ओटीटी प्लेटफॉर्म सोनी लिव पर फ्रीडम एट मिडनाईट नाम से एक धांसू सीरीज रिलीज हो चुकी है। ये एक पॉलिटिकल ...और पढ़ें

फ्रीडम एड मिडनाइट वेब सीरीज रिव्यू (Photo: Jagran Online)
फ्रीडम एड मिडनाइट वेब सीरीज रिव्यू (Photo: Jagran Online)

HighLights

  1. दिखाई गई है बंटवारे की कहानी
  2. सोनी लिव पर रिलीज हुई फ्रीडम ऑफ मिडनाइट
  3. निखिल आडवाणी हैं शो के निर्माता

एंटरटेनमेंट डेस्क,नई दिल्ली। पॉलिटिक्स तो भारत के लोगों की नसों में बसती है। मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक और गली नु्क्कड़ से लेकर चाक-चौराहों तक हर तरफ इसके चर्चे होते हैं। ऐसी ही एक सीरीज आज रिलीज हो चुकी है जहां 200 साल के राज के बाद अंग्रेज वापस अपने देश जाने को तैयार हैं और भारत देश के दो हिस्से होने हैं।

सोनी लिव के शो फ्रीडम एट मिडनाइट के सभी 7 एपिसोड रिलीज हो चुके हैं। ये एक हिस्टोरिकल ड्रामा सीरीज है। इसकी कहानी भारत को स्वतंत्रता मिलने से पहले की है, जिसमें दिखाया गया कि भारत आजाद होने वाला है। इस बीच कई सारी कंट्रोवर्सीज खड़ी होती हैं। इसका मुद्दा ये होता है कि धर्म आदि के आधार पर किस तरह देश को बांटा जाए यही इस इस सीरीज का हिस्सा है।

क्या है इस सीरीज की कहानी

सीरीज की कहानी एक तरीके से 1946 के दौर की है, देश आजाद होने वाला था। सरकार के सामने कई तरह के चैलेंजेस थे और लोगों में आपसी पॉलिटिक्स चल रही थी। फिर किन परिस्थितियों में देश का विभाजन करना पड़ा और पाकिस्तान बना। आजादी के 77 साल बाद भी ये सवाल आज भी लोगों के दिमाग में बना रहता है कि क्या हिंदुस्तान को सच में 1947 के उस बंटवारे की जरूरत थी। क्या अलग से दूसरा देश बनाने का फैसला सही था? तो ये सीरीज आपके उन सभी सवालों का जवाब दे सकती है।

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सरकार के सामने क्या थी चुनौतियां

करोड़ों लोगों की तकदीर तय करने वाले उन लोगों के दिमाग में क्या चल रहा था? उनके सामने क्या सारी चुनौतियां थीं? उनका क्या पर्सनल और पॉलिटिकल स्ट्रगल था ये सब फ्रीडम एट मिडनाईट में दिखाया गया है। इसमें विभाजन को कायदे से समझाया गया है। बंटवारे में पंजाब और बंगाल के किन इलाकों को अलग करके पाकिस्तान बनाया गया। वो इलाके कैसे तय किए गए? जिन्ना की मुस्लिम लीग किन इलाकों के लिए लड़ रही थी ये सब आपको देखने को मिलेगा।

कहानी जून, 1947 तक की घटनाएं दिखाती है, जब बंटवारे की ऑफिशियल अनाउंसमेंट की गई थी। कहानी में मोहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग के नेता अलग देश के लिए लड़ाई लड़ते नजर आएंगे। कहानी 1946 के कलकत्ता से शुरू होती है। शो के पहले सीक्वेंस में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से शुरुआत की गई है जो बंटवारे के सवाल पर जवाब देते हैं- 'हिंदुस्तान का बंटवारा होने से पहले मेरे शरीर का बंटवारा होगा।'

इस एक डायलॉग से आपको बंटवारे पर गांधी का पक्ष पता लग जाता है। कुल मिलाकर ये कह सकते हैं कि फ्रीडम ऑफ मिडनाइट की कहानी को फिल्मी स्टाइल में दिखाने की कोशिश की गई है लेकिन डायरेक्टर ने फिल्म का पेस कहीं कमजोर नहीं पड़ने दिया है।

कैसी है कलाकारों की एक्टिंग?

अब बात करते हैं एक्टर्स की परफॉर्मेंस की तो शो में जवाहर लाल नेहरू के किरदार में नजर आए सिद्धांत गुप्ता सबसे दमदार लगे। उनकी डायलॉग डिलीवरी से लेकर फेश एक्सप्रेशन और आंखों के मूवमेंट सभी चीजें एकदम प्वाइंट पर थीं। इसके अलावा जिन्ना के रोल में आरिफ जकारिया भी अच्छे लगे। चिराग वोहरा ने महात्मा गांधी का किरदार निभाया था लेकिन उनकी आवाज में वो दम गायब था।

कहां-कहां किया जा रहा सर्च

फ्रीडम ऑफ मिडनाईट को देखने के लिए सर्च करने वाले राज्यों में सबसे आगे है महाराष्ट्र, इसके बाद नंबर आता है दिल्ली, गुजराज, केरल और फिर कर्नाटक का।

इंटरनेट पर क्या सर्च कर रहे लोग

फ्रीडम ऑफ मिडनाइट सीरीज देखने के लिए लोग इसे इंटरनेट से डाउनलोड करने का ऑप्शन ढूंढ़ रहे हैं। इसके अलावा लोग मार्टिन, द साबरमति रिपोर्ट, ऑपरेशन ब्लड हंट और माउंटबेटन से संबंधित टॉपिक भी खोज रहे हैं।

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