Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हरियाणा के चरखी दादरी में तकनीक के आगे बौनी साबित हुई दो दिन की ट्रेनिंग, शो-पीस बनी लाखों की रोवर्स मशीनें

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 03:01 PM (IST)

    लाखों रुपये की लागत से चरखी दादरी में राजस्व विभाग को मिलीं छह रोवर्स मशीनें अपर्याप्त प्रशिक्षण के कारण शोपीस बनी हुई हैं। ...और पढ़ें

    तकनीक के आगे बौनी साबित हुई दो दिन की ट्रेनिंग (फाइल फोटो)

    तकनीक के आगे बौनी साबित हुई दो दिन की ट्रेनिंग (फाइल फोटो)


    HighLights

    1. चरखी दादरी में छह रोवर्स मशीनें शोपीस बनीं

    2. अपर्याप्त प्रशिक्षण के कारण पटवारी उपयोग नहीं कर पा रहे

    3. राजस्व विभाग ने दोबारा प्रशिक्षण के लिए पत्र लिखा

    संदीप श्योराण, चरखी दादरी। राजस्व विभाग में आधुनिक तकनीक से पैमाइश व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से करीब एक वर्ष पहले चरखी दादरी जिले में लगभग 70 लाख रुपये की लागत से छह रोवर्स मशीनें उपलब्ध कराई गई। लेकिन पर्याप्त प्रशिक्षण के अभाव में ये मशीनें फिलहाल शोपीस बनकर रह गई हैं।

    स्थिति यह है कि अधिकांश पटवारी इन मशीनों से सही तरीके से पैमाइश करने में सक्षम नहीं हैं। इसके चलते विभाग को दोबारा प्रशिक्षण देने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखना पड़ा है और लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद पुराने तरीके से ही काम करना पड़ रहा है।

    उल्लेखनीय है कि सरकार ने भूमि की सटीक पैमाइश और राजस्व कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए रोवर्स मशीनों की व्यवस्था की है। चरखी दादरी जिले की तीनों तहसीलों के लिए भी छह मशीनें मुख्यालय पहुंची। विभाग के अधिकारियों के अनुसार एक मशीन की कीमत करीब 10 से 12 लाख रुपये हैं।

    इन मशीनों के जरिए पैमाइश कम समय में व पारदर्शिता के साथ हो इसके लिए अप्रैल माह में जिले के 18 पटवारियों को दो दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया। लेकिन पटवारी इन दो दिनों की ट्रेनिंग के दौरान मशीनों को पूरी तरह से आपरेट करना और इनसे काम करना सीख नहीं पाए। जिसके चलते ये मशीनें कार्यालयों में ही धूल फांक रही हैं।

    खबरें और भी

    अधिकारियों को लिखा पत्र

    जिले के 18 पटवारियों को अप्रैल माह में ट्रेनिंग देने के बाद रोवर्स मशीन से काम शुरू भी किया गया। लेकिन दो दिनों की ट्रेनिंग से पूर्णत: प्रशिक्षित नहीं होने के कारण पैमाइश में काफी त्रुटियां सामने आई।

    जिसके चलते विवाद की आशंका को देखते हुए मई माह में पत्र भेजकर पुराने सिस्टम से ही पैमाइश करने की मांग की गई। उसके बाद से रोवर्स मशीन की बजाय खेतों की पुराने तरीके से ही पैमाइश हो रही है और रोर्वस मशीनों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद भी इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

    काम में तेजी व पारदर्शिता की जगी थी उम्मीद

    जिले में रोवर्स मशीने आने के बाद पटवारियों व भू-मालिकों में तकनीकी कार्यप्रणाली, सैटेलाइट कनेक्शन, डाटा रिकार्डिंग इत्यादि के जरिए मौके पर पैमाइश पूरी होने से काम में तेजी व पारदर्शिता आने की उम्मीद जगी थी।

    लेकिन प्रशिक्षण के दौरान केवल मशीन का सामान्य परिचय कराया गया, जबकि खेतों में जाकर धरातल पर अभ्यास बहुत कम रहा। कई पटवारियों ने बताया कि मशीन चालू करने से लेकर लोकेशन लॉक होने, बिंदु निर्धारित करने और नक्शे से मिलान करने तक की प्रक्रिया जटिल है।

    ऐसे में बिना पर्याप्त अभ्यास के मौके पर सही पैमाइश करना त्रुटिपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा टैब और रोवर्स मशीन का संपर्क लास, खेत के अंदर खुले आसमान व बिजली के पोल, तारों के नीचे भी मशीन का बार-बार कनेक्शन लॉस की समस्या पेश आई। जिसके चलते रोवर्स मशीनों का उपयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते पैमाइश के लिए अब भी पुराने तरीके का ही सहारा लिया जा रहा है।

    राजस्व विभाग ने फिलहाल पटवारियों को पुरानी मशीनों से पैमाइश करने की छूट दे दी है, ताकि लोगों के कार्य प्रभावित न हों। इससे यह स्पष्ट है कि नई तकनीक अभी तक जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।

    पुराने तरीके से समय पर किए जा रहे हैं काम

    सदर कानूनगो राजेश कुमार ढिल्लो ने कहा कि दो दिन की ट्रेनिंग के दौरान पटवारी रोवर्स मशीनों की पुर्णत: जानकारी नहीं ले पाए। जिसके चलते काम करने में दिक्कत आ रही है। उसी के चलते पुराने सिस्टम के जरिए काम किया जा रहा है। हालांकि छोटे प्लाटों की पैमाइश में रोवर्स मशीन का भी प्रयोग किया जा रहा है। जल्द ही पटवारियों की दोबारा से ट्रेनिंग होने के बाद इसे खेतों की पैमाइश में भी रोवर्स का प्रयोग किया जा सकेगा।