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    हरियाणा: भिवानी में उधारी के डॉक्टरों के सहारे चल रहीं चार PHC, स्थाई नियुक्ति का इंतजार अभी तक बरकरार

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 04:00 PM (IST)

    चरखी दादरी जिले के ग्रामीण अंचलों में चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्थायी चिकित्सकों के अभाव में डेपुटेशन पर चल रहे हैं। ...और पढ़ें

    भिवानी में उधारी के डॉक्टरों के सहारे चल रहीं चार PHC (फाइल फोटो)

    भिवानी में उधारी के डॉक्टरों के सहारे चल रहीं चार PHC (फाइल फोटो)


    HighLights

    1. चरखी दादरी के चार पीएचसी डेपुटेशन डॉक्टरों के भरोसे

    2. स्थायी डॉक्टरों की कमी से मरीजों को भारी परेशानी

    3. गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों को सबसे अधिक समस्या

    जागरण संवाददाता, चरखी दादरी। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरी हुई हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग के दावों के विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि जिले के चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) अचीना, इमलोटा, छपार और मानकावास डेपुटेशन के चिकित्सकों के सहारे चल रहे हैं और इनमें से तीन में तो लंबे समय से स्थाई मेडिकल अधिकारी की नियुक्ति ही नहीं हुई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अभी स्थाई मेडिकल आफिसर की तैनाती नहीं हुई है और नई भर्ती होते ही स्थाई चिकित्सकों की कमी दूर हो जाएगी।

    बता दें कि अचीना, इमलोटा, छपार और मानकावास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से डेपुटेशन पर भेजे जाने वाले चिकित्सकों के भरोसे चलाया जा रहा है। इस अस्थाई व्यवस्था के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि विभाग स्थाई डाक्टरों की कमी का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है।

    वहीं, इन चारों गांवों की आबादी करीब 15 हजार से अधिक है और यहां बने स्वास्थ्य केंद्रों से निकटवर्ती गांवों के लोग भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनकी समस्या को देखते हुए विभाग को जल्द से जल्द यहां चिकित्सकों का टोटा दूर करना चाहिए।

    14 दिन की डेपुटेशन पर हो रही चिकित्सकों की तैनाती

    ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुनियादी चिकित्सा का मुख्य आधार होते हैं। लेकिन अचीना, इमलोटा, छपार और मानकावास की पीएचसी में स्थाई डाक्टर नहीं होने से यहां आने वाले मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार या रेफरल की सुविधा ही मिल पा रही है।

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    स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, प्रत्येक पीएचसी पर कम से कम एक स्थाई मेडिकल आफिसर का होना अनिवार्य है, ताकि क्षेत्र के लोगों को चौबीस घंटे आपातकालीन और सामान्य चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। परंतु इन चार केंद्रों पर महीनों से यह पद खाली पड़े हैं।मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नागरिक अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्र से डाक्टरों को 14 दिन की डेपुटेशन पर यहां भेजकर काम चलाया जा रहा है।

    ग्रामीण कई बार कर चुके स्थाई एमओ तैनात करने की मांग

    अचीना, इमलोटा, छपार और मानकावास के ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार एक तरफ स्वस्थ हरियाणा का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ दादरी जिले के गांवों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द से जल्द इन चारों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थाई मेडिकल आफिसर की नियुक्ति विभाग को करनी चाहिए।

    गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी

    स्थाई चिकित्सक न होने का सबसे बुरा असर क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं, नवजातों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। नियमित जांच के लिए महिलाओं को दूरदराज के सामान्य अस्पताल दादरी जाना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं। आपातकालीन स्थिति में रात के समय इन पीएचसी पर कोई डाक्टर उपलब्ध नहीं होता, जिससे कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। फार्मासिस्ट और नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहे इन केंद्रों पर केवल दवाइयां बांटने का काम हो रहा है।

    इन चारों पीएचसी को नई भर्ती में स्थाई मेडिकल आफिसर मिल जाएंगे। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए यहां डेपुटेशन पर चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित ना हो। जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त एमओ हैं वहां से इन पीएचसी पर डेपुटेशन की जा रही है। -डॉ. राहुल अरोड़ा, डिप्टी सीएमओ, चरखी दादरी स्वास्थ्य विभाग