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    जमीन खाली करें वरना... यूसुफ पठान के जमीन विवाद मामले में हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 11:28 PM (IST)

    वडोदरा में जमीन विवाद को लेकर पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जहां गुजरात हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ...और पढ़ें

    गुजरात हाई कोर्ट ने यूसुफ पठान को लगाई फटकार

    गुजरात हाई कोर्ट ने यूसुफ पठान को लगाई फटकार

    HighLights

    1. गुजरात हाई कोर्ट ने यूसुफ पठान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।

    2. बिना कानूनी आवंटन जमीन पर कब्जे को लेकर कोर्ट ने सवाल उठाए।

    3. कोर्ट ने किराया चुकाने और जमीन खाली करने का आदेश दिया।

    डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान से पूछा है कि जब राज्य सरकार ने भूखंड आवंटन का प्रस्ताव खारिज कर दिया था, तो उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कैसे कर लिया।

    अदालत ने टिप्पणी की कि बिना आवंटन और भुगतान के किसी सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करना स्वीकार्य नहीं है।

    मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कथित भूखंड पर कब्जा और उसके उपयोग के लिए अपीलकर्ता को हर्जाना चुकाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की है।

    क्या है मामला?

    मामला यूसुफ पठान के घर के बगल में स्थित 978 वर्गमीटर के सरकारी भूखंड का है। मूल रूप से वडोदरा के रहने वाले यूसुफ पठान वर्तमान में बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं।

    सुनवाई के दौरान उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शालिन मेहता से मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह केवल जमीन आवंटन का एक प्रस्ताव था, जिसे राज्य सरकार के पास भेजा गया था और बाद में सरकार ने उसे अस्वीकार कर दिया। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भूखंड पर कब्जा कैसे किया गया।

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    पीठ ने पूछा कि जब न तो आवंटन हुआ और न ही आवंटन राशि का भुगतान किया गया, तब उनके मुवक्किल ने जमीन का कब्जा किस आधार पर लिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकार का कार्य कोई भी व्यक्ति नहीं कर सकता।

    यह सुनवाई यूसुफ पठान की उस अपील पर हो रही थी, जिसमें उन्होंने अगस्त 2025 में एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी है। उस आदेश में उन्हें सरकारी जमीन पर 'अतिक्रमणकारी' बताया गया था।

    सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह भी पूछा कि संबंधित भूखंड खाली किया गया है या नहीं। यदि नहीं किया गया है तो उसे खाली करने के लिए कितना समय चाहिए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मामले में जुर्माना लगाया जा सकता है।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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