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फरीदाबाद में बैठकें होती रहीं, फाइलें बनती गईं लेकिन नहीं थमे हादसे; बीते 9 माह में 557 रोड एक्सीडेंट्स

Published: Fri, 06 Nov 2026 12:58 PM (IST)

फरीदाबाद में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, जहां 2026 में सितंबर तक 557 दुर्घटनाएं और 265 मौतें ...और पढ़ें

HighLights

  1. 2026 में सितंबर तक फरीदाबाद में 557 सड़क हादसे।

  2. गलत दिशा में वाहन चलाना, ओवरस्पीडिंग प्रमुख दुर्घटना कारण।

  3. रोड सेफ्टी बैठकों के फैसलों पर अमल की कमी।

हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। शहर की सड़कों पर हादसों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है, लेकिन सड़क सुरक्षा के नाम पर प्रशासन की सक्रियता बैठकों और निर्देशों तक ही सीमित नजर आ रही है।

हालात इतने चिंताजनक हैं कि वर्ष 2025 में सितंबर तक 448 सड़क हादसे हुए थे, इसके मुकाबले साल वर्ष 2026 में सितंबर तक कहीं अधिक 557 हादसे दर्ज हुए हैं।

जिला रोड सेफ्टी कमेटी की रिपोर्ट के आंकड़े प्रशासन के सड़क सुरक्षा संबंधी दावों की पोल खोल रहे हैं। गंभीर सड़क हादसों की संख्या में भी बड़ा उछाल आया है। वर्ष 2025 में सितंबर तक 187 गंभीर हादसे हुए थे, जबकि 2026 में यह आकंड़ा 252 पहुंच गया है।

हादसों के साथ मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा

सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या भी डराने वाली है। वर्ष 2025 में सितंबर तक सड़क दुर्घटनाओं के कारण 191 लोगों की मौत हुई थी, जबकि इस साल सितंबर तक कहीं अधिक 256 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि शहर की सड़कों पर सफर करना लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है।

गलत दिशा और ओवरस्पीडिंग बन रही जानलेवा

हादसों के प्रमुख कारणों में गलत दिशा में वाहन चलाना, ओवरस्पीडिंग और यातायात नियमों की अनदेखी शामिल है। शार्टकट के चक्कर में लोग रांग साइड वाहन दौड़ाते हैं, जिससे सामने से आने वाले तेज रफ्तार वाहनों से सीधी भिड़ंत हो जाती है। इसके अलावा अंधेरे और खराब स्ट्रीट लाइट की वजह से भी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

बैठकें होती हैं, लेकिन फैसलों पर अमल नहीं

जिला प्रशासन की ओर से हर महीने रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक आयोजित की जाती है। इनमें ब्लैक स्पाट की पहचान, अवैध कट बंद करने, रिफ्लेक्टर लगाने और सख्त चालान करने जैसे निर्देश दिए जाते हैं।

इसके बावजूद हादसों का बढ़ता ग्राफ इन बैठकों के फैसलों के जमीनी असर पर सवाल खड़े कर रहा है। रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि यदि बैठकों में लिए गए फैसलों में से 50 प्रतिशत पर भी प्रभावी ढंग से अमल हो जाए तो सड़क हादसों में कमी लाई जा सकती है।

ये हैं 12 ब्लैक स्पाॅट

यातायात पुलिस के सर्वे में एल्सन चौक, झारसैंतली पुल, कैली फ्लाईओवर, गुडईयर चौक, जेसीबी चौक, बड़खल फ्लाईओवर, एनएचपीसी चौक, ओल्ड फरीदाबाद, बाटा चौक, बल्लभगढ़ अनाज मंडी कट, सीकरी रोड और मौजपुर टोल प्वाइंट जैसे स्थान ब्लैक स्पाॅट के रूप में सामने आए। अगस्त 2024 में ट्रैफिक पुलिस और रोड सेफ्टी विशेषज्ञों ने एनएच-19 के 12 ऐसे स्थानों का दोबारा सर्वे भी किया था।

दुर्घटनाओं का खतरनाक समीकरण बन रहा

इन स्थानों पर सीसीटीवी और पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन समस्या केवल सड़क की बनावट नहीं है। कई ब्लैक स्पाॅट पर वाहन चालक शाॅर्टकट के लिए गलत दिशा में वाहन दौड़ाते हैं।

अप्रैल 2026 में दिल्ली-आगरा हाईवे पर 13 स्थानों पर गलत दिशा में वाहन चलने की बात सामने आई थी। अजरौंदा और वाईएमसीए चौक ऐसे स्थानों में प्रमुख बताए गए थे। तेज रफ्तार और गलत दिशा में चलना दुर्घटनाओं का खतरनाक मिश्रण बन रहा है।

एक नजर आंकड़ों पर

साल कुल सड़क हादसे गंभीर सड़क हादसे मौतों की संख्या
2025 (सितंबर तक) 448 187 191
2026 (सितंबर तक) 557 252 256

"ब्लैक स्पाॅट पर हादसे कम करने के लिए हमारे प्रयास लगातार जारी हैं। इनमें हमें काफी सफलता मिली है। पिछले सालों के मुकाबले ब्लैक स्पाॅट पर हादसों में कमी आई है। हमारे प्रयास लगातार जारी रहेंगे।"

-उत्तम, डीसीपी ट्रैफिक।

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