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    गुजरात में शराब सेवन के 80 मामले में एक महीने में रफा दफा, 40 केस आरोप पत्र देने के साथ ही खारिज

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 08:18 PM (IST)

    राजकोट में शराब सेवन के 80 मामले एफएसएल रिपोर्ट के अभाव में खारिज कर दिए गए, जिनमें से 40 तो आरोपपत्र दाखिल होते ही रद हो गए। ...और पढ़ें

    शराब सेवन के 80 मामले में एक महीने में रफा दफा।

    शराब सेवन के 80 मामले में एक महीने में रफा दफा।

    HighLights

    1. राजकोट में शराब के 80 मामले एफएसएल रिपोर्ट के बिना खारिज।

    2. न्यायालय ने रक्त नमूने में शराब की मात्रा पर सवाल उठाए।

    3. पुलिस की लापरवाही से आरोपपत्र दाखिल होते ही केस रद्द।

    राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। शराबबंदी वाले गुजरात राज्‍य के राजकोट में शराब सेवन के 80 मामलों को न्‍यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एफएसएल रिपोर्ट के बिना यह कैसे मान लिया जाए कि आरोपी के ब्‍लड सेम्‍पल में अल्‍कोहल की वैधानिक मात्रा से अधिक है। इन 80 में से 40 केस तो आरोपपत्र प्रस्‍तुत करने वाले दिन ही खारिज हो गये।

    राजकोट के प्रिंसिपल सिविल जज वी के बंसल ने बीते एक माह में शराब सेवन के 80 मामलों को खारिज कर दिया। पुलिस ने आरोपपत्र के साथ फोरेंसिक साइन्‍स लेबोरेट्री की रिपोर्ट संलग्‍न नहीं की।

    न्‍यायाधीश ने कहा क‍ि एफएसएल रिपोर्ट के बिना यह कैसे मान लिया जाए कि आरोपी ने अल्‍कोहल की वैधानिक मात्रा से अधिक सेवन की है। शराब सेवन करने के 80 मामलों में से 40 केस तो आरोपपत्र प्रस्‍तुत करने के साथ ही खारिज कर दिये गये।

    सरकारी वकील जे वी जोशी ने कहा है कि पुलिस ने एफएसएल रिपोर्ट के बिना ही आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्‍तुत कर दिये इसके कारण न्‍यायालय ने इन मामलों में संज्ञान ही नहीं लिया, ऐसे मामलों में एफएसएल रिपोर्ट आवश्‍यक है।

    पुलिस अधिकांश वक्‍त सबूत जुटाने व कानूनी प्रक्रिया की पालना में बिताती रही और मामलों के खारिज होने में यही सबसे बड़ा कारण रहा कि आवश्‍यक एफएसएल रिपोर्ट ही आरोपपत्र में संलग्‍न नहीं की गई। नियमानुसार ब्‍लड सेंपल की जांच 7 दिन में पूरी कर रिपोर्ट सौंपी जानी चाहिए। न्‍यायालय ने ब्‍लड सेंपल के गांधीनगर एफएसएल लैब में सुरक्षित होने अथवा उसकी समय पर जांच पर सवाल उठाए हैं।

     

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