अहमदाबाद में नाबालिग लड़कियों की तस्करी और शोषण का मामला, एक बांग्लादेशी समेत दो को सजा
अहमदाबाद में पॉक्सो विशेष कोर्ट ने नाबालिग लड़कियों की मानव तस्करी और यौन शोषण के मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराया है। ...और पढ़ें

पॉक्सो एक्ट के मामले में एक बांग्लादेशी समेत दो को सजा।
HighLights
अहमदाबाद में नाबालिग लड़कियों की मानव तस्करी पर दो दोषी।
मुख्य आरोपी सागर मंडल को 20 वर्ष की सजा सुनाई गई।
बांग्लादेशी मोहम्मद फारुख को आजीवन कारावास की सजा।
राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। पॉक्सो विशेष कोर्ट ने एक बांग्लोदशी मूल के व्यक्ति समेत दो आरोपियों को नाबालिग लड़कियों को देह व्यापार के लिए मजबूर करने, मानव व्यापार तथा यौन शोषण के मामले में दोषी मानते हुए मुख्य आरोपी को बीस वर्ष तथा उसके साथी को 14 वर्ष की सजा सुनाई है।
अहमदाबाद के चंडोला तालाब के आसपास अवैध तरीके से बसे बांग्लोदेशियों को पुलिस व प्रशासन ने हटा दिया है लेकिन बांग्लादेश व पश्चिम बंगाल से काम दिलाने के बहाने नाबालिग लड़कियों को गुजरात लाकर उनका यौन शोषण करने व देह व्यापार के लिए मजबूर करने के मामले में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट की स्पेशल जज नीता वासवेलिया एक बांग्लोदशी को आजीवन कारावास जबकि मुख्य आरोपी को 20 वर्ष की सजा तथा 20 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है।
अहमदाबाद अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक एस जे जाडेजा तथा आई एन गोसारा ने नाबालिग लड़कियों को बांग्लादेश व पश्चिम बंगाल से लाकर उनका यौन शोषण करने व उन्हें देह व्यापार में धकेलने के मामले में मूल पश्चिम बंगाल के सागर मिलान मंडल को वस्त्राल अहमदाबाद से तथा मूल बांग्लोदेशी मौहम्मद फारुख उर्फ अब्दुल करीम मंडल को ओढव अहमदाबाद को अगस्त 2024 में गिरफ्तार किया था।
एक पंद्रह वर्ष की युवती तथा एक 17 वर्ष की युवती की शिकायत पर पुलिस ने यह कार्यवाही की थी। इनमें एक पीडिता को सागर मंडल ने अपनी पत्नी बनाकर रखा तथा बाद में उसे देह व्यापार में धकेल दिया। पीड़िता मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है।
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कोर्ट ने उसे मुख्य अपराधी मानते हुए 20 वर्ष की सजा सुनाई तथा 20 हजार रु के जुर्माने की सजा दी। अपनी शिकायत में पीड़िता ने बताया था कि उनहें काम दिलाने के बहाने यहां लाकर देह व्यापार में धकेल दिया। आरोपियों ने उनका यौन शोषण भी किया।
पॉक्सो कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो एक्ट तथा अवैध मानव व्यापार की विविध धाराओं के तहत सागर मंडल को बीस बीस वर्ष की सजा तथा जुर्माना लगाया है। जबकि मौहम्मद फारुख को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।