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    मानसून में हेपेटाइटिस 'ए' और 'ई' का बढ़ा खतरा, दूषित पानी और भोजन से लीवर पर वार; टीकाकरण व स्वच्छता से बचाव संभव

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 02:22 PM (GMT+05:30)

    मानसून में दूषित पानी और भोजन से हेपेटाइटिस ए व ई का खतरा बढ़ जाता है, जो लीवर को प्रभावित करता है। ...और पढ़ें

    मानसून में हेपेटाइटिस से बचाव (प्रतीकात्मक फोटो)

    मानसून में हेपेटाइटिस से बचाव (प्रतीकात्मक फोटो)

    नवनीत शर्मा, भिवानी। मानसून का मौसम राहत के साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इन्हीं में हेपेटाइटिस यानी पीलिया सबसे गंभीर बीमारियों में शामिल है, जो सीधे लीवर को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बरसात में दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण हेपेटाइटिस ए और ई संक्रमण तेजी से फैलता है।

    समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी लीवर फेलियर, सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर चिकित्सकों ने लोगों से स्वच्छता, सुरक्षित भोजन, शुद्ध पानी और टीकाकरण को अपनाकर इस जानलेवा बीमारी से बचाव करने की अपील की है।

    मानसून में क्यों बढ़ जाता है हेपेटाइटिस का खतरा?

    विशेषज्ञ बताते हैं कि बरसात के दौरान पानी के स्रोत दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में संक्रमित पानी या भोजन के सेवन से हेपेटाइटिस ए और ई तेजी से फैलते हैं। जिले में भी लगातार हेपेटाइटिस के मरीज सामने आ रहे हैं। हेपेटाइटिस लिवर में सूजन पैदा करता है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है।

    गंभीर स्थिति में मरीज को लीवर डैमेज, सिरोसिस और लीवर फेल होने तक का खतरा हो सकता है। इसलिए बारिश के मौसम में बाहर का खुला भोजन और दूषित पानी पीने से बचना जरूरी है।

    इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है महंगा

    हेपेटाइटिस की शुरुआत सामान्य वायरल संक्रमण जैसी दिखाई देती है, इसलिए कई लोग इसे हल्के में ले लेते हैं। लगातार बुखार, थकान, भूख कम लगना, मतली, उल्टी, पेट दर्द, गहरे रंग का पेशाब, जोड़ों में दर्द और आंखों और त्वचा में पीलापन इसके प्रमुख लक्षण हैं।

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    यदि ये संकेत दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है और संक्रमण को फैलने से भी रोका जा सकता है।

    हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई में ये है अंतर:

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस ए और ई मुख्य रूप से दूषित पानी व भोजन से फैलते हैं और इन्हें सामान्य भाषा में पीलिया कहा जाता है। वहीं हेपेटाइटिस बी, सी और डी संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सिरिंज, टैटू, रेजर, ब्लेड, नेल कटर और टूथब्रश साझा करने से फैलते हैं। हेपेटाइटिस सी के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए इसकी पहचान देर से हो पाती है और तब तक लिवर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।

    ये बरतें सावधानी

    :- पानी को फिल्टर कर या उबालकर ही पीएं।
    - भरपूर मात्रा में पानी पीएं।
    - तेज मसालेदार और तला-भुना खाना अधिक न खाएं।
    - शरीर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
    - बाहर कुछ खाएं-पीएं तो सफाई पर ध्यान दें।
    - मरीज से मिलने जुलने में दूरी बनाकर रखें।
    - अगर किसी को लक्षण हैं तो तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।
    - अगर कोई हेपेटाइटिस से ग्रस्त हैं तो मसालेदार और तला-भुना बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए।

    डॉ. यतिन गुप्ता ने कहा कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिए। भोजन हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ हो। बाहर का खुला भोजन और कटे हुए फल खाने से बचें।

    फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करें और खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोएं। हेपेटाइटिस ए और बी का टीकाकरण प्रभावी सुरक्षा देता है। जागरूकता, स्वच्छता और समय पर टीकाकरण अपनाकर इस बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है।