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    फरीदाबाद में कचरे का अंबार: सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर में बढ़ा बीमारियों का खतरा

    Updated: Mon, 11 May 2026 02:16 AM (IST)

    फरीदाबाद में सफाई कर्मचारियों की 10 दिन से चल रही हड़ताल के कारण शहर कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों ...और पढ़ें

    फरीदाबाद में लगा कचरे का अंबार। (एआई से निर्मित ग्राफिक्स)

    फरीदाबाद में लगा कचरे का अंबार। (एआई से निर्मित ग्राफिक्स)

    HighLights

    1. फरीदाबाद में 10 दिनों से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी।

    2. शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर, बीमारियों का अंदेशा बढ़ा।

    3. ठेकेदारी प्रथा खत्म कर कर्मचारियों को नियमित करने की मांग।

    जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। शहर कचरे के ढेर पर है, मगर नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की 10 दिनों से चल रही हड़ताल के कारण स्थिति सुधर नहीं पा रही है। सेक्टरों, कालोनियों, गली-मोहल्लों के साथ ही विभिन्न बाजारों का हाल खराब है।

    एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में जगह-जगह कचरा फैला नजर आ रहा है। सफाई कर्मचारियों की इस हड़्माल से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इस मामले में विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि अगर जल्दी ही चौक-चौराहों से कचरा नहीं उठाया तो बीमारियां फैलने का अंदेशा है।

    बता दें कि नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा व सफाई कर्मचारी यूनियन की ओर से एक मई से हड़ताल चल रही है। यूनियन की मांग है कि ठेकेदारी प्रथा खत्म की जाए और अनुबंध के तहत सेवा दे रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाए ।सफाई कर्मचारियों ने रविवार को बल्लभगढ़ और ओल्ड फरीदाबाद के मुख्य बाजारों में जुलूस निकाला।

    स्वास्थ्य के लिए खतरा है कचरे का फैलना

    एकॉर्ड अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट एवं प्रमुख पीडियाट्रिक पल्मोनोलाजी एवं स्लीप मेडिसिन डॉ. सुनील नागर कहते हैं कि कचरे का फैलना पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरा है। खुले में कचरा जमा करना और उसे जलाना वातावरण में हानिकारक प्रदूषकों को फैलाता है, जिससे श्वसन संबंधी रोगों में वृद्धि होती है।

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    अस्थमा तथा एलर्जी जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। कचरा जलाने से निकलने वाला जहरीला धुआं सांस की नली में सूजन पैदा करता है। बच्चों में इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है, क्योंकि उनके फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं। लंबे समय तक जहरीले कणों के संपर्क में रहने से फेफड़ों में भी सूजन हो सकती है।

    कायदे से सामुदायिक स्तर पर कचरे का सही तरीके से निपटान होना चाहिए। गीला और सूखा कचरा अलग होना चाहिए डा. सुनील नागर कहते हैं कि स्वच्छ वातावरण केवल प्रकृति के लिए नहीं, बल्कि हमारी हर सांस के लिए जरूरी है।

    कचरे के कारण शहर की सुंदरता बिगड़ रही है। चौक-चौराहों से निकलना मुश्किल हो रहा है। सरकार को इस मामले में रास्ता निकालना चाहिए, जिससे शहर स्वच्छ हो। - प्रदीप गुप्ता

    कई दिनों से नियमित रूप से सफाई नहीं हो रही है। स्वास्थ्य के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वच्छता जरूरी है। संबंधित अधिकारी इस मामले में गंभीरता बरतें। - अमित जैन, एनआइटी निवासी

    कई वर्षों से नए सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की है। बहुत से कर्मचारी अनुबंधन के तहत सेवा दे रहे हैं। हमारी मांग है कि कर्मचारियों को नियमित किया जाए और ठेकेदारी प्रथा को खत्म किया जाए। - बलबीर बालगुहेर, प्रधान, सफाई कर्मचारी यूनियन

    कर्मचारियों की सभी मांगें उच्च अधिकारियों के संज्ञान में हैं। सरकार के स्तर पर मांगें विचाराधीन हैं। कर्मचारी संघ से भी बातचीत की जा रही है। उम्मीद है कि जल्दी ही कोई रास्ता निकल आएगा। - धीरेंद्र खड़गटा, निगमायुक्त

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