फरीदाबाद में पिता ने 5 साल के इकलौते बेटे की हत्या की, फिर बेटे के शव को सीने से बांध खुद भी लगा ली फांसी
फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पिता ने अपने पांच साल के बेटे की हत्या कर खुद फांसी लगा ली। ...और पढ़ें
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बेटे और पिता का फाइल फोटो। जागरण
HighLights
पिता ने पांच साल के बेटे की हत्या की।
बेटे को मारने के बाद पिता ने खुदकुशी की।
मृतक नशे का आदी था, परिवार परेशान था।
जागरण संवाददाता, बल्लभगढ़ (फरीदाबाद)। दयालपुर गांव में 34 वर्षीय व्यक्ति ने अपने इकलौते पांच वर्षीय बेटे की हत्या कर उसके शव को अपने सीने से बांधा, फिर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। व्यक्ति नशा करने और रोजाना स्वजनों से झगड़ा करता था। उसकी इस आदत से परेशान होकर पत्नी-बेटा, माता-पिता व अविवाहित बड़ा भाई पैतृक मकान छोड़कर पड़ोसी गांव की कालोनी में किराए पर रह रहे थे।
अकेला रहता था आरोपित
व्यक्ति पैतृक मकान में अकेला रहता था। वह पत्नी व परिवार के सदस्यों द्वारा तिरस्कृत किए जाने से मानसिक रूप से परेशान था। पत्नी व स्वजनों से कई बार गांव लौटने की बात कहता था। पुलिस का मानना है कि संभवतया इसी मानसिक पीड़ा के चलते उसने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया।
नर्सरी में पढ़ रहा था लक्षित
जानकारी के मुताबिक दयालपुर गांव में रूपचंद अपनी पत्नी मंजू, बड़े बेटे भारत, छोटे बेटे सागर के साथ रह रहा था। भारत एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है लेकिन अभी अविवाहित है। सागर पहले टैक्सी चलाता था, अब घरेलू गाड़ी पर ड्राइर था। सागर ने आठ साल पहले नेहा नामक युवती से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद नेहा ने पुत्र लक्षित को जन्म लिया। पांच वर्षीय लक्षित अब नर्सरी कक्षा में पढ़ रहा था।
रोजाना कलह से आ गया था तंग
नेहा का पति सागर कई तरह का नशा करता था, जिसके कारण उसका पत्नी, माता-पिता व भाई से अक्सर झगड़ा रहने लगा। रोजाना कलह से तंग आकर रूपचंद ने परिवार सहित पैतृक मकान को छोड़ने का फैसला लिया। करीब दो साल पहले रूपचंद अपनी पत्नी मंजू, बड़े बेटे भारत व बहू नेहा व पोते लक्षित को लेकर मच्छगर गांव की एक काॅलोनी में किराए पर रहने लगा, जबकि सागर पैतृक मकान में रह रहा था।
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तीन बजे तक खेलने की आ रही थी आवाज
पड़ोसी मनोज ने बताया कि हर रविवार को सागर अपने बेटे को पत्नी के पास से यहां गांव ले आता था। रविवार को वह लक्षित को लेकर 12 बजे गांव आया था। दोपहर तीन बजे के आसपास पड़ोसियों को लक्षित के खेलने कूदने की आवाज आ रही थी लेकिन फिर आनी बंद हो गई।
पुलिस को अंदेशा है कि सागर ने बेटे की हत्या शाम तीन से चार बजे के आसपास की होगी। शाम को 7:30 बजे नेहा ने पति को फोन मिलाया तो लगातार रिंग जा रही थी। रात आठ बजे वह गांव वाले घर पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद मिला।
पड़ोसी ने शव देखा सबसे पहले
नेहा के कहने पर एक पड़ोसी सीढ़ी के सहारे मकान की छत पर गया, वह नीचे आया तो देखकर दंग रह गया। सागर फांसी के फंदे से झूल रहा था, जबकि लक्षित का शव उसके सीने से बंधा था।
पड़ोसी ने अंदर से मुख्य दरवाजे की कुंडी खोली, नेहा अंदर दाखिल हुई, उसने बेटे को पति के सीने से अलग किया। उसके शरीर में जान नहीं थी, गला और मुंह नीला पड़ा था। वहां चीख पुकार मची तो अन्य ग्रामीण पहुंचे।
नेहा ने बताया उसे कतई अंदाजा नहीं था कि उसका पति बेटे की जान ले लेगा। सागर मन में सबसे रंजिश रखता था। अपनी बुरी आदतें नहीं सुधार रहा था, इसीलिए सब दूर रहते थे।
रविवार को हर बार की तरह जब वह बेटे को लेकर गया, तो उसने कहा था कि शाम सात बजे तक छोड़ जाऊंगा। मुझे पता होता कि वह ऐसा कदम उठाएगा तो मैं बेटे को उसके साथ कभी नहीं भेजती।