शिक्षा मंत्री रिवाबा जाडेजा की बड़ी पहल, ‘निपुण गुजरात’ में बालवाटिका से कक्षा 5 तक बच्चों का होगा रियल-टाइम आकलन
गुजरात सरकार ने 'निपुण गुजरात' कार्यक्रम के तहत बालवाटिका से कक्षा 5 तक के बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक क्षमताओं का आकलन करने के लिए एक विशेष सर्वे शुर ...और पढ़ें

शिक्षा मंत्री रिवाबा जाडेजा की पहल
HighLights
'निपुण गुजरात' के तहत बालवाटिका से कक्षा 5 तक का सर्वे।
बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) विकास पर जोर।
कमजोर छात्रों के लिए विशेष उपचारात्मक शिक्षण योजना बनेगी।
राजेन्द्रसिंह परमार, गांधीनगर: गुजरात सरकार ने राज्य के प्राथमिक शिक्षा ढांचे को अधिक मजबूत करने और बच्चों में बुनियादी साक्षरता व संख्या ज्ञान (FLN) के विकास के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है।
'निपुण गुजरात' कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य भर के सरकारी स्कूलों में बालवाटिका से लेकर कक्षा 5 तक के सभी छात्रों की वास्तविक शैक्षणिक क्षमताओं का आकलन करने के लिए एक विशेष सर्वे आयोजित किया जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी कदम के बारे में प्रदेश की शिक्षा मंत्री रीवाबा जाड़ेजा ने गुजराती जागरण को विस्तार से जानकारी साझा की है।
शिक्षकों द्वारा मूल्यांकन और तकनीक का उपयोग
शिक्षा मंत्री के अनुसार, इस सर्वे के पहले चरण का कार्य संबंधित स्कूलों के शिक्षकों और प्राचार्यों द्वारा ही प्रत्यक्ष रूप से पूरा किया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) द्वारा इसकी डिजिटल रूप से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी, और प्रत्येक बच्चे का डेटा सीधे ऐप और पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, एकत्रित किए गए डेटा की सटीकता को प्रमाणित करने के लिए सर्वे के एक सप्ताह बाद एक स्वतंत्र तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) के माध्यम से भी वैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जाएगा। इस डेटा सत्यापन का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों पर अविश्वास करना नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर सही और सटीक नीतियां तथा संसाधन आवंटित करना है।
कमजोर छात्रों के लिए बनेगा स्पेशल 'रेमेडियल एक्शन प्लान'
यह सर्वे केवल एक औपचारिक रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा। मूल्यांकन के परिणामों का विश्लेषण करने के बाद जिन बच्चों का शैक्षणिक स्तर उनकी उम्र या कक्षा के अनुकूल नहीं पाया जाएगा, उनके लिए राज्य, जिला, स्कूल और व्यक्तिगत स्तर पर एक विशेष 'रेमेडियल एक्शन प्लान' (उपचारात्मक शिक्षण) तैयार किया जाएगा।
रीवाबा जाड़ेजा ने स्पष्ट किया कि इस अभ्यास का उद्देश्य शिक्षकों का मूल्यांकन करना नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों के अनुरूप बच्चों के वास्तविक 'लर्निंग आउटकम्स' (सीखने के परिणाम) की पहचान करना है।
शून्य अनुपस्थिति और सामूहिक भागीदारी पर जोर
इस अभियान के तहत शत-प्रतिशत बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (CTS) और U-DISE के माध्यम से की जाएगी। सर्वे के दिन अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के लिए अलग से पूरक मूल्यांकन का प्रावधान किया गया है।
सरकार का दृष्टिकोण किसी भी कमी के लिए दोषारोपण करने के बजाय अभिभावकों, शिक्षकों और प्रशासन के साथ मिलकर एक सुधारात्मक वातावरण तैयार करना है।
बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को 'निपुण स्कूल' के खिताब से नवाजा जाएगा, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति बनाई जाएगी।
शिक्षकों का समय शिक्षण कार्य में अधिक लग सके, इसके लिए उनके गैर-शैक्षणिक दायित्वों को डिजिटल बनाकर कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
गुजरात सरकार का यह स्पष्ट लक्ष्य है कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 तक राज्य के सभी प्राथमिक छात्र बुनियादी साक्षरता और गणितीय योग्यता हासिल कर लें।
इस जमीनी स्तर के सर्वे से आने वाले समय में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार होने की पूरी उम्मीद है।