फरीदाबाद में झपटमारी पर नकेल, पुलिस लेगी फोरेंसिक और फिंगर प्रिंट का सहारा
फरीदाबाद पुलिस झपटमारी की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नई रणनीति अपना रही है। अब मोबाइल, चेन और पर्स झपटने के मामलों में फोरेंसिक जांच और फिंगर ...और पढ़ें

फरीदाबाद पुलिस झपटमारी की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नई रणनीति अपना रही है।
HighLights
पुलिस झपटमारी मामलों में नई रणनीति अपनाएगी।
फोरेंसिक जांच और फिंगर प्रिंट का उपयोग होगा।
मजबूत साक्ष्य से अपराधियों को सजा मिलेगी।
हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। जिले में बढ़ती झपटमारी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अब नई रणनीति पर काम कर रही है। मोबाइल, चेन और पर्स झपटने जैसी वारदातों के मुकदमों को अब पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से लिया जाएगा।
पुलिस की योजना है कि ऐसे मामलों में फोरेंसिक जांच और फिंगर प्रिंट साक्ष्यों की भी मदद ली जाए, ताकि अदालत में मजबूत केस पेश हो सके और आरोपित आसानी से छूट न पाएं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब तक झपटमारी के अधिकतर मामलों में प्रत्यक्ष गवाह और तकनीकी साक्ष्य पर्याप्त नहीं होने के कारण आरोपित अदालत से जमानत पर बाहर आ जाते थे। कई मामलों में पहचान कमजोर होने या सबूतों की कमी के चलते आरोपित बरी भी हो जाते थे।
इसका सीधा असर यह हुआ कि झपटमारों में कानून का भय कम होता गया और वे जेल से बाहर आते ही दोबारा वारदातें करने लगते थे।अब पुलिस अपराध स्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की दिशा में काम कर रही है।
झपटमारी के दौरान बाइक, मोबाइल, वाहन या अन्य वस्तुओं पर मिले फिंगर प्रिंट और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि वैज्ञानिक जांच से केस मजबूत होंगे और अदालत में आरोपितों के बच निकलने की संभावना कम हो जाएगी।
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हाल के वर्षों में देशभर में पुलिस जांच में फोरेंसिक तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। हरियाणा में भी फोरेंसिक जांच को मजबूत करने के लिए हाईटेक फोरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं, जिनकी मदद से मौके पर ही शुरुआती वैज्ञानिक जांच संभव हो रही है।
सूत्रों के अनुसार फरीदाबाद पुलिस झपटमारी की घटनाओं में शामिल पुराने आरोपितों का डाटा भी खंगाल रही है। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद आरोपितों की पहचान साबित करना चुनौती बन जाता है। ऐसे में फिंगर प्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जांच को नई दिशा दे सकते हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि अपराध स्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत में काफी प्रभावी माने जाते हैं।
झपटमारी के मामलों में अब वैज्ञानिक जांच पर अधिक फोकस किया जाएगा। प्रयास है कि ऐसे मामलों में मजबूत साक्ष्य जुटाकर आरोपितों को सजा दिलाई जाए, ताकि अपराधियों में कानून का भय पैदा हो और शहर में झपटमारी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
- हिमाद्रि कौशिक, डीसीपी हेडक्वॉर्टर
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