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    'युद्ध के विनाश के बाद भी ब्रिटेन और जापान ने विकास कर दिखाया', बोले डॉ. मनमोहन वैद्य

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 09:47 PM (IST)

    आरएसएस के पूर्व सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि भारत का विकास पश्चिमी विचारों के बजाय अध्यात्म आधारित होना चाहिए। ...और पढ़ें

    आरएसएस के पूर्व सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य

    आरएसएस के पूर्व सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य 

    HighLights

    1. भारत का विकास अध्यात्म आधारित होने पर ही संभव

    2. पश्चिमी संस्कृति से भारत का विकास नहीं हो सकता

    3. सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण में गांधीजी ने समाज सहयोग सुझाया

    राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। आरएसएस के पूर्व सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा है कि द्वितीय विश्वयुद्ध में भारी नुकसान के बावजूद जर्मनी, जापान और ब्रिटेन फिर से खड़े हो गए, लेकिन भारत वैसा विकास नहीं कर पाया।

    इंडिया का विचार पश्चिम आधारित होने के चलते भारत पिछड़ गया। भारत का विकास अध्यात्म आधारित होगा, तभी प्रगति संभव है। पश्चिमी संस्कृति से भारत विकास नहीं कर सकता है।

    विकसित भारत @2047 युवा, नवाचार एवं सतत विकास पर रंग रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित सम्मेलन में डॉ. वैद्य ने कहा कि भारत का विचार मूल्य आधारित व्यापार करना रहा है।

    भारत का विकास अध्यात्म आधारित होने पर ही संभव

    आज भी भारत में छोटे व्यापारी बच्चों के लिए दिए गए दूध का पैसा नहीं लेते, लेकिन होटल में इसकी भारी कीमत वसूली जाती है। समाज से हासिल कर समाज को लौटाना ही भारतीयता है, लेकिन कुछ लोग ऐसा नहीं करके अमीर बन रहे हैं।

    डॉ. वैद्य ने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल, कन्हैयालाल मुंशी, डा. राजेंद्र प्रसाद एवं महात्मा गांधी सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करना चाहते थे। कन्हैयालाल मुंशी ने इसका मसौदा तैयार कर गांधीजी को भेजा।

    पश्चिमी संस्कृति से भारत का विकास नहीं हो सकता

    गांधीजी ने सरकारी धन के बजाय समाज के सहयोग से मंदिर का पुनर्निर्माण कराने का सुझाव दिया। पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत विरोधी नहीं थे, लेकिन सोमनाथ मंदिर को लेकर उनकी अवधारणा अलग थी।

    डॉवैद्य ने कहा कि भारत दुनिया की 33 प्रतिशत आर्थिकी का हिस्सेदार था। देश के हर घर में उत्पादन होता था और पुरुषों के साथ महिलाएं भी इसमें भागीदारी करती थीं।

    अंग्रेजों के आने के बाद पुरुषों के घर छोड़कर बाहर कमाने जाने की परंपरा शुरू हुई, क्योंकि अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल दिया गया था। सम्मेलन में गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रद्युम्न वाजा ने देश के सांस्कृतिक उत्थान की चर्चा करते हुए विकसित भारत की रूपरेखा पेश की।