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    बहादुरगढ़ के गांवों में मटमैले पानी से बढ़ा बीमारियों का खतरा, विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 04:43 PM (IST)

    बरसात के बाद बहादुरगढ़ के कई गांवों में मटमैले पानी की आपूर्ति से पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ...और पढ़ें

    दूषित पानी हो रहा सप्लाई। जागरण

    दूषित पानी हो रहा सप्लाई। जागरण

    HighLights

    1. बहादुरगढ़ के गांवों में बरसात के बाद मटमैला पानी।

    2. दूषित पानी से डायरिया, टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा।

    3. विभाग की फिल्ट्रेशन व्यवस्था पर सवाल, शुद्ध पानी की मांग।

    जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़। बरसात के बाद आसपास के कई गांवों में पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों के घरों तक मिट्टी युक्त और मटमैला पानी पहुंच रहा है। स्थिति यह है कि कई जगहों पर नलों से निकलने वाला पानी पीने लायक नहीं दिख रहा, लेकिन संबंधित विभाग इस समस्या के समाधान के प्रति उदासीन बना हुआ है।

    चुनिंदा गांवों में यह परेशानी सबसे अधिक देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि विभाग की ओर से पानी की फिल्ट्रेशन व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। जल शोधन के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है, जिसका असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

    कई परिवार मजबूरी में करते हैं गंदे पानी का उपयोग

    कई परिवार मजबूरी में इसी पानी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस तरह के पानी से आरओ सिस्टम भी खराब हो रहे हैं।

    आसौदा गांव के लोगों का कहना है कि बरसात के बाद हर साल ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। शिकायतों के बावजूद विभाग की ओर से केवल औपचारिकता पूरी की जाती है। लोगों ने मांग की है कि फिल्ट्रेशन प्लांट की जांच कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

    इधर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि दूषित पानी के सेवन से डायरिया, टायफाइड, पीलिया और पेट संबंधी संक्रमण जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय रहते समस्या का समाधान आवश्यक है।

    गांवों में ज्यादा बिगड़े हालात

    ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि शहर की तुलना में गांवों में अधिक मटमैला पानी सप्लाई हो रहा है। कई स्थानों पर पानी में मिट्टी और गंदगी साफ दिखाई देती है। इससे लोगों को पीने के पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। इधर-उधर से पानी ढोना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि जलघरों में पानी की पर्याप्त सफाई नहीं हो रही। यदि फिल्ट्रेशन सही तरीके से हो रहा होता तो नलों से मटमैला पानी नहीं आता।

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    साफ पानी नहीं मिला तो बीमारियों का बढ़ेगा खतरा

    दूषित पानी के कारण कई मौसमी बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह पानी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों की मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जाए। जलघरों की फिल्ट्रेशन व्यवस्था दुरुस्त की जाए। लीकेज को लेकर भी प्रभावी कदम उठाए जाएं। पानी के नियमित सैंपल लिए जाएं, ताकि उसकी गुणवत्ता का पता चलता रहे।

    हाल ही में कई गांवों में फिल्टर प्लांट साफ करवाए गए। बरसात के मौसम को देखते हुए पानी को साफ करने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं। किसी गांव में समस्या है तो उसका समाधान किया जाएगा।
    -जितेंद्र सिंह, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग, बहादुरगढ़