गुजरात: रेलवे में ओवरहेड इक्विपमेंट की ड्रॉन से निगरानी, AI से हवाई निरीक्षण तकनीक का विकास
अहमदाबाद रेल मंडल ने ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) की जांच के लिए ड्रोन से हवाई निरीक्षण का सफल परीक्षण किया है। यह नई तकनीक रेलवे में सुरक्षित रखरखाव को ब ...और पढ़ें

रेलवे में ओवरहेड इक्विपमेंट की ड्रॉन से निगरानी। (फोटो- पीआरओ अहमदाबाद)
HighLights
अहमदाबाद मंडल ने ओएचई जांच के लिए ड्रोन का सफल परीक्षण किया।
ड्रोन से पटरियों पर गंभीर खामियों का पता चला, सुरक्षा बढ़ी।
यह तकनीक भविष्य में एआई-आधारित विश्लेषण के लिए डेटा देगी।
शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। अहमदाबाद रेल मंडल ने रेल पटरियों पर ओवर हेड इक्विपमेंट ओएचई की जांच के लिए ड्रॉन से हवाई निरीक्षण का सफल परीक्षण किया है। भारतीय रेलवे में सुरक्षित रखरखाव की दिशा में इसे बडी उपलब्धि माना जा रहा है। भविष्य में रेल यातायात में बिना बाधा उत्पन्न किये हाई रिजोल्युशन कैमरों और जियो टेगिंग तकनीक युक्त ड्रॉन से हवाई निरीक्षण से गंभीर खामियों का पता लगाकर उनको दूर किया जा सकेगा।
ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) की जांच के लिए ड्रोन से हवाई निरीक्षण का सफल परीक्षण करने में पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल को सफलता मिली है। जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार भारतीय रेल में नई तकनीक के जरिए सुरक्षित रखरखाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रेलवे बोर्ड से अप्रैल 2026 में मंजूरी मिलने के बाद पश्चिम रेलवे इस तकनीक का उपयोग शुरू करने वाले प्रमुख जोन में शामिल हो गया है। गत 8 जून को इस सफल परीक्षण के बाद पारंपरिक मैनुअल जांच के स्थान पर अब मंडल में हाई रिजोल्युशन कैमरों और जियो टेगिंग तकनीक युक्त ड्रॉन से ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) का हवाई निरीक्षण किया जाने लगा है।
ड्रोन से ओएचई का हवाई निरीक्षण
अहमदाबाद मंडल की टीम ने मास्ट संख्या 493-494 के बीच ओएचई का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मिली हर खराबी की तस्वीर ली गई, उसे जीपीएस लोकेशन के साथ दर्ज किया गया। खामी की गंभीरता का आकलन करते हुए जरूरी मरम्मत के लिए प्राथमिकता के आधार पर संबंधित विभाग को यह भेजा गया।
यह निरीक्षण (रिसर्च, डिजाइन एंड स्टेंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन) आरडीएसओ के नए दिशा-निर्देश के अनुसार तथा (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) डीजीसीए से मान्यता प्राप्त ड्रोन के माध्यम से जीपीएस/जीएनएसएस, जियो-टैग्ड तस्वीरें और थर्मल स्कैनिंग किया गया।
परीक्षण में मिली गंभीर खामियां
परीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। इनमें इंसुलेटरों पर फ्लैश मार्क, कैंटिलीवर पर लटकी बाहरी सामग्री, पोर्टल संरचनाओं और कैंटिलीवर पर बने पक्षियों के घोंसले तथा वहां बैठे पक्षी शामिल थे। कैटेनरी स्ट्रैंड में नुकसान जैसी गंभीर खामी मिलीं, सामान्य जांच में इन्हें पहचानना मुश्किल होता है। ड्रोन से ली गई साफ और जियो-टैग्ड तस्वीरों की मदद से इनका सही स्थान पता चला। इससे समय पर मरम्मत के साथ भविष्य में ओएचई ट्रिपिंग, बिजली आपूर्ति में रुकावट जैसी समस्याओं को रोका जा सकेगा।
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स्मार्ट जांच से रेलवे होगा सुरक्षित
25 केवी एसी बिजली देने वाली ओएचई प्रणाली भारतीय रेल के विद्युतीकृत नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इंसुलेटर, कंडक्टर, क्लैंप या अन्य उपकरणों में खराबी आने से ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता है और सुरक्षा संबंधी खतरे भी पैदा हो सकते हैं। पारंपरिक जांच के लिए ट्रैक ब्लॉक लेना पड़ता है और कर्मचारियों को हाई वोल्टेज उपकरणों के पास काम करना पड़ता है।
एआई आधारित विश्लेषण की तैयारी
पश्चिम रेलवे इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रहा है। भविष्य में यही डेटा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित विश्लेषण के लिए उपयोग किया जाएगा। इससे खराबियों का पहले से पता लगाया जा सकेगा और संभावित जोखिमों को समय रहते रोका जा सकेगा।