253 रुपये के लिए अदालत पहुंचा उपभोक्ता, आयोग ने एजेंसी को ठहराया दोषी
एक व्यक्ति ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के 253 रुपये के लिए उपभोक्ता आयोग में ढाई साल लंबी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। आयोग ने एजेंसी को 253 रुपये वाप ...और पढ़ें

एक व्यक्ति ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के 253 रुपये के लिए उपभोक्ता आयोग में ढाई साल लंबी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की।
HighLights
उपभोक्ता ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए लड़ाई लड़ी।
उपभोक्ता आयोग ने एजेंसी को सेवा में कमी का दोषी माना।
एजेंसी को 253 रुपये वापसी और 4400 रुपये हर्जाना देने का आदेश।
हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। 253 रुपयों के लिए एक व्यक्ति ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने वाली एजेंसी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में ढाई साल लड़ाई लड़ी। आखिर उसकी जीत हुई। आयोग ने एजेंसी को उसके 253 रुपये लाैटाने के साथ ही हर्जाने का भी आदेश दिया है।
बल्लभगढ़ की तिरखा कालोनी निवासी आदित्य चौधरी की शिकायत के अनुसार उनके चाचा विजय की स्प्लेंडर प्लस बाइक पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए जनवरी 2024 को 253 रुपए आनलाइन जमा किए गए थे, मगर बाइक पर प्लेट नहीं लगी उनका आवेदन रद कर दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 16 जनवरी को दोबारा 253 रुपए जमा कर नया आवेदन किया।
इस बार 22 जनवरी की फिटमेंट तिथि तय हुई, लेकिन फिर भी कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। कुछ समय बाद दूसरा आवेदन भी रद कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने कई बार कंपनी और एजेंसी को ई-मेल भेजकर समस्या बताई। कंपनी ने वाहन के रिकार्ड में त्रुटि होने की बात कही, जबकि आरटीओ ने रिकॉर्ड पूरी तरह सही बताया।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं होने के कारण उसे पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। वहीं, ग्राहक सेवा केंद्र से भी कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उसने न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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सुनवाई के दौरान एजेंसी की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। लगातार अनुपस्थित रहने पर आयोग ने उसे एकपक्षीय घोषित कर दिया। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि एजेंसी उपभोक्ता को समय पर सेवा देने में विफल रही, जो सेवा में कमी का स्पष्ट मामला है।
आयोग ने अपने आदेश में एजेंसी को शिकायतकर्ता के 253 रुपए वापस करने, मानसिक प्रताड़ना के लिए 2200 रुपए और मुकदमे के खर्च के रूप में 2200 रुपये देने का निर्देश दिया है। आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करना होगा।