न सरकारी मदद का इंतजार, न नेताओं के वादे... हरियाणा का 1300 साल पुराना बाढड़ा गांव विकास में शहरों से भी कई कदम आगे
हरियाणा का 1300 साल पुराना बाढड़ा गांव सरकारी मदद का इंतजार किए बिना, ग्रामीणों और व्यापारियों के सामूहिक प्रयासों से विकास का अनूठा उदाहरण बन गया है। ...और पढ़ें

हरियाणा का 1300 साल पुराना गांव बाढड़ा (File Photo)
HighLights
सरकारी मदद के बिना ग्रामीणों ने किया अद्भुत विकास।
स्वच्छता, शिक्षा, खेल में जीते कई राष्ट्रीय पुरस्कार।
शहीदों, खिलाड़ियों, शिक्षकों ने बढ़ाया गांव का गौरव।
पवन शर्मा, भिवानी। प्रदेश में 1300 वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए गांव बाढड़ा की दूसरी पहचान क्रांति शब्द से होती है। यहां के ग्रामीण अन्याय के खिलाफ विद्रोह आजादी से पहले व मौजूदा समय में भी करते रहे हैं।
देश की एकता, अस्मिता, अखंडता के लिए यहां के युवा सीने पर गोलियां खाने से पीछे नहीं हटे। नब्बे के दशक तक मात्र एक हजार की आबादी वाले गांव को आज उपमंडल का दर्जा मिला हुआ है वहीं स्वच्छता तथा विकास के मामले में यह गांव अपने आप में बानगी बना हुआ है।
प्रदेश सरकार भले ही स्वच्छता का लाख ढिंढोरा पीटे लेकिन धरातल पर यहां के व्यापारियों ने किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने एक एक पैसे से गांव के बीचों बीच फव्वारा, स्वच्छता के लिए सामूहिक शौचालय, हरे भरे पेड़ पौधे व कूड़ादान स्थापित कर केंद्र व प्रदेश सरकार के सभी प्रोत्साहन पुरस्कार जीते हैं।
काले पानी के नाम से मशहूर है बाढ़ड़ा गांव
कभी जींद रियासत के दौर में काले पानी के नाम से मशहूर बाढड़ा गांव लंबे समय तक केवल खेतीबाड़ी पर आश्रित रहा वहीं अब गांव ने अविश्वसनीय प्रगति कर विकास के नये द्वार खोलने का काम किया है। तेरह हजार आबादी में 48 सौ मतदाता वाले गांव में आजादी से पहले ही शूरवीरों की कमी नहीं है। गांव में विकास के नाम पर उपमंडल कार्यालय के अलावा मंडी, कालेज, बिजली घर, पेयजल घर के अलावा अन्य सभी सुविधाएं मौजूद हैं।
गांव के विकास में ग्रामीणों के अलावा बाहर से आए व्यापारियों का सहयोग भी कम नहीं है। गांव में ग्रामीण क्षेत्र के अलावा कुछ हिस्सा शहरी भी है लेकिन ग्राम पंचायत में सबकी सामूहिक भागेदारी है।
100 से अधिक कूड़ादान कराए स्थापित
गांव की पंचायत व व्यापार मंडल ने स्वच्छता के क्षेत्र में नई पहले करते हुए पहले सौ से अधिक कूड़ादान स्थापित कराए वहीं दर्जनों कर्मचारी लगा कर स्वच्छता को गति दी।
ग्राम पंचायत ने मुख्य चौक पर फव्वारा लगाया वहीं गांव के गरीब तबके के रिहायशी क्षेत्र में माडल शौचालय बनाया। गांव में शिक्षण व्यवस्था, स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए आदर्श ग्राम योजना, सेवन स्टार जैसे दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर ग्रामीण अपना गौरव बढ़ा चुके हैं।
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गांव के निवासी पंचायत समिति के पूर्व चेयरमैन भल्लेराम बाढड़ा व जिला पार्षद अनिल बाढड़ा वे दावा किया कि गांव के ग्रामीणों की एकजुटता से उनके गांव का विकास देश के अन्य गांवों के लिए उदाहरण बना हुआ है।
प्रदेश सरकार ने गांव को नगरपालिका का दर्जा दिया लेकिन गांव के 98 प्रतिशत आबादी ने विरोध जताकर दोबारा ग्राम पंचायत का दर्जा पाया। सामाजिक कार्यकर्ता सरोजना श्योराण को सर्वसम्मति से बिना चुनाव सरपंच व बीस पंचों को उनके पद पर बैठाकर मिसाल कायम की।
महाशय मंशाराम व राजा महताब सिंह को करते हैं नमन
मुख्य चौक स्थित महाशय मंशाराम व राजा महताब सिंह की प्रतिमाएं क्रांतिकारी सोच की प्रतीक हैं। इनके सामने से गुजरने वाला हर आदमी नमन करता है। इनकी प्रेरणा से ही चलते हुए फतेह सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान दिया वहीं हवलदार बिजेंद्र सिंह ने 2001 में श्रीनगर में आतंकवादियों से मुकाबले में वीरगति प्राप्त की। सिपाही मीर सिंह ने भी देशसेवा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया और जुई रोड पर इनकी प्रतिमाएं बलिदान का जीता जागता प्रमाण है।
इसके अलावा जगबीर सिंह शाटपुट में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। राजकुमार ने वालीबाल, अमित कुमार ने कबड्डी, वयेावृद्ध विकलांग खिलाड़ी स्व. नंदलाल ने लांग जंप, संदीप कुमार ने हाईजंप, हरीश कुमार वालीबाल में नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट, प्रशांत 110 मीटर दौड़, संदीप कुमार ने बाक्सिंग में नेशनल मेडल जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
सेना समेत हर तरफ रहा है दबदबा
बाढड़ा गांव के ग्रामीण सेना व खेतीबाड़ी दोनों क्षेत्रों में अपनी मेहनत का लोहा मनवा रहे हैं। कैप्टन हवासिंह, कैप्टन रामचंद्र श्योराण सेना में कई बार अपनी कंपनियों को लीड कर आतंकवादियों को कड़ा जवाब दे चुके है।
वहीं निरीक्षक मीर सिंह हरियाणा पुलिस, निरीक्षक राजबीर दिल्ली पुलिस, सोमबीर सिंह व मा. अतर सिंह श्योराण प्रदेश के प्रथम स्टेट शिक्षक पुरस्कार अवार्ड पा चुके हैं।
गांव के छात्र प्रविंद्र श्योराण पुत्र जगत प्रधान एमडी व निशा पुत्री बलिदानी बिजेंद्र सिंह, डॉ. हितेंद्र श्योराण डा. शीतल चौधरी, डॉ. प्रियंका ने एमबीबीएस तक चिकित्सा शिक्षा हासिल कर गांव का नाम रोशन किया।
डॉ. देवेंद्र सिंह बोहरा व व्यापार मंडल अध्यक्ष सुंदर श्योराण, पूर्व अध्यक्ष बलजीत हंसावास, रामकिशन फौजी ने बताया कि बाढड़ा भले ही ग्रामीण क्षेत्र हो लेकिन अब यह सुविधाओं के मामले में बड़े-बड़े शहरों को मात दे रहा है।