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    फरीदाबाद में वकील की सलाह पर 29 साल तक बेखबर रहा शख्स, शराब केस में लगा 5000 रुपये का जुर्माना

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 06:00 AM (GMT+05:30)

    फरीदाबाद के 65 वर्षीय चंद्रभान को 29 साल पुराने अवैध शराब मामले में 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। वकील की सलाह पर केस खत्म मानकर वह 26 साल से भगो ...और पढ़ें

    जिला अदालत परिसर। जागरण आर्काइव

    जिला अदालत परिसर। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. 65 वर्षीय चंद्रभान को 29 साल बाद शराब केस में सजा।

    2. वकील की गलत सलाह पर केस खत्म मानकर रहा भगोड़ा।

    3. अदालत ने 5,000 रुपये का जुर्माना लगाकर मामला निपटाया।

    हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। वकील के कहने पर मुकदमा खत्म समझकर आराम से घर बैठे खेड़ी कलां गांव निवासी 65 वर्षीय चंद्रभान उर्फ पप्पू के घर जब पुलिस गिरफ्तारी का वारंट लेकर पहुंची तो उसे पता चला कि 29 साल पहले उस पर दर्ज हुआ अवैध रूप से शराब ले जाने का मुकदमा अभी चल रहा है।

    यही नहीं करीब 26 साल से अदालत ने उसे भगोड़ा भी घोषित किया हुआ है।आरोपित घर नहीं था तो पुलिस बैरंग लौट गई।

    इधर पता चलने पर चंद्रभान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने याचिका रद करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती जो पहले से भगोड़ा घोषित है।

    आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। न्यायाधीश नवीन कुमार की अदालत में आरोपित ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। अदालत ने चंद्रभान को दोषी करार देकर पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस तरह करीब तीन दशक पुराना मुकदमा खत्म हुआ।

    शराब बंदी के समय का था मामला

    साल 1997 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल ने हरियाणा प्रदेश में शराबबंदी लागू की थी। 29 अगस्त 1997 को ओल्ड फरीदाबाद थाना में तैनात एएसआइ रामदत्त ने गश्त के दौरान चंद्रभान को एक थैले में देसी शराब के 90 पाउच ले जाते पकड़ा था। थाने में एक्साइज एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ।

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    अदालत ने इसके बाद आरोपित को जमानत पर छोड़ दिया गया। इधर एक अप्रैल 1998 को शराबबंदी का आदेश वापस ले लिया गया। इसके बाद आरोपित के वकील ने कहा कि अब मुकदमा खत्म हो गया है। अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है। चंद्रभान ने भी विश्वास कर लिया जबकि अदालत की कार्रवाई में तो मुकदमा चलता रहा।

    अदालत की तरफ से नियमानुसार चंद्रभान को पेश होने के नोटिस जारी किए गए, मगर वह पेश नहीं हुआ और 27 सितंबर 2000 में भगोड़ा घोषित कर दिया गया।

    इस साल की शुरुआत में पुलिस ने लंबे समय से भगोड़ा चल रहे आरोपितों के खिलाफ अभियान चलाया तो उसमें चंद्रभान का भी नाम था। पुलिस ढूंढते हुए उसके घर पहुंची, तो पता चला कि अभी मुकदमा जारी है।

    अब जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो सुनवाई के दौरान चंद्रभान ने अदालत को बताया कि वह अशिक्षित है, इसलिए वकील की बात पर भरोसा कर लिया, साथ ही यह भी कहा कि अदालत के कोई नोटिस नहीं मिले। इसलिए वह अदालत में पेश नहीं हुआ। अंतत: अदालत ने पांच हजार रुपये का जुर्माना लगा कर मामले का पटाक्षेप किया।

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