4 हजार करोड़ जीएसटी, 100 करोड़ टैक्स, फिर भी तीन मंत्रियों के शहर में सड़कें बनी तबेला
फरीदाबाद, जो ₹4000 करोड़ जीएसटी और ₹100 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स देता है, बेसहारा पशुओं की समस्या से जूझ रहा है, जिससे सड़कें तबेला बन गई हैं। निगम के प् ...और पढ़ें
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HighLights
फरीदाबाद ₹4000 करोड़ जीएसटी, ₹100 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स देता है।
शहर की सड़कें बेसहारा पशुओं से भरी, तबेला बनी हुई हैं।
निगम के प्रयास नाकाफी, पशुओं के कारण हो रहे हादसे।
दीपक पांडेय, फरीदाबाद। जीएसटी कलेक्शन के रूप में चार हजार करोड़, प्रॉपर्टी टैक्स के माध्यम से 100 करोड़ का राजस्व सरकार को देने वाला शहर बेसहारा पशु मुक्त नहीं हो पा रहा है। तीन मंत्रियों के इस शहर में सड़कें पूरी तरह से तबेला बन चुकी हैं। हर सड़क पर चार से पांच पशु सड़क के बीच में ही बैठे नजर आ जाते हैं।
निगम की स्वास्थ्य शाखा की ओर से 10 दिन पहले हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था कि बेसहारा पशुओं की जानकारी लोग हेल्पलाइन नबर पर उपलब्ध करवाएं। जिन पशुओं को पकड़ने के लिए निगम लोगों की सहायता मांगने का दिखावा कर रहा है। वह पशु काफी संख्या निगम मुख्यालय की एक किलोमीटर की परिधि में ही शहर की सड़कों पर घूम रहे हैं।
जिले में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेश नागर और केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर रहते हैं।
दो बार एफआइआर की चेतावनी
बेसहारा पशुओं को लेकर निगम की ओर से दो बार एफआइआर की चेतावनी जारी की जा चुकी है। तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त स्वप्निल पाटिल की ओर से पत्र जारी करके कहा गया था कि सड़क पर जिनके पशु पकड़े जाएंगे। उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाई जाएगी। लेकिन एक साल तक थाने में कोई शिकायत नहीं दी गई।
इसके बाद करीबन 15 दिन पहले स्वास्थ्य शाखा अधिकारी नितिश परवाल की ओर से भी एफआइआर करवाने का दावा किया गया। लेकिन कोई भी शिकायत थाने में नहीं दी गई। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि निगम अपने चेतावनी को लेकर कितना गंभीर है।
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पशु मुक्त करने को दिया था आदेश
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कुर्सी संभालते ही शहर की सड़कों को पूरी तरह से पशु मुक्त करने का आदेश दिया था। इसके लिए निगम की ओर से मुहिम भी चलाई गई थी। लेकिन अब सबकुछ ठंडे बस्ते में चला गया है।
निगम की स्वास्थ्य शाखा की दो टीमें बेसहारा पशुओं को पकड़ने का काम कर रही है। जिसमें 20 कर्मचारी लगे हुए है। लेकिन पशुओं की संख्या को देखते हुए स्टाफ और संसाधन दोनों कम नजर आते हैं।
इस तरह हुए हैं हादसे
अगस्त 2024 में, भारत कालोनी में सड़क पर लड़ रहे दो आवारा पशुओं ने एक मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
सेक्टर 8 बाईपास रोड पर अचानक एक आवारा पशु के सामने आ जाने से दो वाहनों की टक्कर हो गई थी। दोनों गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और एक गाड़ी का एयरबैग खुल गया, जिससे उसमें सवार लोग घायल हो गए।
- 27 लाख आबादी
- 100 करोड़ प्रापर्टी टैक्स्
- 25 हजार औद्योगिक इकाइयां
- 04 हजार करोड़ जीएसटी
- 12 हजार से अधिक बेसहारा पशुओं की संख्या
- 02 टीमें नगर निगम की कर रही काम
- 20 कर्मचारी पशुओं को पकड़ने के लिए नियुक्त
- 05 हजार रुपये का जुर्माना निगम की ओर से लगाया जाता है
- 03 गौशाला में अभी निगम की ओर से रखे जा रहे पशु
- 09 की जाएगी पशु पकड़ने वाले टीमों की संख्या
- 02 गौशाला निगम अपनी खोलने की कर रहा तैयारी
हरियाणा सरकार को शहर से करीब चार हजार करोड़ का जीएसटी जाता है। ऐसे में आम नागरिक को मूलभूत सुविधाओं के साथ साथ शहर की सड़कें भी पूरी तरह से साफ मिलनी चाहिए। -अजय सिंह, एडवाेकेट, जीएसटी
गुरुग्राम के बाद फरीदाबाद हरियाणा सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाला जिला है। तीन बड़े मंत्री शहर में रहते हैं। इसके बावजूद सड़कों पर पशुओें का राज है। जिसकी वजह से आए दिन हादसे होते हैं। ऐसे में इन हादसों का कारण बनने वाले अधिकारियों पर भी एफआइआर दर्ज होनी चाहिए। - मुकेश शर्मा, पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर
पशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आने वाले समय में स्थाई समाधान की योजना तैयार की जा रही है। टीमों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही विशेष रणनीति पर काम करते हुए सड़कों को पशु मुक्त कर दिया जाएगा। - नितिश परवाल, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम