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    पेट के हिस्से से अन्नप्रणाली बनाकर गले में जोड़ी, ढाई साल में पहली बार मुंह से भोजन निगल सका बच्चा

    By Shatrughna SharmaEdited By: Naveen Kumar
    Updated: Mon, 03 Aug 2026 08:10 PM (GMT+05:30)

    अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में ढाई साल के बच्चे मंतव्य की दुर्लभ प्योअर इसोफेजियल एट्रेसिया बीमारी का सफल ऑपरेशन किया गया। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. ढाई साल के बच्चे की दुर्लभ अन्न नली बीमारी का इलाज।

    2. सिविल अस्पताल अहमदाबाद में सफल गैस्ट्रोस्टोमी सर्जरी हुई।

    3. बच्चा जन्म के बाद पहली बार मुंह से भोजन कर सका।

    शत्रुघ्‍न शर्मा, अहमदाबाद। सिविल अस्‍पताल अहमदाबाद में गत दिनों ढाई वर्ष का ऐसा बच्‍चा भर्ती हुआ जिसको अन्‍न नली नहीं थी, उसको जन्‍मजात प्‍योर ईसोफेजियल ऐट्रेसिया की एक दुर्लभ बीमारी थी। चिकित्‍सकों की टीम ने गले के भाग से रास्‍ता बनाकर गेस्‍ट्रोस्‍टोमी सर्जरी कर गले से पेट तक आहार नली लगा दी। डॉ राकेश जोशी ने बताया कि ढाई वर्ष में यह बच्‍चा पहली बार अपने मुंह से खाना खा सका। पुत्र को पहली बार मुंह से आहार लेते देख पिता की आंखें भर आई।

    अहमदाबाद के साणंद में एग्रो कंपनी में नौकरी करने वाले शैलेष भाई पटेल के ढाई वर्षीय पुत्र मंतव्‍य का जन्‍म प्‍योर ईसोफेजियल ऐट्रेसिया की एक दुर्लभ बीमारी के साथ हुआ था। यह बीमारी ढाई से तीन हजार में से एक बच्‍चे को होती है इसमें आहार नलिका का मुंह व पेट का हिस्‍सा एक दूसरे से अलग व दूर होता है।

    सिविल अस्‍पताल के अधीक्षक डॉ राकेश जोशी बताते हैं कि बालक को गेस्ट्रिक पुल अप सर्जरी के माध्‍यम से ही ठीक किया जा सकता था इसलिए बाल सर्जरी विभाग के डॉ जयश्रीराम, ऐनेस्‍थेसिया विभाग की हेड डॉ अदिति एवं डॉ सोनल भालवट की टीम ने गले में आहार नलिका का मार्ग बनाने के लिए ईसोफेगोस्‍टॉमी सजंरी कर गले से आहार न‍ली को पेट की आहार नली को जोडने के लिए गेस्‍ट्रोस्‍टोमी सर्जरी की।

    यह बालक के पेट से अन्‍न नली बनाने की एक जटिल सर्जरी थी। सिविल अस्‍पताल की टीम ने प्‍योर ईसोफेजियल ऐट्रेसिया जैसी दुर्लभ बीमारी का यह सातवां सफल ऑपरेशन किया है। बाल सर्जरी विभाग के हैड डॉ जोशी ने बताया कि इस तरह के ऑपरेशन में अनुभवी टीम के साथ तकनीकी कुशलता भी आवश्‍यक होती है। बालक के आहार व पोषण के लिए सही समय पर ऑपरेशन जरुरी था।

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