फतेहाबाद में टैक्स चोरी का बड़ा खेल, 5% GST और 1 प्रतिशत मार्केट फीस बचाने के लिए सरसों की 'उंचती' खरीद
फतेहाबाद की अनाज मंडियों में व्यापारियों ने 5% जीएसटी और 1% मार्केट फीस बचाने के लिए सरसों की 'उंचती' खरीद की, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व ...और पढ़ें
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फतेहाबाद में टैक्स चोरी का बड़ा खेल (फोटो: जागरण)
राजेश भादू, फतेहाबाद। जिले की अनाज मंडियों में इस बार सरसों खरीद के नाम पर एक बड़ा खेला हुआ है। पांच प्रतिशत जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) बचाने की जुगत में निजी खरीदारों और व्यापारियों ने मार्केट कमेटी के अधिकारियों के साथ मिलकर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया है।
मंडियों में सरेआम उंचती (बिना सरकारी रिकार्ड के) सरसों की खरीद की गई है। इस गोलमाल का सीधा असर सरकारी राजस्व पर पड़ा है, जिसके चलते पिछले साल के मुकाबले इस बार कागजों में सरसों की आवक करीब छह गुना कम दर्शाई गई है। इससे सरकार को करीब छह करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
प्रति क्विंटल 330 रुपये बचाने के लिए एक प्रतिशत मार्केट फीस चोरी
बाजार के जानकारों की मानें तो मंडियों में उपज की खरीद पर एक प्रतिशत मार्केट फीस लगती है। यदि व्यापारी यह एक प्रतिशत फीस भर देता है, तो खरीद का पूरा रिकार्ड आनलाइन दर्ज हो जाता है। ऐसे में खरीदार को सरकार द्वारा निर्धारित पांच प्रतिशत जीएसटी भी भरना पड़ता है।
इस बार मंडियों में प्राइवेट तौर पर सरसों 6200 से 6500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। इस भाव पर एक प्रतिशत के हिसाब से करीब 65 रुपये मार्केट फीस बनती थी। लेकिन, इसे भरने पर व्यापारी को प्रति क्विंटल लगभग 330 रुपये से अधिक का जीएसटी चुकाना पड़ता।
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इसी 300 रुपये की मोटी रकम को डकारने के लिए व्यापारियों ने मार्केट कमेटी के कर्मचारियों से साठगांठ कर मार्केट फीस ही चोरी कर ली। एमएसपी के आधार पर न्यूनतम 62 रुपये प्रति क्विंटल भी मार्केट फीस का हिसाब लगाया जाए, तो सरकार के खाते में एक करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व आना था, जो अब डूब चुका है।
अधिकारियों ने साधी चुप्पी, गोदामों में डंप है सरसों
इस पूरे खेल में मार्केट कमेटी के साथ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूरी तरह से आंखें मूंदे रखीं। सरसों का भाव लगातार बढ़ रहा है। सीजन के दौरान प्राइवेट खरीदारों ने 6200 से 6500 रुपये के भाव में बड़े पैमाने पर उंचती सरसों खरीद कर अपने बड़े-बड़े गोदामों में डंप कर ली।
अब बाजार में सरसों का भाव 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जिससे प्राइवेट खरीदारों को बिना टैक्स दिए ही तगड़ा मुनाफा हो रहा है। अवैध तरीके से फसल खरीद कर कालाबाजारी करने वालों पर नकेल कसने के लिए मार्केट कमेटी के अलावा अन्य विभाग भी तय हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने गोदामों में चेकिंग का अभियान चलाने की जहमत नहीं उठाई। इसी के चलते आने वाले दिनों में सरसों के तेल के भाव में बढ़ोतरी होगी। जिसका सीधा असर आमजन पर पड़ेगा।
सीएम फ्लाइंग और कराधान विभाग कार्रवाई से खुलेगी गड़बड़ी
मंडी प्रांगण में अधिकारियों की नाक के नीचे उंचती सरसों की खरीद धड़ल्ले से हुई है। अब इस बड़े घोटाले को उजागर करने के लिए कराधान विभाग और सीएम फ्लाइंग की टीमों को बड़े खरीदारों के गोदामों पर सीधे तौर पर छापामार कार्रवाई करनी होगी। इसके अलावा, जिन किसानों ने आढ़तियों को अपनी सरसों बेची है, उन्हें भी जागरूक होना होगा। किसान व्यापारियों से अपनी उपज का जे-फार्म मांगें। जो आढ़ती उंचती खरीद करते हैं, वे कभी जे-फार्म जारी नहीं कर सकते, जिससे उनकी चोरी तुरंत पकड़ी जा सकती है।
भट्टूकलां व भूना में आंकड़ों का भारी झोल
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार मंडियों में आई उपज में भारी अंतर है। पिछले साल जब सरकारी खरीद हुई थी, तब भट्टूकलां मंडी में 1 लाख 9 क्विंटल सरसों आई थी, जबकि इस बार महज 16,967 क्विंटल ही आन रिकार्ड दर्ज हुई है।
इसी तरह, भूना में पिछले साल 46 हजार क्विंटल के मुकाबले इस बार केवल 5 हजार 666 क्विंटल सरसों ही रिकार्ड में आई। फतेहाबाद मंडी में यह अंतर थोड़ा कम रहा, जहां पिछले साल 18 हजार 706 क्विंटल के मुकाबले इस बार 10,319 क्विंटल सरसों की खरीद रिकार्ड हुई है। जिले भर में कुल मिलाकर महज 32,595 क्विंटल सरसों की ही आनन रिकार्ड खरीद दिखाई गई है।
| वर्ष | एमसपी (₹) | सरसों की खरीद | मार्केट फीस (₹) |
| 2022 | 5,050 | 66,661 | 40,87,494 |
| 2023 | 5,450 | 1,43,402 | 75,87,529 |
| 2024 | 5,650 | 2,63,238 | 1,48,48,437 |
| 2025 | 5,950 | 1,74,612 | 1,03,60,993 |
| 2026 | 6,200 | 32,595 (अब तक) | 16,29,067 (अब तक) |