सूरत: सोशल मीडिया पर वायरल हुई मजदूर की ईमानदारी, बाढ़ में बही नंबर प्लेटों को निकालकर मालिकों को लौटाया
सूरत में बाढ़ के बाद, गरीब श्रमिक गौतमभाई देवीपूजक ने पानी में बही लगभग 50 नंबर प्लेटें इकट्ठा कीं। विवेक भवानिया की मदद से सोशल मीडिया के जरिए वे आरस ...और पढ़ें
-1783761104611_m.webp)
सूरत में बाढ़ के बाद गरीब श्रमिक ने लौटाईं 50 नंबर प्लेटें (फोटो- जागरण)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, सूरत। सूरत में हाल ही में हुई भारी बारिश और जलभराव के बाद जहां लोग अपने डूबे हुए वाहनों और नुकसान को लेकर चिंतित थे, वहीं एक गरीब श्रमिक की ईमानदारी ने मानवता की एक नई मिसाल पेश की है।
जहांगीरपुरा इलाके में रहने वाले गौतमभाई देवीपूजक ने बाढ़ के पानी में बहकर आई करीब 50 वाहनों की नंबर प्लेटों को इकट्ठा किया और अब वे उन्हें उनके असली मालिकों को सुरक्षित लौटा रहे हैं।
मुसीबत में बने मददगार
सूरत में बारिश के दौरान सड़कों पर भारी पानी भर गया था, जिससे कई गाड़ियों की नंबर प्लेट टूटकर पानी में गिर गई थीं। नंबर प्लेट खोने की वजह से वाहन चालक आरटीओ (RTO) के चक्कर काटने और भारी जुर्माने के डर से परेशान थे।
ऐसे कठिन समय में जहांगीरपुरा बॉटनिकल गार्डन के पास फुटपाथ पर रहने वाले गौतमभाई ने इन प्लेटों को कचरा समझकर फेंकने के बजाय संभालकर रखा। उन्होंने बताया कि रात करीब 11 बजे जैसे ही पानी उतरा, उन्हें एक-एक करके 40 से 50 नंबर प्लेटें मिलीं।
सोशल मीडिया ने पहुंचाई मदद
इस नेक काम में विवेक अशोकभाई भवानिया नामक एक जागरूक युवक ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विवेक की नजर जब गौतमभाई के पास रखी नंबर प्लेटों के ढेर पर पड़ी, तो उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो वायरल होने के बाद, दूर-दूर से लोग अपनी खोई हुई नंबर प्लेट की तलाश में गौतमभाई के पास पहुंचने लगे हैं।
खबरें और भी
सुरक्षा और ईमानदारी का संगम
गौतमभाई इस बात का पूरा ध्यान रख रहे हैं कि नंबर प्लेट किसी गलत व्यक्ति के हाथ न लगे, जिससे उसका कोई आपराधिक उपयोग न हो सके। वे वाहन मालिक से आरसी बुक (RC Book) मांगते हैं और पूरी तरह जांच करने के बाद ही प्लेट वापस करते हैं।
सबसे सराहनीय बात यह है कि गौतमभाई इस नेक काम के लिए किसी से कोई शुल्क नहीं ले रहे हैं। वे पूरी तरह नि:स्वार्थ भाव से यह सेवा दे रहे हैं।
विवेक भाई ने बताया कि उन्होंने गौतमभाई को विशेष रूप से समझाया था कि बिना आरसी बुक देखे किसी को प्लेट न दें, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित रहे। फुटपाथ पर गुजर-बसर करने वाले इस श्रमिक की इस संवेदनशीलता और ईमानदारी ने साबित कर दिया है कि मानवता किसी अमीरी की मोहताज नहीं होती।