अर्जेंटीना-इंग्लैंड का मुकाबला भावनाओं से ऊपर वाला क्यों? 24 साल बाद फिर फीफा वर्ल्ड कप में होगी बादशाहत की जंग
फीफा विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच फाइनल में जगह बनाने के लिए जंग होगी। ...और पढ़ें

24 साल का इंतजार और बदले की आग

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। फीफा विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में बुधवार देर रात (12:30 बजे) अटलांटा स्टेडियम में इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच फाइनल में जगह बनाने के लिए जंग होगी। दोनों टीम 24 साल बाद विश्व कप में आमने-सामने होंगी। इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच आखिरी विश्व कप मैच साल 2002 में खेला गया था।
दूसरी ओर स्पेन ने 16 साल बाद फीफा विश्व कप फाइनल का टिकट कटा लिया है। पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने फ्रांस को 2-0 से पटखनी दी। फीफा विश्व कप में इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच 5 बार टक्कर हुई है। इस दौरान इंग्लैंड ने 3 और अर्जेंटीना ने 2 मुकाबलों पर कब्जा जमाया है।
1998 में हुए पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना ने बाजी मारी थी। दोनों टीमों के बीच ओवरऑल 14 मैच हुए और इंग्लैंड ने 6 जीते। 3 पर अर्जेंटीना ने कब्जा जमाया तो 5 ड्रॉ रहे। आइए, इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच ऐतिहासिक और हाई-वोल्टेज राइवलरी के कुछ सबसे यादगार मैचों पर नजर डालते हैं।
1962 विश्व कप: पहली बार हुई टक्कर
अर्जेंटीना और इंग्लैंड पहली बार चिली में हुए 1962 के फीफा वर्ल्ड कप में टकराए थे। इस मैच में इंग्लैंड ने ग्रुप स्टेज में 3-1 से जीत हासिल की। इंग्लैंड की ओर से रॉन फ्लावर्स, बॉबी चार्लटन और रोजर हंट गोल दागे। वहीं अर्जेंटीना के लिए जोसे सैनफिलिपो ने इकलौता गोल किया।
खबरें और भी
इस हार से अर्जेंटीना टूर्नामेंट से बाहर हो गया। वर्ल्ड कप के इतिहास में अर्जेंटीना के खिलाफ इंग्लैंड की यह सबसे बड़ी जीत का अंतर है। साथ ही 1980 में वेम्बली में फ्रेंडली मैच में मिली 3-1 की जीत के साथ, यह दोनों टीमों के बीच हुए सभी मैचों में उनकी संयुक्त रूप से सबसे बड़ी जीत भी है।
1966 विश्व कप: हाई-वोल्टेज ड्रामा
1966 में इंग्लैंड फीफा विश्व कप की मेजबानी कर रहा था। क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड और अर्जेंटीना भिड़ीं, तो मैदान पर हाई-बोल्टेज ड्रॉमा देखने को मिला। अर्जेंटीना के कप्तान एंटोनियो रैटिन को रेफरी ने रेड कार्ड दिया और उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। रैटिन ने बाहर जाते समय ब्रिटिश झंडे वाले कॉर्नर फ्लैग को मरोड़ दिया।
वह क्वीन एलिजाबेथ के लिए बिछाए गए रेड कार्पेट पर बैठ गए। इतना ही नहीं उन्होंने वहां से उठने से मना कर दिया। कप्तान एंटोनियो रैटिन का कहना था कि स्टैंड्स में बैठे अंग्रेजी फैंस उन पर लगातार बीयर के कैन फेंक रहे थे।
रिजल्ट की बात करें तो इंग्लैंड ने ज्योफ हर्स्ट के गोल की बदौलत यह मैच 1-0 से जीत लिया और बाद में विश्व चैंपियन भी बना। मैच के बाद इंग्लैंड के मैनेजर अल्फ रैमसे ने अर्जेंटीना के खिलाड़ियों को सरेआम "जानवर" कह दिया। यह एक ऐसा अपमान था जिसे अर्जेंटीना का कोई भी नागरिक आज तक नहीं भूल पाया है। हाल ही में एंटोनियो रैटीन के निधन ने उन पुरानी और कड़वी यादों को फिर से ताजा कर दिया।

WC 1986: हैंड ऑफ गॉड-सदी का सबसे बेहतरीन गोल
1986 में मेक्सिको सिटी के एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम में अर्जेंटीन-इंग्लैंड आमने-सामने था। मुकाबले का माहौल बहुत ज्यादा राजनीतिक था। यह 1982 के फॉकलैंड्स (मालविनास) युद्ध के ठीक चार साल बाद खेला जा रहा था। मुकाबले में डिएगो माराडोना ने फुटबॉल इतिहास के दो सबसे मशहूर गोल किए। पहले गोल को 'हैंड ऑफ गॉड' कहा गया।
माराडोना ने अपने हाथ से गेंद को इंग्लिश गोलकीपर पीटर शिल्टन के ऊपर से नेट में पहुंचाया। रेफरी इस की इस पर नजर नहीं पड़ी। कुछ मिनटों बाद ही माराडोना ने इंग्लैंड की आधी टीम को छकाते हुए और शानदार ड्रिबलिंग करते हुए एक यादगार दूसरा गोल किया। इसे आज 'सदी का गोल' (Goal of the Century) कहा जाता है।
अर्जेंटीना के लोगों के लिए वह 'हैंड ऑफ गॉड' कोई धोखाधड़ी नहीं थी। यह एक शक्तिशाली और बड़े देश के खिलाफ कमजोर की जीत थी। माराडोना ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया कि यह जीत उन्हें युद्ध में मारे गए अर्जेंटीना के सैनिकों का सीधा बदला लेने जैसी महसूस हुई।

1998 विश्व कप: अर्जेंटीना पेनल्टी शूटआउट में जीता
1998 के राउंड ऑफ 16 में अर्जेंटीन-इंग्लैंड एक बार फिर टकराईं। इस मैच में विवादित घटना हुई। अपने पहले ही विश्व कप में शानदार फॉर्म में चल रहे इंग्लैंड के सुपरस्टार डेविड बेकहम को अर्जेंटीना के डिएगो सिमियोन को हल्की सी लात मारने के कारण रेड कार्ड दिखाया गया। ऐसे में उन्हें बाहर कर दिया गया।
इंग्लैंड ने 10 खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए मैच 2-2 से ड्रॉ कराया। पॉल इंस और डेविड बैटी के पेनल्टी चूकने के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में माइकल ओवेन का एक करिश्माई गोल भी देखने को मिला। पेनल्टी शूटआउट में पॉल इंस और डेविड बैटी के चूकने के कारण इंग्लैंड को हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड में हार के लिए बेकहम को ही दोषी ठहराया गया।
2002 विश्व कप: प्रायश्चित करने का मौका मिला
2002 विश्व कप के ग्रुप स्टेज में डेविड बेकहम को अपने उस पुराने दाग को धोने और प्रायश्चित करने का मौका मिला। मैच के दौरान जब अर्जेंटीना के मौरिसियो पोचेटिनो ने माइकल ओवेन को पेनल्टी बॉक्स में गिरा दिया। ऐसे में इंग्लैंड को पेनल्टी मिली। डेविड बेकहम ने बिना कोई गलती किए इस स्पॉट-किक को सीधे गोल में तब्दील कर दिया। यह मैच का इकलौता गोल था। इंग्लैंड ने 1-0 से यह मैच जीता। बेकहम का यह गोल 1998 के बाद मिले उन सभी तानों का जवाब था।