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    आधे-अधूरी हालत में नहीं कटेगा सफर! RAC वाले यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने कर दिया बड़ा एलान

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 01:35 PM (IST)

    भारतीय रेलवे ने आरएसी यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए वातानुकूलित श्रेणियों में पूरा बिस्तर उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया है। ...और पढ़ें

    भारती रेलवे बोर्ड का फैसला, आरएसी यात्रियों को भी मिलेगा पूरा बिस्तर (जागरण फोटो)

    भारती रेलवे बोर्ड का फैसला, आरएसी यात्रियों को भी मिलेगा पूरा बिस्तर (जागरण फोटो)

    HighLights

    1. आरएसी यात्रियों को अब मिलेगा पूरा बिस्तर।

    2. रेलवे बोर्ड ने शिकायतों के बाद लिया यह फैसला।

    3. लाखों यात्रियों को राहत, बढ़ेगी रेलवे की जवाबदेही।

    दीपक बहल, अंबाला। भारतीय रेलवे ने वातानुकूलित श्रेणी में यात्रा करने वाले आरएसी (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब उन्हें भी अन्य पुष्ट आरक्षण वाले यात्रियों की तरह पूरा बिस्तर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

    रेलवे बोर्ड ने देश के सभी रेलवे मंडलों और जोनों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वातानुकूलित कुर्सीयान (एसी चेयर कार) को छोड़कर सभी वातानुकूलित श्रेणियों में यात्रा करने वाले प्रत्येक आरएसी यात्री को चादर, कंबल, तकिया और तौलिया सहित पूरा बिस्तर उपलब्ध कराया जाए।

    रेलवे बोर्ड ने यह आदेश यात्रियों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जारी किया है। कई मामलों में सामने आया था कि आरएसी टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को ट्रेन में बिस्तर नहीं दिया जाता था या आधा-अधूरा सामान देकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती थी।

    इस पर गंभीरता दिखाते हुए रेलवे बोर्ड ने चार अगस्त 2026 को नया परिपत्र जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    लगातार मिल रही थीं शिकायतें

    भारतीय रेलवे में प्रथम वातानुकूलित, द्वितीय वातानुकूलित, तृतीय वातानुकूलित तथा तृतीय वातानुकूलित अर्थव्यवस्था श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों से किराये के साथ बिस्तर की सुविधा का शुल्क भी लिया जाता है।

    इसके बावजूद जिन यात्रियों को आरएसी टिकट मिलता है, उन्हें अक्सर ट्रेन परिचारकों द्वारा यह कहकर बिस्तर देने से मना कर दिया जाता था कि सीट साझा होने के कारण अलग से बिस्तर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।

    यात्रियों ने इस व्यवस्था पर लगातार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जब उनसे पूरी राशि ली जा रही है तो सुविधाओं में भेदभाव क्यों किया जा रहा है। यही कारण है किरेल सहायता पोर्टल, यात्री शिकायत प्रणाली और अन्य माध्यमों से बड़ी संख्या में शिकायतें रेलवे बोर्ड तक पहुंच रही थीं।

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    पुराने आदेशों के बावजूद नहीं हुआ पालन

    रेलवे बोर्ड इससे पहले भी वर्ष 2016, 2017 और 2023 में स्पष्ट निर्देश जारी कर चुका था कि आरएसी यात्रियों को भी अन्य यात्रियों की तरह पूरा बिस्तर दिया जाए। लेकिन कई ट्रेनों में इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा था।

    समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अनेक स्थानों पर कर्मचारी पुराने निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

    इसी स्थिति को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने एक बार फिर सभी जोनों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि आदेशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए और संबंधित अधिकारियों तथा कर्मचारियों को तत्काल इसकी जानकारी दी जाए।

    रेलवे बोर्ड ने क्या कहा

    रेलवे बोर्ड के पर्यावरण एवं स्वच्छता प्रबंधन निदेशक द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि वातानुकूलित कुर्सीयान को छोड़कर सभी वातानुकूलित श्रेणियों में यात्रा करने वाले प्रत्येक वास्तविक आरएसी यात्री को अन्य यात्रियों के समान पूरा बिस्तर उपलब्ध कराया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या आदेशों की अवहेलना स्वीकार नहीं की जाएगी।

    सभी अधिकारियों को भेजे गए निर्देश

    आदेश की प्रतिलिपि सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों, मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधकों, मुख्य यांत्रिक अभियंताओं तथा भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम सहित रेलवे बोर्ड के विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है, ताकि पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।

    यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ

    इस फैसले के बाद आरएसी टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अब चादर, तकिया, कंबल और तौलिया पाने के लिए बहस नहीं करनी पड़ेगी। यदि किसी ट्रेन में कर्मचारी बिस्तर देने से इनकार करता है तो यात्री तत्काल शिकायत दर्ज करा सकेंगे और संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय होगी।

    रेलवे के इस निर्णय से लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे सफर के दौरान अब आरएसी यात्रियों को भी वही सुविधाएं मिलेंगी, जो पुष्ट आरक्षण वाले यात्रियों को उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे यात्रियों की असुविधा कम होगी और रेलवे की सेवा गुणवत्ता में भी सुधार आने की संभावना है।