गुजरात के 100 घरों वाले गांव की कमाल की कहानी, 4 साल में तैयार हुए 17 FIDE-रेटेड शतरंज खिलाड़ी
गुजरात के महीसागर जिले का रतुसिंह ना मुवाडा गांव 4 साल में 17 FIDE-रेटेड शतरंज खिलाड़ी तैयार कर मिसाल बन गया है। ...और पढ़ें

महीसागर के छोटे गांव ने रचा इतिहास

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। सपने अक्सर वहीं सच होते हैं जहां कोई उम्मीद नहीं करता। गुजरात के महीसागर जिले का 100 घरों वाला गांव रतुसिंह ना मुवाडा शतरंज की दुनिया में मिसाल बन गया है। यहां न महंगी अकादमी है, न बड़ी बिल्डिंग। सिर्फ एक शतरंज की बिसात और एक टीचर का जज्बा है।
इसका नतीजा यह निकला कि सिर्फ 4 साल में गांव ने 17 FIDE-रेटेड खिलाड़ी तैयार कर दिए हैं। गांव के छोटे चैंपियंस, जिनमें ज्यादातर खेत मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों के बच्चे हैं, अब तक 120 ट्रॉफ्री और 179 मेडल जीत चुके हैं।
एक मैथ्स टीचर का सपना
इस क्रांति के पीछे हैं 45 साल के मैथ्स टीचर संदीप उपाध्याय। वे सरकारी स्कूल बाल वाटिका में पढ़ाते हैं। 5 कमरों वाला जर्जर स्कूल, जहां 200 में से कई बच्चे खुले में पढ़ते हैं, वहीं से 2021 में उन्होंने शतरंज मुहिम शुरू की। उनका लक्ष्य था 50 ग्रैंडमास्टर और 10 वर्ल्ड चैंपियन बनाना।
FIDE रेटिंग इंटरनेशनल चेस फ़ेडरेशन द्वारा दी जाने वाली आधिकारिक स्किल रेटिंग है, जो 'एलो सिस्टम' से तय होती है। संदीप उपाध्याय का कहना है कि मैं ऐसी जगह बनाना चाहता हूं जहां पूरे भारत के गांवों से आए टैलेंटेड बच्चे, जिनके पास पैसे नहीं हैं, रहकर वर्ल्ड-क्लास कोचिंग ले सकें। शतरंज के साथ GPSC, UPSC की तैयारी भी हो।
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नतीजे चौंकाने वाले
छात्रों ने 24 स्टेट टूर्नामेंट खेले, 22 में टॉप-3 में जगह बनाई पिछले दिसंबर में गांधीनगर के स्टूडेंट्स चेस फेस्टिवल में बाल वाटिका को बेस्ट इंस्टीट्यूट चुना गया। गांव के 21 बच्चों को सरकारी डिस्ट्रिक्ट लेवल स्पोर्ट्स स्कूल में फ्री शिक्षा और कोचिंग मिली।
ग्रैंडमास्टर अंकित राजपरा हर महीने यहां आकर बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं। संदीप उपाध्याय अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा बच्चों की एंट्री फीस, यात्रा, किताबों और शतरंज किट पर खर्च करते हैं।
खेत मजदूर की बेटी का बड़ा सपना
उनकी सबसे होनहार स्टूडेंट 8वीं की दिव्या चौहान हैं। खेत मजदूर की बेटी दिव्या 2 साल तक तालुका टूर्नामेंट में अजेय रहीं और स्टेट विमेंस रैपिड चैंपियनशिप में तीसरे स्थान पर रहीं। अब वे गुजरात के स्पोर्ट्स स्कूल में ट्रेनिंग ले रही हैं।
दिव्या का कहना है कि मेरा सपना ग्रैंडमास्टर बनकर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। मैं चाहती हूं गांवों की लड़कियां भी मानें कि वे कुछ भी हासिल कर सकती हैं।
प्रशासन ने स्कूल बनाने की योजना शुरू की
सितंबर 2025 में गांव की कहानी सामने आने के बाद महीसागर प्रशासन ने नया स्कूल बनाने की योजना शुरू की। नया स्कूल मौजूदा बिल्डिंग से 8.5 गुना बड़ा होगा और उसमें खास शतरंज हॉल भी होगा।