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    बहादुरगढ़ नगर परिषद में 23.77 करोड़ की अनियमितता का आरोप, पूर्व विधायक ने खोली पोल

    Updated: Mon, 22 Jun 2026 09:07 AM (IST)

    पूर्व विधायक राजेंद्र जून ने बहादुरगढ़ नगर परिषद में 23.77 करोड़ रुपये की अनियमितता की साजिश का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

    कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र जून ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाए।

    कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र जून ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाए।

    HighLights

    1. पूर्व विधायक राजेंद्र जून ने 23.77 करोड़ की अनियमितता का आरोप लगाया।

    2. सफाई ठेकेदार पर लगे जुर्माने को वापस करने की साजिश का खुलासा।

    3. मुख्यमंत्री और एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत, आंदोलन की चेतावनी।

    जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़। कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र जून ने नगर परिषद में 23.77 करोड़ की अनियमितता की साजिश रचने का आरोप लगाया है। रविवार को प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक ने कहा कि सफाई कार्य में लापरवाही बरतने पर ठेकेदार पर जो जुर्माना किया गया था, उसको अब गलत तरीके से लौटाने के लिए खेल गया किया।

    मुख्यमंत्री और एंटी करप्शन ब्यूरो को भेजी गई शिकायत

    अधिकारियों को इधर से उधर करके पूरी पटकथा लिखी गई। उन्होंने इस घोटाले की शिकायत मुख्यमंत्री, शहरी स्थानीय निकाय विभाग और एंटी-करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक को साक्ष्यों सहित भेजी है। सरकार से मांग है कि नगर परिषद के बिलों, फाइलों, निविदा दस्तावेजों को तत्काल प्रभाव से सील कर सुरक्षित किया जाए ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न हो सके।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनता के 23.77 करोड़ रुपये को अवैध रूप से ठेकेदार को वापस लौटाया गया या दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

    पूर्व विधायक ने कहा कि भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस के 10 वर्षों के कार्यकाल के दौरान बहादुरगढ़ का रिकॉर्ड विकास हुआ था, जबकि भाजपा के 12 वर्षों में यह क्षेत्र हर मामले में पिछड़ गया है। उन्होंने कहा कि राजेश जून निर्दलीय चुनाव जरूर जीते, लेकिन उन्होंने चुनाव में कांग्रेस और भूपेंद्र हुड्डा के नाम का लाभ उठाया।

    चुनाव में खुद को कांग्रेसी बताते रहे, लेकिन जीतने के बाद भाजपा में शामिल होकर जनता के साथ विश्वासघात किया। राजेश जून पूरी तरह नकली कांग्रेसी साबित हुए। राजेंद्र जून ने आरोप लगाया कि वर्तमान में नगर परिषद में बड़े अधिकारियों और विधायक राजेश जून की कार्यप्रणाली विवादों में है।

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    क्या है पूरा मामला?

    उन्होंने कहा कि बहादुरगढ़ में सफाई कार्य का ठेका लेने वाली एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए 23.77 करोड़ की वैध पेनल्टी को समाप्त कर वापस लौटाने की साजिश रची जा रही है। यह जुर्माना ठेकेदार द्वारा शर्तों के अनुरूप सफाई कर्मचारी उपलब्ध न कराने, पूरे वाहन न लगाने तथा डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण कार्य में कोताही पर विधिक रूप से लगाया गया था।

    यह पहले ही सरकारी खजाने का हिस्सा बन चुका था। अक्टूबर 2025 को तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी, पालिका अभियंता और लेखा अधिकारी की संयुक्त कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में जुर्माने को सही ठहराया था। इसके बावजूद ठेकेदार के दबाव और मिलीभगत के चलते अप्रैल 2026 को फिर पांच अधिकारियों की नई कमेटी बनाई गई ताकि पूर्व के फैसले को बदला जा सके।

    जब नई कमेटी के कुछ अधिकारियों ने रिफंड फाइल पर हस्ताक्षर से मना कर दिया तो छह अधिकारियों की दोबारा कमेटी बनाई गई। जिन अधिकारियों ने दबाव नहीं माना, उनको रास्ते से हटाया गया। उनकी जगह जिन अधिकारियों को कमेटी में शामिल किया गया। इनमें से कई अधिकारियों की कार्यशैली विवादित है।

    इतना ही नहीं डंपिंग साइट पर बिना कार्य हुए नप द्वारा 20 करोड़ से ज्यादा का भुगतान भी कर दिया गया। इसमें भी नियमों का उल्लंघन है। यहां तक कि शहर में नालों की सफाई के लिए 1.63 करोड़ का टेंडर जारी करने के बावजूद सफाई का कार्य ठेकेदार के बजाय परिषद के कर्मचारियों से कराया जा रहा है। इसमें भी अनियमितता है।

    राजेंद्र जून ने कहा कि यह जनता के करोड़ों रुपयों का मामला है। जनता जानना चाहती है कि बार-बार कमेटी क्यों बदली गई, अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार क्यों दिया गया, करोड़ों की पेनेल्टी समाप्त करने के प्रयास क्यों हुए। इसलिए दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिला अध्यक्ष और कई पार्षद भी मौजूद रहे।