Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हलफनामे में 'निचली अदालत' शब्द के प्रयोग पर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी, SP कुशीनगर से मांगा स्पष्टीकरण

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 01:07 AM (GMT+05:30)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक केशव कुमार से हलफनामे में 'निचली अदालत' शब्द के प्रयोग पर स्पष्टीकरण मांगा है। ...और पढ़ें

    हलफनामे में 'निचली अदालत' शब्द पर एसपी कुशीनगर से मांगी सफाई

     हलफनामे में 'निचली अदालत' शब्द पर एसपी कुशीनगर से मांगी सफाई

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के हलफनामे में 'निचली अदालत' जैसे शब्द के प्रयोग को अपमानजनक मानते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।

    न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकलपीठ ने कहा कि हलफनामे में और भी विरोधाभास है। कहा कि सप्ताह भर में हलफनामा नहीं मिलने पर कोर्ट एसपी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर सकती है। गोलू पांडेय नामक आरोपित की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की।

    सलीम अंसारी नामक व्यक्ति की संदिग्ध हालत में मौत के मामले में गोलू आरोपित है। उसके खिलाफ तुर्कपट्टी थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दायर किया गया था, लेकिन जांच के दौरान बीएनएस की धारा 103 हटा दी गई। पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि यह स्पष्ट नहीं है कि इस धारा को क्यों हटाया गया है।

    जांच अधिकारी व एसपी से हलफनामा मांगा गया था। एसपी ने अपने निजी हलफनामे के पैराग्राफ क्रमांक छह में कहा है कि सलीम अंसारी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। इसके पैराग्राफ आठ में यह कहा गया है कि मौत का कारण पता नहीं चल सका, जबकि पैराग्राफ नंबर 11 में एसपी ने कहा है कि 22 अक्टूबर 2025 को घायल नबी रसूल को मेडिकल स्टोर ले जाया गया था, जहां सलीम अंसारी भी पहुंचे थे और उन्हें पूरी तरह से ठीक बताया गया था।

    उसके बाद सलीम को दीपक नाम का एक व्यक्ति अस्पताल ले गया, जहां सलीम को मृत घोषित कर दिया गया। पैराग्राफ नंबर 10 में एसपी ने लिखा है, जिस पर 'निचली अदालत ने तीन जनवरी 2026 को अपराध का संज्ञान लिया।'

    खबरें और भी

    कोर्ट ने एसपी को यह स्पष्ट करने के लिए निर्देशित किया कि कानून के किस अधिकार के तहत उन्होंने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है, जो किसी भी अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए जाने पर अपमानजनक प्रतीत होती है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी जिला अदालतों के लिए ‘निचली अदालत’ शब्द का इस्तेमाल करने की निंदा की है।

    यह भी पढ़ें- हाई कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने में देरी और 'गन कल्चर' पर जताई चिंता, सभी जिलों से मांगा हथियारों का ब्यौरा