हरियाणा में चार्जशीट दाखिल करने का तरीका बदलेगा, अब पेपरलेस सिस्टम से तेज होगी पुलिस की जांच और ट्रायल
फरीदाबाद में आपराधिक मामलों की जांच और सुनवाई प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हो रहा है। अब पुलिस द्वारा तैयार चार्जशीट अभियोजन शाखा में ऑनलाइन भेजी जाएगी और ...और पढ़ें

अब पेपरलेस चार्जशीट दाखिल की जाएगी। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
चार्जशीट अब ऑनलाइन अभियोजन शाखा को भेजी जाएगी
स्वीकृति के बाद सीधे अदालत में डिजिटल दाखिल होगी
कागजी कार्यवाही कम होगी, प्रक्रिया में तेजी आएगी
हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। आपराधिक मामलों की जांच और सुनवाई प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पुलिस द्वारा अदालत में पेश की जाने वाली चार्जशीट अब पेपरलेस होगी। जांच अधिकारी चार्जशीट तैयार कर उसे अभियाेजन शाखा में ऑनलाइन जांच के लिए भेजेंगे और स्वीकृति के बाद वही चार्जशीट सीधे अदालत में डिजिटल रूप में दाखिल हो जाएगी।
इस व्यवस्था से कागजी कार्यवाही कम होगी और जांच से लेकर ट्रायल शुरू होने तक की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। शुरुआती चरण में जांच अधिकारियों ने अभियोजन शाखा से राय के लिए चार्जशीट ई-प्रोसिक्युशन पोर्टल पर ऑनलाइन भेजना शुरू कर दिया है। अभियाेजन शाखा से संशोधन के सुझाव भी ऑनलाइन ही दिए जा रहे हैं।
इसके बाद जांच अधिकारी अंतिम रूप से तैयार चार्जशीट भौतिक रूप से अदालत में पेश कर रहे हैं, आगे चलकर अदालत में भी यह डिजिटल रूप में ही पेश होगी। फिलहाल यह प्रक्रिया फरीदाबाद में शुरू हुई है, जल्द ही यह प्रदेश के अन्य जिलों में भी शुरू होगी।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए अभियोजन शाखा में निदेशक, उप निदेशक और सहायक निदेशक का पद सृजित किया गया है। निदेशक की नियुक्त पंचकूला मुख्यालय में हो गई है। फरीदाबाद में उप निदेशक के पद पर भी नियुक्ति हो गई है, सहायक निदेशक पद पर भी जल्द नियुक्ति होगी। प्रदेश के अन्य जिलों में भी यह नियुक्तियां होंगी।
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यह होगा फायदा
चार्जशीट पुलिस जांच का अंतिम दस्तावेज होता है, जिसमें आरोपित, गवाह, साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष शामिल होते हैं। इसी के आधार पर अदालत मामले का संज्ञान लेकर ट्रायल शुरू करती है। नई व्यवस्था लागू होने से पुलिस और अदालत दोनों स्तर पर कामकाज आसान होगा। जांच अधिकारी को कागजी फाइलें लेकर अभियोजन शाखा या अदालत के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
अदालत में चार्जशीट की प्रतियां तैयार करने की जरूरत नहीं होगी और डिजिटल रिकार्ड के आधार पर सुनवाई शुरू की जा सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार पेपरलेस चार्जशीट से समय की बचत के साथ पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
हर स्तर पर फाइल की मूवमेंट ऑनलाइन दर्ज होगी, जिससे देरी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान होगा। इसके अलावा डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित सर्वर पर रहेंगे, जिससे पुराने मामलों की फाइल ढूंढने में भी आसानी होगी। किसी भी स्तर पर जरूरी दस्तावेज को जानबूझकर गुम कर मुकदमे को प्रभावित करने की गुंजाइश शून्य हो जाएगी।
इस प्रणाली से जांच की गति तेज होने की उम्मीद है। अभी रोजाना औसतन 15 चार्जशीट हमें नलाइन प्राप्त हाे रही हैं। इनमें संशोधन के लिए आनलाइन ही सुझाव दिए जा रहे हैं। धीरे-धीरे प्रक्रिया को और विस्तार दिया जाएगा।
- परवेज कोखर, उप निदेशक, अभियोजन शाखा, जिला अदालत
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