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डीएमई के 9 किमी एलिवेटेड रोड से फरीदाबाद को बड़ी राहत, दिल्ली-नोएडा के भीषण जाम से मिलेगी निजात

Published: Sat, 22 Aug 2026 07:54 PM (IST)

दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के 9 किलोमीटर एलिवेटेड रोड के ट्रायल खुलने से फरीदाबाद से दिल्ली की यात्रा आसान हो गई ...और पढ़ें

दिल्ली-मुंंबई एक्सप्रेसवे। जागरण आर्काइव

दिल्ली-मुंंबई एक्सप्रेसवे। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे का 9 किमी एलिवेटेड रोड यातायात के लिए खुला।

  2. फरीदाबाद से दिल्ली आवाजाही अब हुई बेहद सुगम।

  3. कालिंदी कुंज-आश्रम जाम से हजारों वाहन चालकों को मिली राहत।

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) के नौ किलोमीटर एलिवेटिड रोड के शुरू होने औद्योगिक नगरी में रहने वाले हजारों वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है।

तीन प्रमुख एक्सप्रेसवे को कनेक्ट करने वाले डीएमई पर यातायात शुरू होने के बाद कालिंदी कुंज के जाम में फंसने वाले हजारों वाहन चालक खुश हैं। अब दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-मुरादाबाद हाईवे की राह आसान हो गई है।

इन मार्गों पर जाने के लिए दिल्ली और नोएडा के भीषण जाम से होकर गुजरना पड़ रहा था। भले ही ट्रायल के बहाने लेकिन वाहन चालकों को को बड़ी राहत मिली है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक अधिकारी ने बताया कि बहुत जल्द प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसका विधिवत शुभारंभ करेंगे।

क्या बोले लोग

दिल्ली-आगरा हाईवे और दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे से चंडीगढ़, देहरादून-ऋषिकेश और मुरादाबाद की तरफ जाने वाले हजारों वाहन चालकों को अब दिल्ली व नोएडा के भीषण जाम में नहीं फंसना पड़ेगा।

फरीदाबाद से बदरपुर-आश्रम तक जाम रहता है और इसी तरह अभी कालिंदी कुंज से नोएडा के भीतर से होकर आने-जाने वाले वाहन चालकों को जाम से रूबरू होना पड़ता था।

-हेम चंदीला, व्यवसायी।

मैं भी पहले आश्रम से फरीदाबाद आते या जाते समय जाम में फंसता था, लेकिन अब इससे मुक्ति मिल ही गई। मेरा मानना है कि भाजपा सरकार ने देश को अभूतपूर्व रोड नेटवर्क दिया है, जो पूर्व में कोई भी सरकार नहीं दे सकी। डीएमई ही नहीं बल्कि दिल्ली से आप देश के किसी भी कोने में चले जाइए, किसी को गाड़ी में ब्रेक नहीं लगाना पड़ता।

-राजकुमार शर्मा, एडवोकेट।

डीएमई के कालिंदी कुंज-आश्रम एलिवेटिड रोड के खुलने से सबसे ज्यादा फायदा फरीदाबाद वासियों को हुआ है। उद्योग, व्यवसायी व अन्य हजारों लोगों का दिल्ली-नोएडा क्रास करके लंबी दूरी तय करना सिर्फ जाम के कारण बोझिल हो जाता था। अब इससे राहत मिली है तो आवाजाही और सुगम हो जाएगी।

- रचना कसाना, लेखिका।

कालिंदी कुंज से आश्रम के बीच दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बचे हुए नौ किलोमीटर के इस हिस्से को शुक्रवार को ट्रायल के तौर पर यातायात के लिए खोला गया है। ट्रायल के दौरान इस रूट पर ट्रैफिक के दबाव और सुरक्षा मानकों को परखा जा रहा है। हालांकि इसका आधिकारिक तौर पर उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाना तय है।

इस नए रास्ते के इस्तेमाल से आश्रम से कालिंदी कुंज, सराय काले खां और फरीदाबाद आने-जाने वाले यात्रियों को सरिता विहार, मोहन एस्टेट और मथुरा रोड के भारी ट्रैफिक जाम में नहीं फंसना पड़ेगा।

- धीरज सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।

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अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में इस वर्ष मौसमी इन्फ्लुएंजा के वायरस का पैटर्न बदल गया है। पिछले वर्ष जहां एच3एन2 प्रमुख था, वहीं इस साल एच1एन1 तेजी से प्रभावी हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग के 20 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में इस वर्ष इन्फ्लुएंजा-ए के 2,392 मामले सामने आए हैं। इनमें 1,777 मामले एच1एन1 के हैं। इसके मुकाबले एच3 के 138 और एच1 के 37 मामले मिले हैं।

इस तरह एच1एन1 के मामले एच3 से करीब 13 गुना अधिक हैं। दिल्ली में 20 अगस्त को ही इन्फ्लुएंजा के 159 नए मामले सामने आए। इनमें इन्फ्लुएंजा-ए के 155 मामले थे। एक दिन में सामने आए मामलों में 114 एच1एन1 के थे।

यानी उस दिन सामने आए कुल इन्फ्लुएंजा मामलों में एच1एन1 के मामले करीब 72 प्रतिशत थे। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग लगातार इन्फ्लुएंजा लाइक इलनेस (आइएलआइ) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (एसएआरआइ) के मामलों की निगरानी कर रहा है।

इन्फ्लुएंजा-ए में एच1एन1 की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी

आंकड़ों के अनुसार, इन्फ्लुएंजा-ए के 2,392 मामलों में एच1एन1 के करीब 74 प्रतिशत है। एच3 के 138, एच1 के 37 और अन्य प्रकार के 440 हैं। इन्फ्लुएंजा-बी के 210 मामले हैं। 200 विक्टोरिया और 10 अन्य प्रकार के हैं।

इन्फ्लुएंजा-ए और बी को मिलाकर इस वर्ष अब तक इन्फ्लुएंजा के कुल 2,602 मामले दर्ज हो चुके हैं। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मौसमी इन्फ्लुएंजा का प्रभाव जनवरी से मार्च और दूसरा मानसून के बाद बढ़ता है।

आरंभिक 48 घंटे उपचार के लिए अहम

विशेषज्ञों के अनुसार एच1एन1 मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है। इसकी बढ़ोतरी को महामारी संकट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है।

लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने और बचाव के उपायों का पालन करने चाहिए। एम्स मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. नवल विक्रम की सलाह है कि एच1एन1 के लक्षण दिखाई देने पर आरंभिक स्तर पर ही उपचार शुरू करना अधिक प्रभावी रहता है।

बीमारी की शुरुआत के 48 घंटे के भीतर एंटीवायरल दवा देने से संक्रमण को नियंत्रित करने और इसके गंभीर रूप लेने का खतरा कम किया जा सकता है। मरीज देर से अस्पताल पहुंचता है तो भी उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए, विशेषकर जब बुखार लगातार बना हो, सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर शिकायतें हों।

स्पष्ट किया कि सामान्य वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं किया जाता, इन्हें बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका या पुष्टि होने पर डाक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

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