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    अंबाला: 'नदी के भीतर प्लॉट बेचकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है...', अनिल विज ने हरियाणा मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 03:18 PM (IST)

    मंत्री अनिल विज ने अंबाला कैंट की टांगरी नदी में अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। ...और पढ़ें

    अनिल विज ने हरियाणा मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी (जागरण फोटो)

    अनिल विज ने हरियाणा मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी (जागरण फोटो)


    HighLights

    1. मंत्री अनिल विज ने टांगरी नदी अतिक्रमण पर मुख्य सचिव को लिखा पत्र।

    2. अवैध प्लॉटिंग और निर्माण से अंबाला में बाढ़ का खतरा बढ़ा।

    3. प्रशासन अवैध निर्माणों की पहचान कर हटाने की तैयारी में।

    जागरण संवाददाता, अंबाला। अंबाला कैंट से होकर निकलने वाली टांगरी नदी के प्लॉटिंग को लेकर प्रदेश के ऊर्जा, परिवहन और श्रम मंत्री अनिल विज ने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी पत्र लिखा है।

    इस में नदी के भीतर जमीन को अपनी निजी संपत्ति बनाकर इसकी खरीद फरोख्त कर रहे हैं। इस क्षेत्र में रिहायशी प्लाट काटे जा रहे हैं और मकान भी बनाए जा रहे हैं। इस स्थिति को विज ने भविष्य के लिए अंबाला कैंट का एक बड़ा खतरा बताया है। अब इसी को लेकर अवैध निर्माण हटाने और अतिक्रमण की पहचान करने के लिए प्रशासन कदम उठा सकता है। इसका असर टांगरी नदी किनारे बसे लोगों पर पड़ सकता है।

    यह है स्थिति

    दरअसल टांगरी नदी में पानी मानसून सीजन में पहाड़ाें से आता है। पहाड़ों में यदि अत्यधिक बरसात होती तो टांगरी नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है। बीते सीजन में इस नदी में करीब 44 हजार क्यूसिक पानी आ चुका है।

    यही कारण है कि नदी किनारे बसी कालोनियों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। दूसरी ओर नदी के किनारे बांध तो बनाया गया है, जबकि इसे पूरा करने में भी कई बार बाधाएं आईं और काम रोकना पड़ा था। साल 2023 के बाद साल 2025 में इस रिहायशी क्षेत्र में लोगों को बाढ़ जैसे हालात झेलने पड़े, जबकि इस बार एक दफा पानी रिहायशी कालोनियों में घुस चुका है।

    विज ने कहा, लोगों के जीवन को बड़ा खतरा

    मुख्य सचिव को लिखे पत्र में विज ने कहा कि टांगरी नदी के अंदर की भूमि को अपनी निजी संपत्ति बताकर उसकी खरीद-फरोख्त की जा रही है। रिहायशी प्लाट काटे जा रहे हैं और मकान भी बनाए जा रहे हैं।

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    यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति के लिए भी बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान जब टांगरी नदी में अधिक पानी आता है तो उसका प्राकृतिक रास्ता बाधित होने से पानी शहर की ओर फैल सकता है। यदि नदी क्षेत्र में इसी तरह निर्माण जारी रहा तो भविष्य में अंबाला छावनी के कई हिस्सों में बाढ़ और जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है।

    नदियों और बरसाती नालों के जलग्रहण क्षेत्र पर निर्माण होने से पानी का प्राकृतिक बहाव रुक जाता है। इसका सीधा असर शहर की जल निकासी व्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से नदी क्षेत्र का सीमांकन कराकर सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों की पहचान करने तथा उन्हें हटाने की प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।

    निर्माणों की हो सकती है जांच

    बताया जा रहा है कि मंत्री के पत्र के बाद प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की समीक्षा शुरू होने की संभावना है। राजस्व, सिंचाई, नगर परिषद और जिला प्रशासन से नदी क्षेत्र में हुई रजिस्ट्रियों, निर्माण गतिविधियों और अतिक्रमण की रिपोर्ट तलब की जा सकती है।

    यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो अवैध प्लाटिंग करने वाले कालोनाइजरों, संबंधित भू-माफिया तथा नियमों के विपरीत रजिस्ट्री कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

    समय-समय पर उठा है मुद्दा

    टांगरी नदी के भीतर अतिक्रमण, अवैध प्लॉटिंग और निर्माण का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। बरसात के मौसम में जलभराव की घटनाओं के बाद स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग करते रहे हैं। प्रशासन ने पहले भी कई स्थानों पर कार्रवाई की, लेकिन लगातार नए निर्माण होने के आरोप लगते रहे हैं।

    आने वाले दिनों में टांगरी नदी क्षेत्र का व्यापक सर्वे कराया जा सकता है। अवैध कालोनियों, निर्माणाधीन मकानों और संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच के साथ-साथ नदी के मूल स्वरूप को बहाल करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की संभावना है।